मौत के बाद सार्वजनिक हुई स्टीफन हॉकिंग की थ्योरी, ब्रह्मांड को लेकर किया नया खुलासा
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महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग की मौत के बाद उनकी आखिरी थ्योरी गुरुवार को सार्वजनिक की गई। एनर्जी फिजिक्स में प्रकाशित इस थ्योरी में हॉकिंग ने अपनी ही ब्रह्माण पर दी पुरानी थ्योरी को गलत साबित किया है। बताया जा रहा ये थ्योरी उन्होंने अपनी मौत से ठीक एक हफ्ते पहले ही फाइनल की थी। ब्रह्मांड के संबंध में अपनी पहली थ्योरी में हॉकिंग ने लिखा था कि alt147 अंतरिक्ष में ऐसी जगह भी हो सकती है जहां हमारी धरती जैसे ग्रह हों। जहां आज भी डायनासोर हों और प्राचीन मानव शिकार करते हों।
उन्होंने कहा था कि वहां ऐसे खगोलीय पिंड भी हो सकते हैं जो हमारी धरती से बिल्कुल अलग हों। जिनके पास तारे, सूर्य या ग्लैक्सी न हों, लेकिन वहां भी भौतिकी के बिल्कुल वैसे ही नियम हों जैसे हमारी धरती पर हैं। लेकिन अपनी आखिरी थ्योरी में उन्होंने कहा है कि alt147 बिग बैंग से पहले क्या था, ये कोई नहीं कह सकता। उन्होंने बताया कि जो भी ऐसे दावे कर रहे हैं वो झूठ बोल रहे हैं।
उन्होंने कहा है कि पहले वह भी ऐसे दावे किया करते थे जो कि उनके ही अध्ययन में गलत साबित हुए हैं। इसके अलावा हॉकिंग की पुरानी थ्योरी में यह भी कहा गया था कि बिग बैंग के बाद एक नहीं बल्कि अनंत ब्रह्मांड होंगे। लेकिन इस थ्योरी में उन्होंने कहा है कि ब्रह्मांड की संख्या अनंत नहीं हो सकती। उन्होंने इस संदेह को सुलझाते हुए बताया, ये जरूर संभव है कि उसके ग्रह धरती से बिल्कुल अलग हों।
परिस्थितियों के बदलने से नियम और नतीजे भी बदल जाते हैं
उन्होंने कहा कि वहां सूर्य या तारे नहीं होंगे लेकिन भौतिकी के नियम हमारे जैसे ही होंगे। उनके मुताबिक अनंत ब्रह्मांड का अर्थ है अनंत प्रकार के भौतिकी नियम, जो कि संभव ही नहीं हैं। बता दें हॉकिंग ने यह शोध बेल्जियम के प्रोफेसर थॉमस हर्टोग के साथ मिलकर किया है। 14 अप्रैल को हॉकिंग की मौत हुई थी जिससे महज एक हफ्ते पहले ही ये रिसर्च पेपर फाइनल हुआ था। इस पर प्रोफेसर हर्टोग ने कहा है कि alt147 पर अपनी लैब में वह जो भी भौतिकी नियमों का परीक्षण करते हैं जरूरी नहीं कि वह हमेशा के लिए हों।
उन्होंने कहा कि बिग बैंग के बाद ब्रह्मांड का विस्तार हुआ था और धरती ठंडी हुई थी। वहीं उस समय विकसित हुए भौतिकी के नियम तभी की भौगोलिक स्थितियों पर निर्भर करते हैं। उन्होंने कहा कि हॉकिंग के साथ किए शोध से यह साबित होता है कि परिस्थितियों के बदलने के साथ साथ नियम और नतीजे भी बदल जाते हैं।