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खशोगी हत्या मामला: सऊदी प्रिंस को अमेरिकी सीनेटर ने बताया 'क्रेजी और खतरनाक'

Wed, 05 Dec 2018 08:55 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 05 Dec 2018 08:55 AM IST
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Saudi prince salman is crazy and dangerous said US senators over Khashoggi murder
अमेरिकी सीनेटर को पूरा यकीन कि खशोगी की हत्या में प्रिंस सलमान शामिल थे

अमेरिकी सीनेटरों का कहना है कि जमाल खशोगी हत्या मामले में सीआईए की रिपोर्ट के बाद से अब उन्हें पहले से अधिक यकीन हो गया है कि इस हत्या में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का ही हाथ है। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी इस बात में हामी भरी। दक्षिण कैरोलिना रिपब्लिकन ने कहा कि सऊदी प्रिंस "विनाश करने वाला, खतरनाक और क्रेजी है।" बता दें मामले में सऊदी अरब ने 11 लोगों पर आरोप लगाया है लेकिन इस बात से इनकार कर दिया है कि इसमें प्रिंस सलमान भी शामिल थे।


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अमेरिकी सीनेटरों का कहना है कि जमाल खशोगी हत्या मामले में सीआईए की रिपोर्ट के बाद से अब उन्हें पहले से अधिक यकीन हो गया है कि इस हत्या में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का ही हाथ है। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी इस बात में हामी भरी। दक्षिण कैरोलिना रिपब्लिकन ने कहा कि सऊदी प्रिंस "विनाश करने वाला, खतरनाक और क्रेजी है।" बता दें मामले में सऊदी अरब ने 11 लोगों पर आरोप लगाया है लेकिन इस बात से इनकार कर दिया है कि इसमें प्रिंस सलमान भी शामिल थे।

क्या कहा सीनेटरों ने?

सीनेट कमिटि के सदस्यों ने मंगलवार को सीआईए निदेशक जीना गैस्पेल की ओर से ब्रीफिंग के बाद विदेशी संबंधों पर अपने विचार रखे। ग्राहम ने इस्तांबुल के वाणिज्य दूतावास में खशोगी की हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि "यहां कोई स्मोकिंग गन नहीं है लेकिन वह दिख रही है"।

सीनेटर ने कहा कि वह यमन की लड़ाई में सऊदी की भागीदारी के समर्थन में नहीं हैं और न ही वह सऊदी को हथियारों की बिक्री का समर्थन करते हैं। वह ऐसा तब तक करते रहेंगे जब तक सऊदी प्रिंस सत्ता में रहते हैं। 

न्यूजर्सी से डेमोक्रेट सीनेटर बॉब मेनेनदेज ने कहा कि अमेरिका को "स्पष्ट और साफ संदेश देना चाहिए कि ऐसे कार्यों को वैश्विक मंच पर स्वीकारा नहीं जाएगा।" एक अन्य सीनेटर बॉब क्रोकर ने कहा, "मेरे दिमाग में कोई सवाल नहीं है कि क्राउन प्रिंस ने हत्या का आदेश दिया।" एक अन्य सीनेटर ने कहा, "अगर वह ज्यूरी के सामने होते तो 30 मिनट में अपराधी घोषित हो चुके होते।" सीनेटर एक प्रस्ताव पर वोट डालने की योजना बना रहे हैं जिसके तहत यमन में सऊदी नेतृत्व वाली गठबंधन की लड़ाई में अमेरिका सैन्य सहायता वापस लेगा।

सीनेटर क्रिस मर्फी ने ट्रंप प्रशासन की निंदा की। उन्होंने कहा कि "हर चीज को गुप्त रखने की आवश्यकता नहीं है, अगर हमारी सरकार जानती है कि सऊदी के नेता अमेरिकी नागरिक (खशोगी) की हत्या में शामिल थे तो जनता ये क्यों नहीं जान सकती?"

ऐसा करने के पीछे सीनेटरों का केवल एक ही उद्देश्य था। वह व्हाइट हाउस पर दवाब बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह भी सऊद प्रिंस की इस हत्या में भागीदारी का विरोध करे। वह चाहते हैं कि सऊदी पर अमेरिका प्रतिबंध लगाए।

क्या कहा सीआईए ने?

जमाल खशोगी
जमाल खशोगी - फोटो : ANI
सीआईए का कहना है कि खशोगी की हत्या का आदेश सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ही दिया था। इस बात के सीआईए के पास सबूत भी हैं। सीआईए के निदेशक जिन्होंने हत्या की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनी थी ने कैबिनेट सदस्यों द्वारा आयोजित कांग्रेस की ब्रीफिंग में शामिल नहीं हुए। जिससे नेता नाराज हुए।

क्या है व्हाइट हाउस का कहना? 

