फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   America ›   syria will strong if attack be late

सीरिया: हमले में जितनी देरी होगी, असद उतने ही 'मजबूत होंगे'

Sun, 01 Sep 2013 08:25 PM IST
इंटरनेट डेस्क
इंटरनेट डेस्क Updated Sun, 01 Sep 2013 08:25 PM IST
विज्ञापन
syria will strong if attack be late

सीरिया के एक विपक्षी गुट का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा संभावित सैन्य कार्रवाई में जितनी देरी करेंगे, सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की सेनाएं उतनी ही मजबूत होंगी।

विज्ञापन


ओबामा का कहना है कि सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप का फैसला अमेरिकी कांग्रेस में विचार-विमर्श के बाद ही किया जाएगा।

लेकिन सीरिया के विपक्षी गठबंधन सीरियन नेशनल कोअलिशन के प्रवक्ता लोउए साफी ने इस फैसले को अमेरिका के 'नेतृत्व की विफलता' बताया है।

शनिवार को ओबामा का भाषण खत्म होते ही सीरिया की सरकारी सेना ने विपक्ष के कब्जे वाले हिस्सों में दोबारा से गोलाबारी की।

अमेरिका का कहना है कि सीरिया की सेना ने पिछले महीने दमिश्क के पास रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया, लेकिन सीरिया की सरकार इन आरोपों से इनकार करती है।

अमेरिका का कहना है कि 21 अगस्त को हुए इस रासायनिक हमले में 1,429 लोग मारे गए।

अमेरिकी राष्ट्रपति कह चुके हैं कि सीरिया में रासायनिक हमला 'लक्ष्मण रेखा' है जिसके बाद अमेरिका वहां हस्तक्षेप के लिए मजबूर होगा।

"जरूरी और सही"
शनिवार को बराक ओबामा ने कहा कि जो भी कार्रवाई होगी, वो सीमित होगी। उन्होंने जमीनी हमला करने की संभावना खारिज की।

उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को एक मसौदा भेजा है, जिसमें सीरिया की सरकार के खिलाफ बल प्रयोग की मंजूरी मांगी गई। बराक ओबामा सीरिया की सरकार को रासायनिक हमला करने से रोकने को "ज़रूरी और सही" मानते हैं।
विज्ञापन


अमेरिकी कांग्रेस की अगली बैठक नौ सितंबर को होगी।

इसका मतलब यह है कि तब तक अमेरिका की तरफ से सीरिया में कोई भी सैन्य अभियान नहीं चलाया जाएगा।

अरब जगत का रुख
उधर, अरब देशों के विदेश मंत्री सीरिया पर अपने रुख पर चर्चा के लिए काहिरा में बैठक करेंगे।

अरब लीग ने पिछले महीने की शुरुआत में सीरिया की सरकार पर कथित रासायनिक हमला करने का आरोप लगाया था लेकिन वह खुले तौर पर सीरिया में सैन्य हस्तक्षेप का समर्थन नहीं कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अमेरिका लीग पर अपने रुख पर कायम बने रहने का दबाव डाल रहा है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, दोनों ने निजी तौर पर असद सरकार को हटाने को मंजूरी दी है।

लेकिन अरब लीग के मिस्र और जॉर्डन और लेबनान जैसे सदस्य राजनयिक हल की अपील कर रहे हैं।

'लोगों को राहत'
बीबीसी के संवाददाता जेरेमी बोवेन ने सीरिया की राजधानी दमिश्क से बताया कि शहर में उन लोगों को राहत मिली है जो यह सोच कर घबरा रहे थे कि इस सप्ताहांत से अमेरिकी हमले शुरू हो जाएंगे।

उनका कहना है कि इससे सरकार को कुछ संवेदनशील सैन्य उपकरण इधर-उधर करने का समय मिल जाएगा।

मुख्य विपक्षी दल के नेता लोउए साफी ने सीएनएन से कहा, "हमें डर है कि कार्रवाई न होने से सरकार मजबूत हो सकती है, साथ ही वह और भी गंभीर तरीके से दोबारा हमले कर सकते हैं।"


शनिवार को व्हाइट हाउस में बराक ओबामा ने कहा था कि उन्हें लगता है कि सीरिया में हस्तक्षेप के बारे में बहस होनी जरूरी है।

अमेरिकी कांग्रेस ने बराक ओबामा के इस कदम का स्वागत किया है।

पुतिन की चेतावनी
इससे पहले ब्रिटेन की सरकार को सीरिया में किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई के प्रस्ताव पर संसद में बहुमत नहीं मिला था।

फ्रांस भी सीरिया में सैन्य कार्रवाई का समर्थन करता है और वहां की संसद में इस मुद्दे पर बुधवार को बहस होनी है।

लेकिन शनिवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अमेरिका को चुनौती दी कि वो सीरिया में विद्रोहियों के खिलाफ सरकार द्वारा रासायनिक हमले के सबूत पेश करे।

रूस और चीन संयुक्त राष्ट्र में सीरिया पर लाए गए दो प्रस्तावों पर वीटो कर चुके हैं और वो वहां बाहरी हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं।

सीरिया के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनका देश पश्चिम के किसी भी हमले से अपना बचाव करगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed