अमेरिकी चुनावः एक खेमे में जश्न, दूसरे में आंसू

ज़ुबैर अहमद, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन से Updated Wed, 07 Nov 2012 04:10 PM IST
party in one camp and tear in another
एक खेमे में ज़बर्दस्त ख़ुशी, नाच-गाना और दूसरे खेमे में आंसू और मायूसी। ये था माहौल अमेरिका में दो पार्टियों के समर्थकों के बीच।

लेकिन वोटों की गिनती शुरू होने से पहले दोनों खेमों में उत्साह था, उम्मीद थी, डर था और अनिश्चितता का माहौल भी था।

इलेक्टोरल वोट के आगे ओबामा 3 और रोमनी 33 जब बड़े से टीवी स्क्रीन पर दिखा तो ओबामा के खेमे में मायूसी की लहर दौड़ गई।

मैं वर्जिनिया राज्य के फैर्फैक्स शहर में डेमोक्रेटिक पार्टी के एक समारोह में मौजूद था। लोगों ने टीवी से नज़रें हटा लीं, उनके सिर नीचे हो गए।

इसके बाद सीनेट की कुछ सीट जीतने पर ख़ुशी वापस लौटी। कभी ख़ुशी कभी ग़म का ये सिलसिला एक घंटे तक चलता रहा।

देखते ही देखते हॉल में भरे समर्थकों के बीच उत्साह और आत्मविश्वास वापस लौटा।

खुशी का नशा
जब इलेक्टोरल वोट के आगे लिखा आया- ओबामा 249 और रोमनी 190 तो जाम छलकने लगा, गाने बजने लगे और इसके बाद वहां मौजूद जवान और बूढे, मर्द और औरत, गोरे और काले सभी ख़ुशी से झूमने लगे।

एक फ्रांसीसी महिला, जिसने पहली बार वोट दिया, हमारे टीवी कैमरा के आगे नाचने लगी।

इसके बाद वो भीड़ में नाचते-नाचते ज़मीन पर गिर गयी, फिर भी शरीर हिलाती रही।

ख़ुशी का नशा शराब के नशे से भी ज्यादा चढ़ा था। वहां मौजूद लोगों ने वक़्त से पहले ओबामा को विजयी घोषित कर दिया।

हम भागे-भागे पहुंचे रिपब्लिकन पार्टी के समारोह में, लेकिन आधे घंटे के सफ़र के बाद वहां पहुँचने पर अधिकतर लोग जा चुके थे और जो मौजूद थे, उनके चेहरे पर मायूसी छाई हुई थी।

उन्होंने तस्वीर लेने से हमें रोक दिया, हम ने भी इसरार नहीं किया। उनके दर्द को हम समझ सकते थे।

रोने-धोने के बाद आराम
आखिर ये कांटे का मुकाबला था जिसमें दोनों उम्मीदवारों की चुनावी मुहिम में हजारों कार्यकर्ता शामिल थे जिन्होंने अथक मेहनत की थी और अपने-अपने नेता को जीत दिलाने में जी-जान लगा दी थी।

वहां मौजूद एक पार्टी कार्यकर्ता ने केवल इतना कहा कि रोने-धोने के बाद अब हम घर जाकर सिर्फ आराम करना चाहते हैं।

मंगलवार को सुबह हुई तो वाशिंगटन धूप में नहा रहा था। तेज़ हवा के कारण सर्दी कड़ाके की थी। इसके बावजूद मतदान केन्द्रों के आगे लोगों की लम्बी कतारें लगी थीं।

वोटिंग बंद होने से तीन घंटा पहले हम वर्जीनिया राज्य के फैर्कैस्क शहर के सबसे बड़े मतदान केंद्र में पहुंचे। वहाँ कतार और भी अधिक लम्बी थी।

वहां मतदान केंद्र के अन्दर हमें जाने की इजाज़त मिल गई। हमने देखा बाहर लाइन इतनी लम्बी है लेकिन अन्दर इलेक्ट्रॉनिक मशीनें केवल चार हैं।

मैंने एक अधिकारी से पूछा कि केवल चार मशीने क्यूं हैं, उन्होंने कहा कि यहाँ अब भी बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है।

रोमनी के साथ 'मोमेंटम'
अमेरिकी चुनाव की कवरेज हमने दो हफ्ते पहले अमरीका आकर शुरू की थी। हमारे आने के एक हफ्ते बाद भी ऐसा लग रहा था कि शायद ओबामा हार जाएँ।

पंडित और विशेषज्ञ कह रहे थे कि रोमनी के साथ 'मोमेंटम' है। टीवी पर होने वाली तीन राउंड की बहस के पहले दौर में रोमनी के दबंग प्रदर्शन के कारण लोग कहने लगे थे कि रोमनी 45वें अमरीकी राष्ट्रपति बन सकते हैं।

इसके बाद तूफ़ान सैंडी आया जिसमें ओबामा ने तीन दिनों तक चुनावी मुहिम स्थगित कर दी और राहत के काम का नेतृत्व करने लगे।

इसका लोगों पर गहरा असर पड़ा। लोगों को तूफ़ान कटरीना की तकलीफें याद थीं जिसके दौरान बुश प्रशासन नकारा साबित हुआ था।

वोटिंग प्रक्रिया में मुझे भारत और अमरीका में कोई अधिक फर्क नहीं लगा। केवल यहाँ खामोशी ज्यादा थी और लोग मुहज्ज़ब तरीके से अन्दर आ रहे थे और बाहर जा रहे थे।

राष्ट्रपति ओबामा की जीत के आसार को जब मैंने महसूस करना शुरू किया तो उस समय भी विशेषज्ञ और सर्वेक्षण यही कहते रहे कि ऊँट किसी भी करवट बैठ सकता है।

लेकिन मैंने बीबीसी हिंदी रेडियो और फेसबुक पर ये संकेत दे दिया था कि मेरे ख्याल से जीत ओबामा की ही होगी।

ओबामा के ताज़ा भाषण के बाद कुछ अमरीकी दोस्तों के ट्वीट पढ़े। एक बार फिर उनसे लोगों की आशाएं लगी हैं। उनका कहना है कि इस बार वो एक मज़बूत नेता बनकर व्हाइट हॉउस लौटेंगे।

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