फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   America ›   research on ants to identify there work methodology

क्या चींटियां दिखा पाएंगी रोबोट के लिए राह?

Tue, 04 Jun 2013 04:26 PM IST
Updated Tue, 04 Jun 2013 04:26 PM IST
विज्ञापन
research on ants to identify there work methodology

संकरी जगहों पर रास्ता बनाने की चींटियों की काबिलियत की नकल करके ऐसे रोबोट तैयार किए जा सकते हैं जिनका इस्तेमाल खोज और राहत-बचाव के काम में किया जा सकता है।

विज्ञापन


ये नतीजा चींटियों के बारे में किए गए एक अध्ययन के बाद सामने आया है।

अमरीका के जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी के वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि चींटियां अपने एंटीना का इस्तेमाल उस वक्त अतिरिक्त अंग के तौर पर करने लगती हैं जब वो गिरने लगती हैं।
विज्ञापन


इसका इस्तेमाल वो बालू के भीतर सुरंग बनाने में भी करती हैं।

शोधकर्ताओं ने चींटियों की इस खासियत का अध्ययन करने के लिए हाई स्पीड कैमरे का सहारा लिया।

चींटियों की गतिविधियां
इससे संबंधित अध्ययन 'पीएनएएस' में प्रकाशित हुआ है। पीएनएएस अमरीका की नेशनल एडेकमी ऑफ साइंस को कहते हैं।

इस रिसर्च का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर निक ग्रैविश ने चींटियों का पता लगाने के लिए दो प्रयोग किए।

पहला प्रयोग साइंटफिक ग्रेड आंट फार्म्स का था।

इस प्रयोग में पहले उन्होंने चींटियों को सुरंग बनाने दिया गया इसके बाद उन्हें ग्लास के दो प्लेट के बीच फंसा दिया गया।

इसकी वजह से चींटियों की हर गतिविधि और सुरंग को देखा जा सका और इसका फिल्मांकन भी किया गया।

डॉक्टर ग्रैविश कहते हैं, "चींटियां बहुत तेजी से चल सकती हैं। अगर आप इसे स्लो मोशन में देखें तो आप पाएंगे कि वो कई कई बार गिरती हैं। हां, इस बारे में महत्वपूर्ण बात ये है कि हर बार गिरने के बाद चींटियों ने खुद को तुरंत संभाल भी लिया।"
विज्ञापन
विज्ञापन


एंटीना का इस्तेमाल
चींटियों के इस व्यवहार को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने एक दूसरा प्रयोग भी किया।

इसमें एक ग्लास सुरंग लगाई गई जिससे गुजरने के बाद ही चींटियां अपने घोसलों से भोजन तक जा सकती थीं।

डॉक्टर ग्रैविश कहते हैं, "हम इन ग्लास सुरंगों के अंदर देख पा रहे थे और पता लगा रहे थे कि चींटियों के शरीर का हर हिस्सा उस वक्त क्या करता है जब वो चढ़ती हैं, फिसलती या फिर नीचे गिरती हैं।"

ग्रैविश के मुताबिक वैज्ञानिक ये देखकर हैरान थे कि किस तरह चींटियां गिरने के दौरान अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं।

इसके अलावा वो अपने एंटीना को भी जरूरत के वक्त अतिरिकत अंग के तौर पर अपना वजन संभालने के लिए इस्तेमाल कर लेती हैं।

ये जानने के लिए कि चींटियों ने कैसे बालू और मिट्टी के अंदर भूल भुलैया बनाई वैज्ञानिकों ने बालू और मिट्टी से भरे एक बर्तन के अंदर उन्हें छोड़ दिया।

वातावरण का फर्क नहीं
इसके बाद वैज्ञानिकों ने एक्स रे सिटी स्कैनर की सहायता से सुरंगों की थ्री डी फोटों खींची।

डॉक्टर ग्रैविश का कहना है कि इस प्रयोग के बाद साबित हुआ है कि चीटिंया हमेशा एक ही चौड़ाई की सुरंग खोदती हैं फिर चाहे मिट्टी किसी भी तरह की हो।

एक चीटीं के बराबर की चौड़ाई और मोटाई की सुरंग खोजने का मतलब ये हुआ कि जब चीटी गिरती है तो वो खुद को संभाल सके और फिर से दोबारा खुदाई के काम में लग सके।


इस शोध में शामिल प्रोफेसर डान ग्लोडमैन का कहना है कि चीटीं वातावरण को अपने जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कर सकती है।

वो कहते हैं कि उनका मकसद उस सिद्धांत को समझना है जिसमें चींटियां और दूसरे जानवर जटिल वातावरण को भी अपने तरीके से इस्तेमाल कर लेते हैं।

समस्याओं से निजात
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने बताया कि खोज और राहत में रोबोट की भूमिका अभी बहुत सीमित है।

वो कहते हैं, "तबाही वाली जगहों पर जहां जमीन धंसती या फिर जहां मलबा जमा होता है वहीं पर आपको सुरंग बनानी होती है। उदाहरण के लिए आप उन लोगों के लिए अस्थायी संरचना विकसित करना चाह रहे हों जो मलबे के नीचे दबे होते हैं।"

चींटियां बालू और मिट्टी में बिना किसी आर्द्रता के सुरंग बना लेती हैं।

इनसे सीख लेकर ऐसे रोबोट तैयार किए जा सकते हैं जो इस तरह की समस्याओं से निजात दिला सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed