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उल्कापिंड धरती पर लाए जीवन
वाशिंगटन/एजेंसी
Updated Tue, 25 Sep 2012 11:15 PM IST
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वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस बात का पता लगाया है कि पृथ्वी पर सूक्ष्मजीव दूसरे ग्रहों से आया होगा, जिसके चलते धरती पर जीवन अस्तित्व में आया होगा। इस वैज्ञानिकों की टीम में एक भारतीय मूल का वैज्ञानिक भी शामिल है। प्रिंसटन विश्वविद्यालय, अरीजोना विश्वविद्यालय और स्पेन स्थित सेंत्रो दे अस्त्रोबायोलोजिया के अध्ययनकर्ताओं ने पाया है कि इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि पृथ्वी पर जीवन अन्य ग्रहों से आया होगा।
ऐसा तब हुआ होगा जब पृथ्वी और इसके पड़ोसी ग्रह एक दूसरे के इतने करीब रहे होंगे कि जब वे एक दूसरे के ठोस पदार्थ का आदान प्रदान कर सकते थे। अध्ययन के नतीजों से इस विचार को समर्थन मिला है कि उल्का पिंडों जैसी चीजों के चलते ब्रह्मांड में जीवन संभव हुआ होगा।
इस बारे में पूर्व के अध्ययनों से पता चला था कि अंतरिक्ष में कोई ठोस पदार्थ जिस गति से विचरण करता है उससे इसे किसी अन्य ग्रह द्वारा अपनी ओर खींचे जाने की संभावना बढ़ जाती है। यह अघ्ययन एस्ट्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है और 2012 के यूरोपियन प्लेनेटरी साइंस कांग्रेस में इसे प्रस्तुत किया जाएगा।
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इस शोध से लिथोपैंसपर्मिया थ्योरी को बल मिलता है। इस थ्योरी में जीवन की उत्पत्ति का आधार उल्कापात जैसी खगोलीय घटनाओं के दौरान दूसरे ग्रहों से धरती पर आने वाले छोटी-छोटी चट्टानों को बताया गया है, जिनमें सूक्ष्मजीव की मौजूदगी की बात कही जाती है। ये सूक्ष्मजीव, ज्वालामुखी विस्फोट या किसी अन्य कारकों के चलते दूसरे तत्वों से मिले होंगे। इसके बाद जीवन पनपने का सिलसिला शुरू हुआ होगा। निष्कर्षों पर पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों ने लिथोपैंसपर्मिया थ्योरी पर आधारित कम गति के एक मॉडल का प्रयोग किया। इस मॉडल में तत्वों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को सौ मीटर प्रति सेकेंड पर निर्धारित किया गया।
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ऐसा तब हुआ होगा जब पृथ्वी और इसके पड़ोसी ग्रह एक दूसरे के इतने करीब रहे होंगे कि जब वे एक दूसरे के ठोस पदार्थ का आदान प्रदान कर सकते थे। अध्ययन के नतीजों से इस विचार को समर्थन मिला है कि उल्का पिंडों जैसी चीजों के चलते ब्रह्मांड में जीवन संभव हुआ होगा।
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इस बारे में पूर्व के अध्ययनों से पता चला था कि अंतरिक्ष में कोई ठोस पदार्थ जिस गति से विचरण करता है उससे इसे किसी अन्य ग्रह द्वारा अपनी ओर खींचे जाने की संभावना बढ़ जाती है। यह अघ्ययन एस्ट्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है और 2012 के यूरोपियन प्लेनेटरी साइंस कांग्रेस में इसे प्रस्तुत किया जाएगा।
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इस शोध से लिथोपैंसपर्मिया थ्योरी को बल मिलता है। इस थ्योरी में जीवन की उत्पत्ति का आधार उल्कापात जैसी खगोलीय घटनाओं के दौरान दूसरे ग्रहों से धरती पर आने वाले छोटी-छोटी चट्टानों को बताया गया है, जिनमें सूक्ष्मजीव की मौजूदगी की बात कही जाती है। ये सूक्ष्मजीव, ज्वालामुखी विस्फोट या किसी अन्य कारकों के चलते दूसरे तत्वों से मिले होंगे। इसके बाद जीवन पनपने का सिलसिला शुरू हुआ होगा। निष्कर्षों पर पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों ने लिथोपैंसपर्मिया थ्योरी पर आधारित कम गति के एक मॉडल का प्रयोग किया। इस मॉडल में तत्वों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को सौ मीटर प्रति सेकेंड पर निर्धारित किया गया।