एक रिपोर्ट ने सीआईए के बारे में किया ये चौंकानेवाला खुलासा
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अमेरिकी अखबार 'वॉशिंगटन पोस्ट' ने कहा है कि अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए ने अपने पूछताछ के तरीकों की सख्ती और प्रभाव के बारे में अमेरिकी सरकार को बार-बार गुमराह किया था।
अमेरिकी सीनेट की एक बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट में कहा गया है कि सीआईए ने कैदियों से पूछताछ के एक खुफिया 'काली कोठरी' का इस्तेमाल किया और ऐसे तरीकों का इस्तेमाल किया गया जिनके बारे में पहले जानकारी नहीं थी।
कैदियों से पूछताछ के इन तरीकों में बेहद ठंडे पानी में संदिग्धों को डुबाकर रखना और कैदियों का सिर दीवार पर मारना शामिल है। कैदियों के साथ दुर्व्यवहार के ये मामले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के शासनकाल के दौरान के हैं।
सीआईए के झूठे दावे
सीआईए के कैदियों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी का कहना है कि वैसे सीआईए का पूछताछ कार्यक्रम खुफिया मामलों में ख़ास उपयोगी साबित नहीं हुआ है।
इस अधिकारी का यह भी कहना है कि इस खुफिया एजेंसी की ओर से अपने कार्यक्रमों को काफी बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। इस कारण से ये कार्यक्रम लोगों को अधिक कारगर मालूम पड़ते थे।
अमेरिकी सीनेट की यह रिपोर्ट 2009 में सीआईए की गतिविधियों की जांच के लिए शुरू की गई विस्तृत जांच पर आधारित है। सीनेट की खुफिया समिति की अगली बैठक अब गुरुवार को होगी।
83 बार ठंडे पानी में डुबोया गया
'वॉशिंगटन पोस्ट' के अनुसार सीआईए मुख्यालय के अधिकारियों ने कैदियों से सख्ती से पूछताछ जारी रखने के आदेश दिए हालांकि उन्हें यकीन था कि अब कैदियों के पास देने के लिए और जानकारी नहीं है।
एक अधिकारी ने बताया कि अलकायदा के संदिग्ध अबु जुबैदा से सारी महत्वपूर्ण जानकारी उन्हें 83 बार ठंडे पानी में डुबोने (वाटरबोर्ड) से पहले ही मिल चुकी थी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कैदियों को जिस तरह की परिस्थितियों में रहने पर मजबूर किया जाता था, उसे लेकर सीआईए के अंदर भी काफी मतभेद थे।
'तथ्यात्मक गलतियां'
एक सीआईए प्रवक्ता ने अखबार 'द पोस्ट' से कहा कि एजेंसी को अभी तक रिपोर्ट की अंतिम प्रति नहीं मिली है इसलिए वह इस पर आधिकारिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।
हालांकि मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों ने अखबार को व्यक्तिगत तौर पर कहा कि इस 6300 पन्नों की रिपोर्ट में तथ्यात्मक गलतियां मौजूद हैं और इसके निष्कर्ष भ्रमित करने वाले हैं।
इससे पहले मार्च के शुरू में सीनेट की खुफिया समिति के प्रमुख ने सीआईए पर आरोप लगाया था कि पूछताछ के दौरान उसने गलत तरीके से सीनेट के कंप्यूटर में घुसपैठ करने का आरोप लगाया था।