समाज में चर्चित लोगों की छवि बनाती- बिगाड़ती कुछ फिल्में
फिल्में कई बार बड़े और चर्चित लोगों के किरदार को नए नजरिए से पेश करती हैं। अमरीका में मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा का कार्यकाल इस साल खत्म हो रहा है। तो इस मौके पर उन पर बनने वाली फिल्मों की चर्चा हो रही है।
बराक ओबामा पर दो फिल्में आने वाली हैं। हालांकि दोनों ही फिल्में उनके राष्ट्रपति बनने से पहले की घटनाओं पर आधारित हैं। अमरीका में राष्ट्रपतियों पर फिल्में बनाने का चलन है। अब्राहम लिंकन से लेकर जॉन कैनेडी, रिचर्ड निक्सन और जॉर्ज बुश तक पर फिल्में बन चुकी हैं।
इन फिल्मों में उनके कार्यकाल के दौरान हुई बड़ी घटनाओं को फिल्मी तरीके से पेश किया जाता है। लेकिन इन फिल्मों को बनाने के लिए शर्त यही होती है कि राष्ट्रपतियों ने बहुत बड़े फैसले लिए हों, या उनके किसी फैसले के दूरगामी नतीजे निकले हों। जैसे कि अब्राहम लिंकन या फिर निक्सन जैसे राष्ट्रपति जिनका कार्यकाल विवादों में घिरा रहा हो।
जॉन कैनेडी जैसे राष्ट्रपतियों की जिंदगी पर भी कई फिल्में बनी हैं। कैनेडी बेहद लोकप्रिय थे। मगर कार्यकाल के दौरान ही उनका कत्ल कर दिया गया था।राष्ट्रपति बराक ओबामा भाषण देने के उस्ताद हैं। लेकिन, उनके कार्यकाल के आधार पर फिल्में बनाना फिलहाल बड़ी चुनौती है। क्योंकि उन्होंने न तो लिंकन की तरह की मुश्किलों का सामना किया। न ही वो रिचर्ड निक्सन की तरह विवादों में रहे।
ओबामा की एक ही बात बाकी राष्ट्रपतियों से उन्हें अलग करती है। वो है उनकी नस्ल। वो अमरीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति हैं। जबकि हाल के कुछ दूसरे राष्ट्रपतियों पर गौर करें तो बिल क्लिंटन का सेक्स स्कैंडल, कैनेडी के कत्ल की कहानी, निक्सन के वाटरगेट कांड का किस्सा, फिल्मों में तब्दील करने लायक दिखता है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में अमरीकी मामलों के प्रोफेसर इवान मॉर्गन कहते हैं कि ओबामा ने नया कानून बनाने के मोर्चे पर कोई इतिहास नहीं रचा। उन्होंने कोई ऐतिहासिक फैसला भी नहीं लिया।
ऐसे में सिर्फ उनकी सेहत की पॉलिसी यानी ओबामाकेयर पर फिल्म बनाना मुश्किल है।यही वजह है कि ओबामा पर जो दो फिल्में बन रही हैं, वो उनके राष्ट्रपति बनने से पहले की कहानी सुनाती हैं।
'साउथसाइड विद यू'
एक फिल्म, ओबामा की मिशेल से मुलाकात की दास्तान बयां करती है। इसका नाम है, 'साउथसाइड विद यू'। ये फिल्म इसी महीने रिलीज होगी। इसमें शिकागो में ओबामा के एक दिन का किस्सा है, जिस दिन वो मिशेल से मिले थे। इसमें ओबामा की भूमिका पार्कर सॉयर्स ने निभाई है।
पार्कर कहते हैं कि तब शायद ओबामा के जेहन में राजनीति में जाने का बस शुरुआती खयाल रहा होगा। ओबामा पर बन रही दूसरी फिल्म का नाम है, 'बैरी'। ये फिल्म ओबामा के न्यूयॉर्क के कॉलेज में बिताए दिनों पर आधारित है। हालांकि इसके अलावा फिल्म के बारे में कोई और जानकारी सामने नहीं आई है।
अब ये दोनों फिल्में राष्ट्रपति के तौर पर ओबामा की उपलब्धियों पर कुछ नहीं बतातीं। ऐसे में रिटायर होने के बाद ओबामा की नई इमेज इन फिल्मों से तो नहीं बनेगी। फिर इन फिल्मों को ज्यादा दर्शक मिलेंगे, इसकी उम्मीद भी कम ही है।अब शायद आगे चलकर जब ओबामा की जीवनी बाजार में आएगी, तब कोई बड़े बजट वाली फिल्म बने। जिससे ओबामा के बारे में लोग अलग राय कायम करें।
