सऊदी अरब में ट्रंप के बदले तेवर, तो अब मुसलमानों के लिए बदल जाएंगे बोल
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पिछले साल जनवरी महीने की बात है। तब रिपब्लिकन मतदाताओं ने पार्टी में राष्ट्रपति उम्मीदवार चुनने के लिए मतदान शुरू किया था। डोनल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी हासिल करने में लगे थे।
उसी दौरान ट्रंप ने अमरीका में मुसलमानों की एंट्री पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की बात कही थी। अब ट्रंप अमरीका के राष्ट्रपति हैं और उनके तेवर पूरी तरह से बदले हुए दिख रहे हैं।
शनिवार को ट्रंप दुनियाभर के मुस्लिम देशों के लिए सबसे पवित्र देश सऊदी अरब पहुंचे। ट्रंप ने सऊदी में राजसी स्वागत स्वीकार किया।
राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप की यह पहली विदेश यात्रा है। अब तक के अमरीकी राष्ट्रपति पद संभालने के बाद पहली विदेश यात्रा के रूप में कनाडा या मेक्सिको को चुनते थे।
सऊदी अरब में इस्लामिक देशों सम्मेलन हो रहा है। ट्रंप यहां कई मुस्लिम देशों के नेताओं के साथ बैठ करने वाले हैं। इसके साथ ही ट्रंप क्षेत्रीय मुस्लिम देशों के नेताओं के सम्मेलन को संबोधित भी करेंगे।
अमरीका ने मुस्लिम विरोधी शख्स को राष्ट्रपति बनाया है
मुस्लिम देशों को संबोधित करते हुए ट्रंप इस्लाम में अतिवाद को रेखांकित कर सकते हैं। ट्रंप के तैयार भाषण की कुछ बातें लीक हो गई हैं। लीक भाषण में कहा गया है कि अतिवाद के खिलाफ लड़ाई मजहबों के बीच का संघर्ष नहीं, बल्कि अच्छाई और बुराई के बीच की लड़ाई है।
धार्मिक नेता कट्टरता का बखान न करें
ट्रंप अपने संबोधन में कह सकते हैं कि धार्मिक नेता कट्टरता का बखान न करें, बल्कि इसकी कड़ी निंदा करें। ट्रंप कह सकते हैं कि बुराई के समर्थन से कोई गरिमा हासिल नहीं होगी।
ट्रंप आठ दिनों के लिए विदेश यात्रा पर रवाना हुए हैं। इस दौरे में वह इसराइल, फलस्तीन के इलाक़े, ब्रसेल्स, वेटिकन और सिसली जाएंगे। ट्रंप इस विदेश यात्रा के दौरान अपने देश में घिरे हुए हैं। एफबीआई प्रमुख से जेम्स कोमी को बर्खास्त करने के बाद उन पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
शनिवार को अमरीका ने सऊदी अरब के साथ 350 बिलियन डॉलर के व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किया है। व्हाइट हाउस के मुताबिक दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे बड़ा हथियारों का सौदा हुआ है। अमरीकी विदेश मंत्री रेक्स टिलर्सन ने कहा कि यह ईरान की घातक चाल और सऊदी के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों को लेकर समझौता अहम है।