तीस वर्षो से रोज ‘सेल्फी’ ले रहे हैं यह प्रोफेसर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘सेल्फी’ के दीवाने आज हम सभी हैं और लेकिन क्या आपको पता है कि एक प्रोफेसर आज से तीन दशक पहले से हर रोज अपनी ‘सेल्फी’ ले रहे हैं। पिछले कुछ सालों में ‘सेल्फी’ हमारी आम जिंदगी का हिस्सा बन गया है मगर इस शब्द से हम लोगों के रूबरू होने से लगभग तीन दशक पहले से ही एक अमेरिकी प्रोफेसर कार्ल बैडेन प्रतिदिन अपनी एक साधारण ‘ब्लैक एंड व्हाइट’ फोटो लेते थे। दरअसल में वे ऐसा अपने एक प्रोजेक्ट के लिए कर रहे थे।
बृहस्पतिवार 23 फरवरी को बैडेन की प्रतिदिन खुद की फोटो लेने के इस प्रोजेक्ट को आखिरकार 30 साल हो गए जिसे रोकने का उनका कोई इरादा नहीं है। मृत्युदर और उम्र बढ़ने पर शोध करने की उनकी दिलचस्पी ने बोस्टन कॉलेज के प्रोफेसर को निर्विवाद रुप से ‘सेल्फी का पिता’ बना दिया।
प्रोफेसर की तस्वीरों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हलचल मचा दी
कैब्रिंज के रहने वाले 64 वर्षीय प्रोफेसर के पाउट वाले चेहरे और खुद पर आत्ममुग्ध होती तस्वीरों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हलचल मचा दी। हालांकि उन्हें इसका एहसास तब हुआ जब उस दशक तक नहीं खोजे जा सके ‘सेल्फी’ शब्द के कारण उनकी इस प्रोजेक्ट के प्रोफाइल को लोगों ने हाथों-हाथ लेना शुरू कर दिया।
उनके इस प्रोजेक्ट की प्रदर्शनी पिछले कुछ सालों में न्यूयॉर्क शहर के बोस्टन की एक आर्ट गैलरी सहित कई अन्य जगहों पर लगाई गई। बैडेन ने मजाक में कहा कि अगर ‘सेल्फी में लोगों की इतनी दिलचस्पी नहीं होती तो मैं हमेशा की तरह गुमनामी में आगे बढ़ जाता।