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ओबामा ने रिपब्लिकन पार्टी पर डाला दबाव

Tue, 01 Jan 2013 09:09 AM IST
बीबीसी
बीबीसी Updated Tue, 01 Jan 2013 09:09 AM IST
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obama put pressure on republican party at issue of financial crisis

अमेरिका में अगले साल एक जनवरी से प्रभावी होने वाली खर्चों में भारी कटौती और करों में बढोत्तरी को टालने के आखिरी प्रयास जारी हैं। इस पर सहमति बनाने के लिए 31 दिसंबर अंतिम दिन है। फिस्कल क्लिफ यानी खर्चों में भारी कटौती और करों में बढोत्तरी के मुद्दे पर अमेरिकी कांग्रेस में गहरे मतभेद हैं।

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वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों पर खर्चों में कटौती और करों में बढ़ोत्तरी को मंजूर करने के लिए दबाव बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर जारी गतिरोध के लिए ओबामा ने रिपब्लिकन पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है।
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आखिरी कोशिश
अमेरिकी कांग्रेस को इस मुद्दे पर मौजूदा साल खत्म होने से पहले किसी सहमति पर पहुंचना होगा वरना खर्चों में कटौती और करों में बढ़ोत्तरी एक जनवरी से अपने आप प्रभावी हो जाएगी। इसकी वजह से अमेरिका के ज्यादातर लोगों को पहले से कहीं अधिक करों का भुगतान करना होगा।
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इसकी वजह से इस आशंका को भी बल मिला है कि उपभोक्ताओं को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ सकती है जिसका सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला कोई भी असर वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।

इस पूरे मुद्दे पर मौजूदा गतिरोध की शुरुआत साल 2011 से हुई जब सरकारी कर्ज सीमा और वित्तीय घाटे से निपटने के प्रयास शुरु हुए। तब डेमोक्रेट और रिपब्लिकन खर्चों में कटौती को साल 2012 के आखिर तक टालने पर सहमत हो गए थे। तब ये आशंका भी प्रबल हो गई थी कि इस मुद्दे पर आगे कोई रजामंदी नहीं हुई तो 31 दिसम्बर 2012 के बाद यानी नए साल से खर्चों में अनिवार्य कटौती लागू हो जाएगी।


31 दिसम्बर 2012 ही वह तारीख है जब पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश की पहल से शुरु हुई खर्चों में कटौती की मीयाद खत्म हो रही है। हालांकि अमरीका के दोनों प्रमुख राजनीतिक दल चाहते हैं कि इसकी अवधि बढ़ा दी जाए। विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर दोनों पार्टियों के बीच कोई सहमति बन जाती है, तब भी अमरीकी सरकार के वित्तीय घाटे और कर्ज संबंधी सीमा की बुनियादी समस्या पर बड़ा ही मामूली असर पड़ेगा। साथ ही इससे नए साल में भी राजनीतिक गतिरोध बढ़ने की आशंका है।

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