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नहीं थम रहा ट्रंप का विरोध, हिलेरी समर्थकों की पुन: मतगणना की मांग

Fri, 25 Nov 2016 04:12 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ वाशिंगटन
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस/ वाशिंगटन Updated Fri, 25 Nov 2016 04:12 AM IST
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protest against Trump Hillary supporters demand again counting 
हिलेरी और ट्रंप

अमेरिकी चुनाव में हिलेरी क्लिंटन ने लगातार पापुलर वोट में बढ़त बनाते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी डोनाल्ड ट्रंप को 20 लाख वोटों से पछाड़ दिया है। अकेले महत्वपूर्ण स्विंग राज्य मिशिगन और विस्कॉन्सिन में हिलेरी को ट्रंप से करीब 30,000 अधिक मत मिले हैं। हालांकि इलेक्टोरल कॉलेज में ट्रंप जीत चुके हैं, लेकिन हिलेरी समर्थकों का धैर्य अब टूटने लगा है और उन्होंने उक्त दो राज्यों समेत पेनसिल्वेनिया में दोबारा मतगणना की मांग की है।

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 हाल ही में एक प्रसिद्ध कंप्यूटर विज्ञानी और अन्य विशेषज्ञों की रिपोर्ट हिलेरी समर्थकों के हाथ लगी है जिसमें कहा गया है कि मिशिगन, विस्कॉन्सिन और पेनसिल्वेनिया जैसे राज्यों में चुनाव के दौरान हैकिंग नहीं हुई है यह जानने के लिए मतपत्रों की मैन्युअल गिनती कराई जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि इन्हीं तीन स्विंग राज्यों से इलेक्टोरल कॉलेज में ट्रंप ने जीत हासिल की थी। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर जे. एलेक्स हैल्डरमैन ने चुनाव से पहले भी साइबर हमले की आशंका जताई थी। हैल्डरमैन ने कहा कि यह चुनाव सिस्टम के हिसाब से गलत हुए हैं। 
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कुक राजनीतिक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले दो हफ्ते से पापुलर मतों की गिनती में हिलेरी क्लिंटन अपने प्रतिद्वंद्वी और इलेक्टोरल कॉलेज में जीतने वाले डोनाल्ड ट्रंप से 20 लाख वोटों से आगे चल रही हैं। ट्रंप को 279 इलेक्टोरल कॉलेज वोट मिले, जबकि हिलरी को 228 के नंबर से ही संतोष करना पड़ा। वैसे भी अमेरिकी राष्ट्रपति पद के इस चुनाव में डेमोक्रेट प्रत्याशी हिलेरी को प्रतिशत के मुकाबले ट्रंप से अधिक वोट मिले हैं। 

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जीत में अहम होते हैं इलेक्टोरल कॉलेज के वोट

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डोनल्ड ट्रंप - फोटो : Forbes

जीत में अहम होते हैं इलेक्टोरल कॉलेज के वोट
अमेरिका में आम जनता के मतदान को पॉपुलर वोट कहा जाता है जबकि आम चुनाव में इस जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण इलेक्टोरल कॉलेज के वोट होते हैं जिन पर दोनों उम्मीदवारों की नजरें गढ़ी होती हैं। इसका कारण है कि पॉपुलर वोट में बहुमत हासिल करने के बावजूद इलेक्टोरल कॉलेज में अपने प्रतिस्पर्धी से कम वोट मिलने पर प्रत्याशी की हार हो सकती है। 

दरअसल, इलेक्टोरल कॉलेज सिस्टम में जिस राज्य में जिस प्रत्याशी को बहुमत मिलता है, उस प्रांत के पूरे इलेक्टोरल वोट भी उसी के खाते में चले जाते हैं। वर्ष 2000 के में अल गोर को पॉपुलर वोट में जॉर्ज बुश से पांच लाख अधिक वोट मिले थे, लेकिन सीनेट में थोड़ा पीछे रह गए, और अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से चूक गए थे।

ट्रंप के दादा को जर्मनी से निकाला गया था
डोनाल्ड ट्रंप के दादा को 1900 से पहले जर्मनी ने सैन्य सेवाओं से मुकरने के चलते निकाल दिया था। यह दावा जर्मनी के इतिहासकार रोलेंड पाल ने ट्रंप द्वारा अप्रवासियों के मुद्दे पर दिए जाने वाले वक्तव्यों के चलते किया है। सीएनएन में प्रकाशित खबर के मुताबिक 1905 में फ्रेडरिक ट्रंप को मिले एक स्थानीय काउंसिल पत्र के माध्यम से उन्हें बताया गया था कि उन्हें जर्मनी की नागरिकता दोबारा नहीं दी जाएगी, जहां से वह आठ सप्ताह पहले भाग आए थे। तब तक फ्रेडरिक ट्रंप यूएस के नागरिकता ले चुके थे। 


 

मतभेद भूलकर देश के लिए एकजुट हों : ट्रंप

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डोनल्ड ट्रंप - फोटो : WWE

इतिहासकार का दावा है कि ट्रंप के दादाजी ने जर्मनी छोड़ते समय अधिकारियों को इस बारे में सूचित तक नहीं किया था। इस बारे में डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कोई टिप्पणी नहीं की गई है। पॉल ने कहा कि ट्रंप गैरकानूनी अप्रवासी मुद्दे पर जमकर बोलते हैं। मुझे लगता है कि उन्हें अपने खुद के परिवार के इतिहास पर भी ध्यान देना चाहिए। 

मतभेद भूलकर देश के लिए एकजुट हों : ट्रंप
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी जनता से कहा है कि वे राजनीतिक प्रचार अभियान को छोड़ दें और देश के पुनर्निर्माण की खातिर राष्ट्रीय अभियान के लिए एकजुट हो जाएं। ट्रंप ने ‘थैंक्सगिविंग’ अवसर पर अपने वीडियो संदेश में यह अपील की। ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि सभी लोग आपसी मतभेदों को भुलाकर अमेरिका को एक बार फिर महान बनाने के साझा संकल्प लें और एक साथ मिलकर काम करें।

उन्होंने कहा कि हमने एक लंबा और थकाने वाला राजनीतिक अभियान पूरा किया है। भावनाएं अभी हावी हैं और तनाव रातों-रात खत्म नहीं होते। ट्रंप ने कहा कि सफल होने के लिए हमें अपने पूरे देश के प्रयासों को एकजुट करना होगा। यह समय नागरिकों के बीच विश्वास का संबंध विकसित करने का है क्योंकि जब अमेरिका एकजुट होता है तब कुछ भी हमारी पहुंच से बाहर नहीं होता। उन्होंने कहा कि आइए हमारे पास जो कुछ भी है, उसके लिए हम शुक्रिया कहें और आगामी रोमांचक नए अवसरों का सामना साहस के साथ करें।

जीत के बाद से खुफिया सूचनाओं को महत्व नहीं दे रहे डोनाल्ड ट्रंप

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donald trump

जीत के बाद से खुफिया सूचनाओं को महत्व नहीं दे रहे डोनाल्ड ट्रंप
एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की चकित कर देने वाली जीत को दो सप्ताह से भी ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन तब से नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को महज दो खुफिया जानकारियां दी गई है जो उनके पूर्ववर्तियों को मिलने वाली सूचनाओं के मुकाबले काफी कम है। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया, ट्रंप अभी बहुत व्यस्त चल रहे हैं।

हाउस इंटेलिजेंस कमिटी के अध्यक्ष डेविड नुन्स ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा ट्रंप की पहली प्राथमिकता है। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि वे नव निर्वाचित राष्ट्रपति को हर दिन सूचनाएं देने को तैयार हैं। फिलहाल ट्रंप अपने मंत्रिमंडल के गठन और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण सदस्यों को चुनने में व्यस्त हैं। 

डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन का समर्थन करने वाले सीआईए के पूर्व उप निदेशक माइकल मॉरेल ने कहा कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति खतरों और देश के सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में सीखने व समझने का सुनहरा अवसर खो रहे हैं। जब वे पद की शपथ लेंगे और सिचुएशन रूम में पहली बार पहुंचेंगे तब ऐसी जानकारी उनके पास होना बहुत महत्वपूर्ण होता है। 

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