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मोर नहीं उसके पंख पर मोरनी होती है फिदा?

Mon, 29 Jul 2013 08:19 AM IST
Updated Mon, 29 Jul 2013 08:19 AM IST
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peacock tails attractive

अमेरिका के वैज्ञानिक इस बात का पता लगाने की कोशिश में जुटे हैं कि किसी मोर के पिछले हिस्से में मौजूद पंख में मोरनी की दिलचस्पी आख़िर क्यों होती है।

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वैज्ञानिकों ने इसके लिए आंखों की निगरानी करने वाले एक विशेष कैमरे का इस्तेमाल भी किया हैं।

नर पक्षी की यह चमकदार पंखों वाली पूंछ मादा पक्षी के संपर्क में आने पर आता है जिसका इस्तेमाल वे अपनी मादा पक्षी को आकर्षित करने के लिए करते हैं।

वैज्ञानिकों की इस टीम ने मोरनी की आंखों में यह विशेष कैमरा लगाया है ताकि यह अंदाज़ा मिल सके कि वे आख़िर क्या देखती हैं।

इससे जुड़ी दिलचस्प रिपोर्ट जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल बायोलॉजी में छपी है।

आंखों की निगरानी से जुड़े फुटेज में यह खुलासा हुआ है कि मोरनी का ध्यान आकर्षित करना कितना मुश्किल है और साथ ही इससे यह अंदाज़ा लगाने में मदद मिलती है कि आख़िर एक बड़ा और सुंदर पंख कैसे नज़र आने लगता है।
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इससे इस राज़ पर से भी थोड़ा पर्दा हटता है कि आख़िर मोरनी मोर के पिछले हिस्से के पंख में क्या देखती है।

उनके आंखों की दाएं-बाएं की गति से यह अंदाज़ा मिलता है कि मोरनी पंख की चौड़ाई का अनुमान लगाने की कोशिश करती हैं और उनकी दिलचस्पी आंखों को आकर्षित करने वाले पंख में ही थी।
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लैंगिक चुनाव (सेक्सुअल सेलेक्शन) के लिए मोर का पंख शायद सबसे मशहूर मिसाल है और इस तथ्य की पहचान चार्ल्स डार्विन ने की थी। इस दौरान जानवरों में यह विशेष लक्षण देखने को मिलता है जो विपरीत लिंग के लिए आकर्षण की वजह बनती है।

हैरान करने वाले नतीजे


कैलिफॉर्निया विश्वविद्यालय और नॉर्थ कैरोलिना के डेविस और ड्यूक विश्वविद्यालय ने इस शोध किया है। इस शोध परियोजना को अंजाम देने वाले डॉ जेसिका योरजिंस्की का कहना है, “बेहद कम प्रजाति ही ऐसे रंगीन और विशिष्ट लक्षण दर्शाते हैं जिनका जीवित रहने की प्रक्रिया में कोई योगदान नहीं होता।”


उनका कहना है कि किसी परभक्षी जानवर से बचने में ये लंबे पंख बाधक बन सकते हैं।

योरजिंस्की कहते हैं, “मैं यह जानना चाहता था कि जब मोरनी अपने साथी की तलाश कर रही होती हैं तो वे क्या अनुमान लगा रही होती हैं।”

शोधकर्ताओं ने 12 मोरनी की आंखों में कैमरे जैसा उपकरण लगाया। इसमें दो छोटे कैमरे लगे हुए थे। एक कैमरा पक्षी के सामने वाले नज़ारे को रिकॉर्ड कर रहा था जबकि दूसरा आंख की गतिविधि को रिकॉर्ड कर रहा था।

वह कहते हैं, “हम नतीजे से बेहद हैरान थे।”

कैमरे से अंदाज़ा लगा कि मोरनी मोर के सिर के हिस्से में मौजूद कलगी को देखने के बजाए सबसे पहले उनके पिछले हिस्से के पंख की ओर देखती हैं।

वह कहते हैं, “उनकी निगाहें निचले हिस्से की ओर ही थीं।”

चयन का आधार

इस प्रयोग से अंदाज़ा मिला कि मोरनी का ध्यान हमेशा माहौल और मोर के पिछले हिस्से के पंख के बीच ही बदलता रहता है।

शोध में यह सवाल भी उठा कि अगर मोरनी निचले हिस्से की तरफ़ ही देखती हैं तो फिर मोर का पिछले हिस्से का पंख ऊंचा क्यों रहता है।

योरजिंस्की ने इसके लिए भी तर्क देते हुए कहा कि भारत में उनका जहां प्राकृतिक वास होता है वहां पौधे ऊंची जगहों पर उगते हैं ऐसे में उनका ऊपरी पंख ही दिखाई देता है।

शेफील्ड विश्वविद्यालय के पक्षी विशेषज्ञ प्रोफेसर टिम बर्कहेड का कहना है कि यह शोध बेहद रोचक और नए तरीके का था।

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