ऑरलैंडो नाइटक्लब घटना: उमर मतीन के आईएस से संबंध का सबूत नहीं मिला
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ऑरलैंडो नाइटक्लब में कोहराम मचाने वाले हत्यारे उमर मतीन ने कई कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों के खिलाफ अपनी सहानुभूति जाहिर की थी। एफबीआई ने बताया कि इसमे कुछ मध्य एशिया के कट्टरपंथी संगठन भी शामिल हैं। अमेरिकी सरकार ने कहा कि इस्लामिक स्टेट और उमर मतीन के बीच सीधा संबंध होने का कोई भी लिंक अभी तक नहीं मिला है। उमर मतीन ने ऑरलैंडो के एक नाइट क्लब में अंधाधुंध गोलियां चलाकर 50 लोगों की जान ले ली थी। यह नाइट क्लब एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग यह पार्टी कर रहे थे।
एफबीआई की शुरूआती जांच में अभी यह बात ही सामने आई है। हत्यारे उमर मतीन को उसी समय पुलिस ने मार गिराया था। एफबीआई के जांच अधिकारी जेम्स कॉमी ने बताया कि मतीन ने एफबीआई को जो भी जानकारी दी है। इसके बाद उसके मोटिव को लेकर कई तरह के सवाल भी उठते हैं। साथ ही उसकी बातों से उसका मोटिव भी हमें भ्रमित कर रहा है। आपको बताते चले कि बराक ओबामा ने उमर मतीन को घर में पला-बढ़ा कट्टरपंथी बताया है।
'एफबीआई अब मतीन जैसे लोगों की पहचान करने में जुट गई'
कॉमी ने कहा कि अभी तक की हमारी जांच के मुताबिक इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई कि उमर मतीन का कोई भी संबंध इस्लामिक स्टेट से था। उन्होंने दावा किया कि उमर मतीन को इंटरनेट के जरिए भड़काया गया था।
ऑरलैंडो नाइटक्लब में हुए कत्लेआम के बाद इस्लामिक स्टेट ने तुंरत ही इस हमले की जिम्मेदारी लेकर इस हमले को आईएस से जोड़ने की कोशिश की थी।
एफबीआई के अधिकारियों के मुताबिक मतीन ने बोस्टन बॉम्बर और फ्लोरिडा के उस व्यक्ति का समर्थन किया था जो नुसरा फ्रंट का सुसाइड बॉम्बर बम गया था। नुसरा फ्रंट को अल कायदा से जुड़ा हुआ माना जाता है।
वर्ष 2013 में उमर मतीन की इस बात पर गिरफ्तारी हुई थी, जब उमर मतीन ने अपने सहयोगियों से कहा था कि उसके परिवार के संबंध अल कायदा और हिजबुल्ला से हैं।
एफबीआई के मियामी ऑफिस ने 10 माह तक उमर मतीन की जांच की और दो बार उसे पूछताछ के लिए बुलाया। पर एफबीआई को इस दौरान उसका कोई भी अपराधिक और आतंकी समूह से लिंक नहीं मिला। कॉमी ने कहा कि एफबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि एलजीबीटीक्यू से जुड़े लोगों पर आतंकी हमला करने का उसका क्या मकसद था।
कॉमी ने कहा कि अब एफबीआई अब मतीन जैसे लोगों की पहचान करने में जुट गई है। ऐसे लोग अमेरिका के लिए खतरनाक हो सकते हैं। यह भी पता करने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इन लोगों को कौन कट्टरपंथी बना रहा है।