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ईरान पर फिर भारत के आगे झुका अमेरिका, प्रतिबंधों में दी छूट
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 07 Nov 2018 09:45 AM IST
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चाबहार बंदरगाह
- फोटो : Iran Daily
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अमेरिका ने मंगलवार को घोषणा कर कहा कि भारत सहित आठ देशों पर लगाए गए प्रतिबंधों को अस्थाई तौर पर हटाया गया है। अमेरिका ने ईरान में विकसित किए जा रहे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह और इसे अफगानिस्तान से जोड़ने वाली रेलवे लाइन के निर्माण के लिए भारत को ये छूट दी है।
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यह प्रतिबंध ईरान के साथ व्यापार करने पर लगाए गए थे। अमेरिकी सरकार ने ईरान के बैंकिंग और पेट्रोलियम क्षेत्रों पर जो प्रतिबंध लगाए थे वह नवंबर की शुरुआत से ही लागू हो गए हैं। अमेरिका ने अपने इस फैसले के बारे में कहा है कि तेल की कीमतों को कम करने और गिरते बाजार को बचाने के लिए ये फैसला लिया गया है। लेकिन अब इसकी एक और वजह सामने आ गई है और वह है चाबहार बंदरगाह। यह बंदरगाह अफगानिस्तान की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और वहां आम जनता को आतंकवाद व हिंसा से बचाने के लिए एक अहम परियोजना है। साथ ही यह बंदरगाह अमेरिका की अफगान नीति और एशिया में लंबी अवधि की रणनीतिक जरुरत को देखते हुए भी जरुरी है।
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'प्रतिबंधों में छूट इसलिए दी गई है ताकि चाबहार बंदरगाह का विकास हो सके। साथ ही रेलने का निर्माण हो सके, जिससे सामान अफगानिस्तान तक पहुंचाया जा सके। अफगानिस्तान के ईरानियन पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को भी प्रतिबंधों से मुक्त किया जा रहा था'
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ट्रंप प्रशासन का यह फैसला दिखाता है कि ओमान की खाड़ी में विकसित किए जा रहे इस बंदरगाह में भारत की भूमिका को अमेरिका मान्यता देता है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि एक दिन पहले ही ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए और छूट देने में उसका रुख बेहद सख्त है। यह बंदरगाह युद्ध ग्रस्त अफगानिस्तान के विकास के लिए सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि गहन विचार के बाद विदेश मंत्री ने 2012 के ईरान स्वतंत्रता एवं प्रसार रोधी अधिनियम के तहत लगाए गए कुछ प्रतिबंधों से छूट देने का प्रावधान किया है जो चाबहार बंदरगाह के विकास, उससे जुड़े एक रेलवे लाइन के निर्माण और बंदरगाह के माध्यम से अफगानिस्तान के इस्तेमाल वाली, प्रतिबंध से अलग रखी गई वस्तुओं के नौवहन से संबंधित है। साथ ही यह ईरान के पेट्रोलियम उत्पादों के देश में निरंतर आयात से भी जुड़ा हुआ है।
अमेरिकी अधिकारी ने कहा, 'हमारे दोनों देशों से घनिष्ठ संबंधों को देखते हुए इस दबाव की नीति में रहत दी गई है। ये फैसला इसलिए भी लिया गया है ताकि ईरानी शासन की अस्थिर नीतियों में बदलाव किया जा सके।'
बता दें बिना पाकिस्तान के मदद से सीधे अफगानिस्तान से जोड़ने और समुद्री सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण चाबहार बंदरगाह परियोजना भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है। अमेरिकी प्रतिबंध के कारण भारत को इस परियोजना में ईरान से झटका लगने और ईरान की चीन से दोस्ती बढने का अंदेशा था।
चीन भी नहीं चाहता कि चाबहार परियोजना का लाभ भारत उठा पाए। चूंकि चीन ने ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध को अस्वीकार कर दिया है और वह ईरान का सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। ऐसे में चीन ईरान के जरिए भारत को चाबहार परियोजना में झटका दे सकता था।