'सनक' की वजह से भारत के खिलाफ आतंकियों की मदद कर रहा पाकिस्तान: अमेरिका
अमेरिका में एशियाई विशेषज्ञों के एक समूह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ आतंकवादियों की मदद करता है। एशियाई विशेषज्ञों के इस समूह से अमेरिका के 10 प्रमुख थिंकटैंक जुड़े हुए हैं। इस रिपोर्ट ने पाकिस्तान द्वारा भारत पर हमला कर लगातार नुकसान पहुंचाने के लिए आतंकी वारदात कराने के षडयंत्रों पर एक बार फिर मुहर लगाई है।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की सेना भारत को ‘असंतुलित’ करने और कश्मीर विवाद पर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को मध्यस्थ बनाने की कोशिश के तहत हरसंभव कदम उठा रही है। इसके तहत वह आतंकवादियों की मदद भी कर रही है।
‘ए न्यू यूएस अप्रोच टू पाकिस्तान : एनफोर्सिंग एड कंडिशंस विदआउट कटिंग टाइज’ नाम से जारी इस रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की सेना ने भारत-पाक सरकारों की शांति की कोशिशों को अक्सर बाधित किया है। थिंकटैंकों के इस समूह ने रिपोर्ट के भीतर वर्ष 1999 में करगिल युद्ध के दौरान ऐसा ही होने का जिक्र भी किया है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को जारी होगी।
भारत के लिए चिंता बढ़ा सकता है पाक का परमाणु विस्तार कार्यक्रम
इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का अपनी सुरक्षा और विदेश नीति के रूप में आतंकी समूहों का इस्तेमाल करना महज भारत के प्रति उसकी सनक का हिस्सा है। इसे वह अपने अस्तित्व के खतरे के रूप में देखता है। बाहर से देखने पर यही लगता है कि भारत के संबंध में पाकिस्तान का पागलपन बेबुनियादी है।
अमेरिकी थिंकटैंकों ने कहा है कि - ‘हो सकता है कि भारत कश्मीर की क्षेत्रीय स्थिति पर फिर से बातचीत करने का इच्छुक नहीं हो, लेकिन कई भारतीय नेताओं ने शांति के लिए पाकिस्तान के साथ अस्थायी समझौता करने की कोशिश की है।’
भारत के लिए चिंता बढ़ा सकता है पाक का परमाणु विस्तार कार्यक्रम
हेरिटेज फाउंडेशन के लिसा कर्टिस और अमेरिका में पूर्व पाकिस्तानी राजदूत हुसैन हक्कानी द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा लग रहा कि पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार बढ़ाना चाहता है। पाकिस्तान विस्तारित रेंज मिसाइल प्रणालियों के विकास के लिए प्रयासरत है जो विशेष रूप से भारत के लिए चिंता का विषय है।
पाक नीति के कारण अमेरिकी मकसद भी पूरा नहीं हो पाया
अमेरिकी थिंकटैंकों की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने अफगानिस्तान और गठबंधन बलों से लड़ रहे कुछ आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने की नीति कभी नहीं बदली। इस नीति के चलते अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह बनने से रोकने देने का अमेरिका का मकसद पूरा नहीं हो पाया।