ओबामा को मिली रूसी हैकिंग की गोपनीय रिपोर्ट, निशाने पर ट्रंप
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अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 20 जनवरी को व्हाइट हाउस में कार्यभार संभालना है, लेकिन आम चुनाव में हैकिंग पर रूस की भूमिका अभी भी राह में रोड़े अटका रही है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका के शीर्ष खुफिया अधिकारियों और डेमोक्रेट व रिपब्लिकन पार्टी सीनेटरों ने संयुक्त रूप से दोबारा पुष्टि की है कि रूस ने ट्रंप को मदद पहुंचाने के लिए हैकिंग की थी। यह सारी अधिकृत सूचनाएं जल्द ही ट्रंप के साथ शेयर की जाएंगी ताकि ट्रंप या तो स्वीकार करें कि जानकारी सही है अथवा मानें कि देश की गुप्तचर एजेंसियां अकुशल हैं।
इस संबंध में पूरी रिपोर्ट वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा को सौंपी गई है। खुफिया अधिकारियों और दोनों पार्टियों के संयुक्त गठबंधन ने बल देकर कहा कि ट्रंप ने ट्विटर पर अमेरिकी एजेंसियों की क्षमता व निष्पक्षता पर जो विचार रखे थे उससे उनका मनोबल खत्म हुआ है।
नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक जेम्स क्लैपर ने रूसी हैकिंग पर सीनेट आर्म्ड सर्विसेस कमेटी की सुनवाई करते हुए कहा कि - ‘इस मामले में संदेह और अवमानना के बीच अंतर है।’ उन्होंने कहा कि - ‘हमारा आंकलन अब और भी अटल हो गया है कि रूस ने अमेरिकी चुनाव पर हमला किया था।’
सिर्फ रूस ही कर सकता है चुनाव में हैकिंग
सीनेट की यह सुनवाई शनिवार (भारत के हिसाब से) को होने वाली उस अति महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले हुई। इस बैठक में जेम्स क्लैपर और अन्य खुफिया प्रमुख रूसी हमले से जुड़े उन सभी विवरणों को बारीकी के साथ ट्रंप के लिए दोहराएंगे जो वर्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्राप्त किए हैं।
इस बैठक में वह कहेंगे कि ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव जीता है लेकिन देश की गुप्तचर एजेंसियां मानती हैं कि उन्होंने यह चुनाव रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के सहयोग से जीता है। इसके बाद ट्रंप को या तो यह स्वीकार करना पड़ेगा कि गुप्तचर एजेंसियों की रूस को लेकर फाइंडिंग सही है अथवा उनके पुराने रुख को बरकरार रखना पड़ेगा कि अमेरिका की गुप्तचर एजेंसियां अकुशल और राजनीति से प्रेरित हैं।
सिर्फ रूस ही कर सकता है चुनाव में हैकिंग
हैकिंग की दोबारा पुष्टि करते वक्त होने वाली सुनवाई में क्लैपर के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी प्रमुख माइकल रॉजर्स और रक्षा मंत्रालय के गुप्तचर विभाग के उप प्रमुख मार्सेल लेट्रे भी मौजूद थे। उन्होंने अपने साझा बयान में कहा कि सिर्फ रूस के वरिष्ठ अधिकारी ही ऐसे ऑपरेशन की अनुमति दे सकते हैं, जिसमें हैकर्स ने डेमोक्रेटिक पार्टी की फाइलें व ई-मेल की चोरी की।
उन्होंने कहा कि रूसियों का लंबा इतिहास रहा है दूसरों के व अपने चुनावों में हस्तक्षेप करने का। इस अभियान में हैकिंग महज एक हिस्सा थी, जबकि साथ में प्रोपेगेंडा, दुष्प्रचार व फर्जी खबरें भी शामिल रहीं।