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस के आलोचक और अमेरिका में रह रहे खशोगी की हत्या को लेकर दुनिया भर में सऊदी अरब और उसके शासकों के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया हुई थी। लेकिन ट्रंप ने भी सऊदी के साथ खड़े रहने की बात कही है।

इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि सऊदी अरब के साथ रणनीतिक संबंध बनाए रखना और तेल की वैश्विक कीमतों पर लगाम लगाए रखना अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ हित में है। ट्रंप ने सऊदी के साथ खड़े रहने की बात कही थी। ट्रंप ने कहा था कि अगर अमेरिका सऊदी से रिश्ते खत्म कर देगा तो चीन और रूस फायदा उठा लेंगे।

ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा था, ‘‘ऐसा इसलिए क्योंकि मेरे लिए अमेरिका पहले आता है।’’ उन्होंने कहा कि खशोगी की हत्या के बावजूद अमेरिका अपने हित साधने और उस क्षेत्र में मौजूद इजराइल तथा अन्य सहयोगियों के हितों के लिए सऊदी अरब का मित्र बना रहेगा। ट्रंप ने कहा था, "हमारा महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरी दुनिया से आतंकवाद के खतरे को खत्म करना है।" वहीं सऊदी अरब के विदेश मंत्री अदेल अल-जुबेर भी इस बात को मान चुके हैं कि पत्रकार खशोगी की हत्या "एक गलती और दुष्ट ऑपरेशन" था। 

माइक पोम्पियो ने क्या कहा?

माइक पोम्पियो
माइक पोम्पियो - फोटो : Twitter
अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने हाल ही में कहा था कि ऐसा कोई प्रत्यक्ष सबूत नहीं है जो सऊदी के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को खशोगी की हत्या से जोड़े। सऊदी को अमेरिकी समर्थन की बात को पोम्पियो ने दोहराया।

उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वह खशोगी की मौत से संबंधित सभी तरह की खुफिया रिपोर्ट पढ़ चुके हैं। उन्हें किसी भी तरह से नहीं लग रहा कि इस हत्या में सऊदी प्रिंस का हाथ है। उन्होंने कहा कि "यह एक महत्वपूर्ण बयान है, यह एक ऐसा बयान है जिसकी हम घोषणा कर रहे हैं।"

जब पोम्पियो से पूछा गया कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) को पूरा विश्वास है कि खशोगी की हत्या मामले में सऊदी प्रिंस का ही हाथ है, तो उन्होंने (पोम्पियो) कहा, "मैं खुफिया एजेंसी के मामले में कुछ नहीं कहना चाहता।"

सीआईए की घोषणा के बाद बीते महीने पोम्पियो ने कहा था कि सऊदी अरब अमेरिका के लिए अहम सहयोगी है। वह अमेरिका के लिए ईरान पर नियंत्रण रखने, इराक के लोकतंत्र को बचाने और इस्लामिक संगठन और अन्य समूहों से लड़ने के लिए बेहद जरूरी है।

प्रिंस ने दिया था ऑपरेशन का आदेश

प्रिंस सलमान
प्रिंस सलमान - फोटो : PTI
लापता सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी को लेकर वाशिंगटन पोस्ट की खबर में एक नया खुलासा हुआ था कि पत्रकार को निशाना बनाने के लिए सऊदी के प्रिंस ने ऑपरेशन का आदेश दिया। बता दें खशोगी की मंगेतर ने इस मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मदद की गुहार लगाई थी।

उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट के जरिए अपील की थी कि वह अपने सिद्दांतों के लिए लड़ते थे। खशोगी इसी अखबार के लिए स्तंभ लिखते थे। वह सऊदी अरब के खिलाफ भी बड़े पैमाने पर लिखते थे। जिसमें यमन युद्ध की आलोचना, कनाडा के साथ राजनयिक विवाद शामिल है। इन सभी मुद्दों ने प्रिंस मोहम्मद की छवि को नुकसान पहुंचाया।

खशोगी अमेरिकी निवासी थे। उन्होंने सऊदी अरब के राजकुमार सलमान के शासन और उनके बेटे मोहम्मद बिन सलमान के खिलाफ भी कई लेख लिखे थे। आखिरी बार वह 2 अक्तूबर को इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास के अंदर जाते हुए देखे गए थे। तुर्की के अधिकारियों के अनुसार उन्हें लगता है कि दूतावास के अंदर खशोगी की हत्या कर दी गई है।
 
अखबार में यह भी कहा गया था कि बीते 7 सालों से अमेरिका में रह रहे खशोगी को लालच देने के लिए सऊदी अधिकारियों ने कई योजनाएं भी बनाई थीं। अखबार में खशोगी के कई दोस्तों द्वारा दिए बयान भी थे।

खशोगी के दोस्तों का कहना है कि कई सऊदी अधिकारियों ने खशोगी से संपर्क कर सुरक्षा प्रदान करने और ऊंचे पद पर सरकारी नौकरी देने को भी कहा था। लेकिन उन्होंने शर्त रखी थी कि खशोगी को सऊदी वापस आना होगा। लेकिन उन्हें इन सभी प्रस्तावों पर शक था।
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