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पाक के 24,000 मदरसों को मिल रहा सऊदी अरब से पैसा

Sun, 31 Jan 2016 05:55 AM IST
Updated Sun, 31 Jan 2016 05:55 AM IST
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Saudi Arab helping 24000 madarsas of Pak: US

एक वरिष्ठ अमेरिकी सीनेटर ने कहा है कि सऊदी अरब पाकिस्तान में करीब 24,000 मदरसों को आर्थिक मदद मुहैया कराने के साथ ही वह ‘असहिष्णुता फैलाने’ के लिए ‘धन की सुनामी’ भेज रहा है।

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सीनेटर क्रिस मर्फी ने इसी के साथ कहा कि अमेरिका को सऊदी अरब द्वारा कट्टरपंथी इस्लाम प्रायोजित करने पर अपनी प्रभावी मौन सहमति भी खत्म करने की जरूरत है। मर्फी ने कहा कि पाकिस्तान इस बात का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है जहां सऊदी अरब से आ रहे धन का इस्तेमाल उन धार्मिक स्कूलों को मदद के लिए किया जा रहा है जो घृणा एवं आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।
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मर्फी ने शीर्ष अमेरिकी थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस को संबोधित करते हुए कहा, पाकिस्तान में 24,000 ऐसे मदरसे हैं जिनमें से हजारों को मिलने वाली आर्थिक मदद सऊदी अरब से आती है।’’ कुछ अनुमानों के मुताबिक 1960 के दशक से सऊदी अरब ने वहाबी इस्लाम के प्रसार अभियान के तहत दुनिया भर में मदरसों और मस्जिदों को 100 अरब डॉलर से अधिक की आर्थिक मदद दी है।
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अगर इसकी तुलना पूर्व सोवियत संघ से की जाए तो विभिन्न शोधों का अनुमान है कि उसने 1920 से 1991 के बीच अपनी साम्यवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए सात अरब डॉलर खर्च किए थे।

अमेरिका को सऊदी अरब की सैन्य मुहिम को समर्थन बंद करना होगा

Saudi Arab helping 24000 madarsas of Pak: US

मर्फी ने कहा, अमेरिका को यमन में सऊदी अरब की सैन्य मुहिम को कम से कम तब तक समर्थन देना बंद कर देना चाहिए जब तक हमें यह भरोसा नहीं मिल जाता कि उसकी मुहिम आईएस और अल कायदा के खिलाफ लड़ाई पर ही ध्यान केंद्रित होगी।

उन्होंने मांग की कि जब तक ऐसा आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक कांग्रेस को सऊदी अरब को कोई भी अमेरिकी सैन्य ब्रिकी की स्वीकृति नहीं देनी चाहिए। मर्फी ने कहा कि अमेरिकी लोग जिन आतंकी समूहों के बारे में नाम से जानते हैं वे मूलत: सुन्नी हैं और वे वहाबी एवं सलाफी शिक्षाओं से काफी प्रभावित हैं।

डेमोक्रेटिक एवं रिपब्लिकन दोनों पार्टियों के नेताओं को इस बहस के चरम से बचना चाहिए और इस बात पर चर्चा करनी चाहिए कि अमेरिका कट्टरपंथ के बीज बोने वालों के खिलाफ इस्लाम की उदारवादी आवाजों को जीत हासिल करने में किस तरह सहायता कर सकता है।

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