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बढ़ी है मुस्लिम विरोधी मानसिकता: अमेरिका
Updated Tue, 21 May 2013 07:43 AM IST
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अमेरिका ने यूरोप और एशिया में कथित तौर पर पनप रहे ‘मुस्लिम विरोधी मानसिकता’ की निंदा की है।
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अमेरिका का कहना है कि धार्मिक पहनावे पर सरकारी पाबंदियों से मुस्लिम विरोधी मानसिकता बढ़ी है जिससे मुसलमानों के दैनिक जीवन पर असर पड़ा है।
ये बात अंतरराष्ट्रीय धार्मिक आज़ादी पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट में कही गई है।
रिपोर्ट में यहूदियों के खिलाफ भेदभाव की भी आलोचना की गई है। साथ ही विदेश मंत्रालय ने चीन, ईरान, बर्मा, उत्तर कोरिया और सउदी अरब जैसे देशों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित तौर पर बढ़ रहे हमलों के बारे में भी चेताया है।
हालांकि रिपोर्ट पेश करने वाले अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी ने माना कि इस मामले में अमेरिका का भी रिकॉर्ड शत प्रतिशत नहीं है।
धर्म पालन का अधिकार
जॉन कैरी ने कहा, “अपने धर्म में आस्था रखना, उसका पालन करना, उसमें विश्वास करना या नहीं करना या फिर धर्म ही बदल लेना, ये हर व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है।”
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उन्होंने कहा, “इस रिपोर्ट में जो देश चिन्हित किए गए हैं उनसे मैं अपील करता हूं कि वो लोगों के इस बुनियादी अधिकार की रक्षा करें।”
रिपोर्ट, वर्ष 2012 के आंकड़ों पर आधारित है जिसके मुताबिक “मुस्लिम विरोधी मानसिकता में इजाफा हुआ है, खासतौर पर यूरोप और एशिया में।”
रिपोर्ट के अनुसार सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध ज्यादातर सामाजिक द्वेष की स्थितियों में ही आते है और इसका सीधा असर मुसलमानों के रोज़मर्रा के जीवन पर पड़ता है।
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धार्मिक आज़ादी के मामले में म्यांमार के रिकॉर्ड की तीखी आलोचना की गई है जिसका सीधा इशारा रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हुए हिंसा की तरफ है।
भारत में कार्यवाही में 'चूक'
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में कई बार कार्यवाही करने में चूक हुई है। साथ ही प्रशासन ने हिंसा भड़काने वाले समूहों के खिलाफ कोई असरदार कदम नहीं उठाया है।
इस रिपोर्ट के लिए किए गए सर्वे के अनुसार चीन में भी धार्मिक आज़ादी का दायरा सिमटा है।
मुसलमान बहुल देशों की स्थिति पर रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिम और शियाओं के खिलाफ हिंसा और सउदी अरब और ईरान में गैर-सुन्नी लोगों के खिलाफ भेदभाव बढ़ा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी का कहना था कि स्वधर्म त्याग को बढ़ावा देने वाले कानूनों में भी बढ़ोत्तरी हुई है जिनका इस्तेमाल निजी हित साधने या बदला निकालने के लिए ज्यादा किया जाता है।
रिपोर्ट में अमेरिका के पुराने दोस्त सउदी अरब में धार्मिक प्रतिबंध का भी जिक्र किया गया है, जहां इस्लाम के अलावा किसी अन्य धर्म के पालन की मनाही है।