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अमरीकी अर्थशास्त्री रोथ और शैपले को नोबेल
बीबीसी हिंदी
Updated Mon, 15 Oct 2012 09:42 PM IST
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संस्था की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है, ''दोनों अर्थशास्त्रियों को ‘स्थिर आवंटन के सिद्धांत तथा बाज़ार की अभिकल्पना का कार्य’ के लिए यह पुरस्कार दिया गया है।''
एलविन रोथ हार्वर्ड विश्वविधालय में प्रोफ़ेसर हैं जबकि लॉएड शैपले लॉस एंजिल्स स्थित कैलिफ़ॉर्निया विश्वविधालय में पढ़ाते हैं।
पुरस्कार की घोषणा के बाद रोथ ने इसका स्वागत करते हुए कहा, ''इसकी पूरी आशा की जा रही थी कि लॉएड शैपले को नोबेल पुरस्कार के लिए चुना जाएगा। अगर उन्हें दिया जाता तो ये बड़ी भारी भूल होती। मुझे संयुक्त रूप से उनके साथ ये पुरस्कार जीतने पर काफ़ी ख़ुशी है।''
उन दोनों अर्शशास्त्रियों के काम के बारे में कहा जाता है कि उनका संबंध स्कूल में बच्चों के दाख़िले से लेकर अंग प्रतिरोपण कराने वाले मरीज़ों तक से है।
बाज़ार पर प्रभाव
हालाकि उन दोनों ने अलग-अलग काम किया लेकिन नोबेल ज्यूरी के अनुसार दोनों के काम ने नए शोध के लिए रास्ते खोले हैं और उनके शोध की वजह से कई बाज़ारों के प्रदर्शन बेहतर हुए हैं।
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शैपले और उनके सहयोगी डेविड गेल ने 1962 में एक नए सिद्धांत का प्रतिपादन किया था जिसके तहत इस बात पर विचार विमर्श किया गया था कि बाज़ार में मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कैसे कम किया जाए।
उसके अस्सी के दशक में एलविन रोथ ने नए-नए बने डॉक्टरों के लिए बाज़ार कैसा है इस पर अपना अध्ययन शुरू किया।
यह एक बड़ी समस्या थी और मेडिकल छात्रों की कमी के कारण अस्पताल वाले छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी करने से पहले ही इंटर्नशीप के लिए बुला लेते थे।
अपने अध्ययन के दौरान एलविन रोथ ने पाया कि मेडिकल छात्रों की कमी से निबटने के लिए अपनाए गए तरीक़े का सिद्धांत शैपले और गेल के ज़रिए दिए गए सिद्धांत के बहुत क़रीब था।
रोथ और शैपले को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल दिए जाने से इस पुरस्कार पर अमरीकियों का दबदबा एक दफ़ा फिर साबित हो गया है।
अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार शुरू से नहीं दिया जाता था। इसे 1969 से दिया जाने लगा है। इनाम के तौर पर उन्हें लगभग 12 लाख डॉलर मिलेंगे जो वे दोनों आपस में बांटेगें।
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एलविन रोथ हार्वर्ड विश्वविधालय में प्रोफ़ेसर हैं जबकि लॉएड शैपले लॉस एंजिल्स स्थित कैलिफ़ॉर्निया विश्वविधालय में पढ़ाते हैं।
पुरस्कार की घोषणा के बाद रोथ ने इसका स्वागत करते हुए कहा, ''इसकी पूरी आशा की जा रही थी कि लॉएड शैपले को नोबेल पुरस्कार के लिए चुना जाएगा। अगर उन्हें दिया जाता तो ये बड़ी भारी भूल होती। मुझे संयुक्त रूप से उनके साथ ये पुरस्कार जीतने पर काफ़ी ख़ुशी है।''
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उन दोनों अर्शशास्त्रियों के काम के बारे में कहा जाता है कि उनका संबंध स्कूल में बच्चों के दाख़िले से लेकर अंग प्रतिरोपण कराने वाले मरीज़ों तक से है।
बाज़ार पर प्रभाव
हालाकि उन दोनों ने अलग-अलग काम किया लेकिन नोबेल ज्यूरी के अनुसार दोनों के काम ने नए शोध के लिए रास्ते खोले हैं और उनके शोध की वजह से कई बाज़ारों के प्रदर्शन बेहतर हुए हैं।
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शैपले और उनके सहयोगी डेविड गेल ने 1962 में एक नए सिद्धांत का प्रतिपादन किया था जिसके तहत इस बात पर विचार विमर्श किया गया था कि बाज़ार में मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को कैसे कम किया जाए।
उसके अस्सी के दशक में एलविन रोथ ने नए-नए बने डॉक्टरों के लिए बाज़ार कैसा है इस पर अपना अध्ययन शुरू किया।
यह एक बड़ी समस्या थी और मेडिकल छात्रों की कमी के कारण अस्पताल वाले छात्रों को उनकी पढ़ाई पूरी करने से पहले ही इंटर्नशीप के लिए बुला लेते थे।
अपने अध्ययन के दौरान एलविन रोथ ने पाया कि मेडिकल छात्रों की कमी से निबटने के लिए अपनाए गए तरीक़े का सिद्धांत शैपले और गेल के ज़रिए दिए गए सिद्धांत के बहुत क़रीब था।
रोथ और शैपले को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल दिए जाने से इस पुरस्कार पर अमरीकियों का दबदबा एक दफ़ा फिर साबित हो गया है।
अर्थशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार शुरू से नहीं दिया जाता था। इसे 1969 से दिया जाने लगा है। इनाम के तौर पर उन्हें लगभग 12 लाख डॉलर मिलेंगे जो वे दोनों आपस में बांटेगें।