जानकार कहते हैं कि ओसामा बिन लादेन का खात्मा, ओबामा के कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि है। इस पर कैथरीन बिग्लो ने पहले ही 'जीरो डार्क थर्टी' के नाम से फिल्म बनाई है। प्रोफेसर इवान मोर्गन मानते हैं कि उस घटना को नए नजरिए से फिल्मों में पेश किए जाने की पूरी उम्मीद है।
वैसे, ओबामा की अभी उम्र कम है। राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद भी वो लंबे वक्त तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे। इसलिए शायद आगे चलकर वो हॉलीवुड के फिल्मकारों को अपनी जिंदगी की कोई नई कहानी दे दें, फिल्म बनाने के लिए। मगर, लिंकन जैसे राष्ट्रपतियों के मुकाबले वो काफी पीछे रहने वाले हैं।
लिंकन पर अब तक 40 फिल्में बन चुकी हैं। सबसे नई फिल्म 2012 में स्टीवन स्पीलबर्ग ने बनाई थी। लेकिन वो बहुत मजबूत राष्ट्रपति थे। जिन्होंने अमरीका में दास प्रथा खत्म की। इसे लेकर उन्होंने गृह युद्ध का भी सामना किया था।
, 'ऑल द प्रेसिडेंट्स मेन
ओबामा ने ऐसा कुछ नहीं किया। इसी तरह रिचर्ड निक्सन पर उनके वाटरगेट कांड की वजह से कई फिल्में बनीं। वहीं जॉन कैनेडी का ग्लैमर और उनकी रहस्यमयी हत्या भी फिल्मकारों को लुभाते रहे हैं।
निक्सन पर बनी फिल्म, 'ऑल द प्रेसिडेंट्स मेन' ने निक्सन को एक भ्रष्ट और षडयंत्रकारी राजनेता के तौर पर पेश किया। निक्सन की वही इमेज आज भी अमरीकी जनता के जेहन में है।
हालांकि ओलिवर स्टोन की 1995 में आई फिल्म निक्सन ने उनकी छवि को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश की थी। इसी तरह 2008 की फ्रॉस्ट/निक्सन फिल्म ने भी निक्सन के किरदार के प्रति नरमी बरती थी। जिससे लोगों ने मन में निक्सन के प्रति नफरत का भाव कुछ कम हुआ।
वहीं जॉन कैनेडी को लोग सिर्फउनके कत्ल की वजह से याद रखते हैं। क्योंकि कमोबेश हर फिल्म में कैनेडी के कत्ल की ही कहानी बताई गई है। वैसे कम चर्चा में रहे अमरीकी राष्ट्रपतियों की इमेज न फिल्मों से बनी और न बिगड़ी। जैसे कि आइजनहॉवर, जेराल्ड फोर्ड या जिमी कार्टर।
प्रोफेसर मोर्गन कहते हैं कि इन राष्ट्रपतियों में करिश्मे की कमी थी। भले ही इन्होंने बड़े फैसले किए हों। मगर जनता की नजर में उनकी ज्यादा अहमियत नहीं बन सकी। ऐसे नेताओं में हॉलीवुड ने भी दिलचस्पी नहीं ली।
हालांकि राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद जिमी कार्टर का किरदार और भी दिलचस्प हो गया। मगर उन पर अभी जबरदस्त फिल्में बननी बाकी हैं। अमरीकी राष्ट्रपतियों पर फिल्मों के अलावा डॉक्यूमेंटरी भी बनी हैं।
इनसे भी नेताओं के बारे में जनता की राय बनी और बिगड़ी हैं। जैसे कि फारेहाइट 9/11। इससे राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को पसंद करने वाले उन्हें और पसंद करने लगे। जबकि उनसे चिढ़ने वाले ये डॉक्यूमेंट्री देखकर और चिढ़ गए।
इन मिसालों से साफ है कि अभी ओबामा के पास जनता के बीच अपनी नई इमेज गढ़ने के लिए काफी वक्त और मौके हैं। अगले दस सालों में वो फिल्मों के लायक कोई दिलचस्प कहानी अपनी जिंदगी में गढ़ सकते हैं। आखिर वो अभी युवा हैं। राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद भी उन्हें अभी काफी लंबी जिंदगी बितानी है।