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सैंडी ने तोड़ी कमर, जीना हुआ मुहाल
बीबीसी हिंदी/जुबैर अहमद
Updated Tue, 13 Nov 2012 02:56 PM IST
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न्यूयॉर्क के वॉल स्ट्रीट पर आसमान को छूती इमारतों पर धूप की चमकती चादर ने एक कड़वा सच छुपा रखा था। बंद दफ्तर, खाली इमारतें, बिजली गायब।
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सैंडी तूफ़ान का असर तीन हफ्ते बाद भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था की धड़कन वॉल स्ट्रीट पर साफ देखा जा सकता है। मुंबई के शेयर दलालों के दफ्तरों से भरी सड़क दलाल स्ट्रीट की तरह न्यूयॉर्क की वॉल स्ट्रीट है।
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फर्क इतना हैं की ये दलाल स्ट्रीट से काफी बड़ा है और ये दुनिया के शेयर दलालों की सबसे बड़ी कंपनियों का गढ़ भी है। तूफान सैंडी से होने वाले आर्थिक नुकसान का अंदाजा लगाने वाली अमेरिकी कंपनियों ने पूरे नुकसान को 50 अरब डॉलर बताया है।
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लेकिन ये कंपनियां फुटपाथ के छोटे दुकानदारों को होने वाले नुकसान को इसमें शामिल नहीं करती हैं। ये कहानी ऐसे ही लोगों की है और इनमें अधिकतर दक्षिण एशियाई और भारतीय हैं।
मुश्किल हुआ गुजारा
ईश्वर पटेल अख़बारों के एक स्टैंड के मालिक हैं। सैंडी तूफ़ान से पहले वो औसतन एक स्थानीय पत्रकार से अधिक पैसे कमा रहे थे।
लेकिन अब वो कहते हैं, "हमारा रोज़ का कारोबार बिलकुल ठप हो गया है। वॉल स्ट्रीट की इमारतों के अंदर दफ्तरों में काम करने वाले हमारे खास ग्राहक हैं। सैंडी तूफान के बाद हमने तो अपनी दुकान खोल ली है लेकिन ये दफ्तर तीन से चार महीने बाद खुलेंगे।"
वो अहमदाबाद से 1981 में अमेरिका पहुंचे थे। ईश्वर कहते हैं अब खाने के पैसे भी ख़त्म हो रहे हैं। उनके अनुसार, “दिवाली में हम अकसर पैसा घर भेजा करते थे। अब हमारे पास ही खाने के लिए पैसे कम पड़ रहे हैं।"
भरत मुंबई से 33 साल पहले आकर यहां बसे थे। ये भी एक न्यूज़ स्टैंड के मालिक हैं। उनकी दुकान पर इक्का-दुक्का ग्राहक दिखे जो पर्यटक मालूम हो रहे थे।
वो कहते हैं, "मेरी दुकान के अंदर चार फुट पानी आ गया था। दुकान कई दिन बंद रही। बहुत फर्क पड़ा है। सैंडी तूफ़ान के बाद मेरा व्यापार 80 प्रतिशत घट गया है।"
'महीने लग जाएंगे'
वॉल स्ट्रीट और इसके आस पास की सड़कों पर फल सब्जी और अख़बार अधिकतर भारतीय ही बेचते हैं। लेकिन यहां पाकिस्तान और बांग्लादेश के दुकानदार भी हैं।
इन्हीं में से एक बांग्लादेश के मोहमद अब्दुल मन्नान भी हैं। वो फल की दुकान के मालिक हैं और दावा करते हैं कि अब उनकी दुकान पर बिक्री दो प्रतिशत हो कर रह गई है। उनका कहना है, "सैंडी से पहले 500 या 600 डॉलर रोज़ की बिक्री होती थी अब 40 डॉलर के करीब होती है।"
अब्दुल मन्नान पहले हमेशा बांग्लादेश में अपने परिवार को पैसे भेजते थे। अब वो कहते हैं कि "इस वक्त हमें वहां से पैसे मंगाने पड़ रहे हैं।"
यहां की इमारतों के ग्राउंड फ्लोर पर जोर से काम चल रहा है। हर इमारत के सामने बड़े भारी जेनेरेटर लगे हुए हैं जिनके दोबारा इमारतों के अंदर बिजली पहुंचाई जा रही है। वातावरण में धुंआ और आवाज़ दोनों फैल रहे हैं।
हर इमारत के अंदर सैकड़ों मजदूर काम कर रहे हैं। यहां एक इमारत में काम करने वाले एक सुपरवाइज़र ने कहा वॉल स्ट्रीट को पूरी तरह से अपने पैरों पर खड़ा होने में छह महीने लग जाएंगे। तब तक नुकसान की रकम 50 अरब डॉलर से कहीं अधिक हो जाएगी।