फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   America ›   UN report: Naxalites recruiting children in Jharkhand and Chhattisgarh

यूएन की रिपोर्ट में खुलासा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में मासूम बच्चों की भर्तियां कर रहे हैं नक्सली

Mon, 02 Jul 2018 09:13 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाल Updated Mon, 02 Jul 2018 09:13 AM IST
विज्ञापन
UN report: Naxalites recruiting children in Jharkhand and Chhattisgarh

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बीते हफ्ते एक रिपोर्ट जारी की है। जिसके मुताबिक भारत में सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ने के लिए नक्सली झारखंड और छत्तीसगढ़ से बच्चों की भर्ती करते हैं। रिपोर्ट पर सीआरपीएफ के जवानों का कहना है कि नक्सलियों द्वारा ऐसा किया जाना कोई नई बात नहीं है।

विज्ञापन


'चिल्ड्रन इन आर्म्ड कॉनफ्लिक्ट' (सशस्त्र संघर्ष में बच्चे) नामक इस रिपोर्ट में दुनिया के 20 देशों में बच्चों को मारने और उनके इस्तेमाल किए जाने के बारे में बताया गया है। इन देशों में भारत के अलावा सीरिया, अफगानिस्तान, यमन, फिलीपींस और नाइजीरिया का नाम भी शामिल है। इसमें यह भी बताया गया है कि नक्सली किस प्रकार बच्चों की भर्ती के लिए लॉटरी सिस्टम का प्रयोग करते हैं, रिपोर्ट में खास तौर पर झारखंड की बात कही गई है।
विज्ञापन


संयुक्त राष्ट्र को लगातार बच्चों की भर्ती और उन्हें इस्तेमाल करने संबंधित रिपोर्ट मिलती रहती हैं। जिनमें मुख्य रूप से झारखंड और छत्तीसगढ़ का नाम शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार नक्सली झारखंड से बच्चों की भर्ती करने के लिए लॉटरी सिस्टम का प्रयोग करते हैं। हालांकि रिपोर्ट में ऐसे कोई आंकड़े नहीं बताए गए हैं जिनसे पता चल सके कि कितने बच्चों की भर्ती की जाती है और ना ही इससे संबंधित कोई  केस स्टडी भी उपलब्ध नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

8,000 बच्चों को लड़ाकों के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है

UN report: Naxalites recruiting children in Jharkhand and Chhattisgarh

रिपोर्ट पर सीआरपीएफ चीफ राजीव राय भटनागर का कहना है कि लॉटरी सिस्टम में ड्रॉ किया जाता है। पर्चियों में बच्चों के नाम लिखे होते हैं। जिस भी बच्चे का नाम पर्ची में निकलता है उसे भर्ती कर लिया जाता है। इन बच्चों की उम्र 16-18  के बीच होती है। इनके परिवारों को कहा जाता है कि वह अपने एक बच्चे को नक्सलियों को तोहफे में दे दें।  जिस कारण परिवार के दबाव में आकर बच्चों को नक्सलियों के साथ जाना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि इन बच्चों में अधिकतर लड़के होते हैं जिनकी उम्र 16 साल से अधिक होती है। इन बच्चों का इस्तेमाल नक्सली पारंपरिक तौर पर करते हैं और इन्हें बाल दस्ता तथा बाल सैनिक कहा जाता है। इनका इस्तेमाल नक्सली मुठभेड़ के दौरान ढ़ाल के रूप में किया जाता है। ये बाल सैनिक तकनीकी और मुखबिरों का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि इन बच्चों के माता पिता अपनी जान बचाने के लिए पुलिस को इस बारे में शिकायत नहीं करते हैं।

अधिकतर लोगों का इस रिपोर्ट पर कहना है कि यह एक तरह से अफवाह जैसा है क्योंकि ना तो इस रिपोर्ट में कोई केस स्टडी दी गई है और ना ही किसी प्रकार के कोई आंकड़ें बताए गए हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2017 में दुनिया भर के विभिन्न देशों में जो भी संघर्ष हुए हैं उनमें करीब 10,000 बच्चों की मौत हुई है और कुछ घायल भी हुए हैं। इसके अलावा 8,000 बच्चों को लड़ाकों के तौर पर इस्तेमाल किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed