जिनके सर पर है ओबामा का हाथ...

sachin yadavसचिन यादव Updated Mon, 25 Nov 2013 01:56 PM IST
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कितना खुशनसीब है वह। करोड़ों में से चुनकर आया है और आज उसके सिर पर दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंसान का हाथ है।
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उसकी तरफ़ टेढ़ी नज़र करने की किसी ने जुर्रत भी की, तो वह सीधे अमरीका से दुश्मनी मोल लेगा।
व्हाइट हाउस के ठीक सामने बने पांच-सितारा होटल विलर्ड में ठहराया गया है उसे। साथ में देखरेख के लिए मौजूद है वो पूरा कुनबा जिसने पिछले छह महीनों से उसकी सेवा में कोई कसर नही छोड़ी है।
यह वही होटल है, जहां दुनिया के बड़े-बड़े प्रधानमंत्री ठहरते हैं। मनमोहन सिंह और नवाज़ शरीफ भी वहां रातें गुज़ार चुके हैं।

इसके नाम का ऐलान ओबामा के दफ़्तर से होगा मंगलवार के दिन। और फिर आएगा वह दिन जिसके लिए दुनिया के बड़े-बड़े दिग्गज तरसते हैं। व्हाइट हाउस के मख़मली लॉन पर पूरी दुनिया का मीडिया मौजूद होगा।

फ़्लैश बल्ब चमकेंगे, स्कूल के बच्चे कतार लगाकर खड़े होंगे उसके सम्मान में और फिर राष्ट्रपति भवन से निकलकर आएंगे स्वयं बराक ओबामा। साथ में होंगी उनकी दोनों बेटियां शाशा और मालिया।

इस मौक़े के लिए उसने छह महीने से तैयारी की है।

मीडिया और शोर-शराबे से उसे घबराहट न हो, इसके लिए उसने लगातार एंटोनियो विवैल्डी का संगीत सुना है, तेज़ रोशनी में सोया और जागा है।

अब तो बस उसे इंतज़ार है जब राष्ट्रपति ओबामा उसके सर पर हाथ फिराएंगे और कहेंगे- जा, मैंने तुझे अभयदान दिया।

मिनेसोटा के छोटे से कस्बे में पैदा हुआ, ये टर्की सचमुच क़िस्मत वाला है। इस हफ़्ते उसके लगभग पांच करोड़ भाई-बंधु थैंक्स-गिविंग पर्व के मौक़े पर अमरीकी रसोई में तेल-मसाले के साथ भुने जाएंगे।

वो वर्जीनिया के मार्वेन पार्क में हमेशा-हमेशा के लिए अमरीकी टैक्सपेयर के पैसे से ऐशो-आराम की ज़िंदगी गुज़ारेगा, परिवार बढ़ाने की क़ोशिश करेगा। फिर नाती-पोतों को व्हाइट हाउस के क़िस्से सुनाने के सपने देखेगा। कम से कम अभी तो यही प्लान है।

लेकिन एक बुरी ख़बर भी है। ओबामा ने पिछले चार सालों में बरसों से चली आ रही इस परंपरा के तहत जिन टर्कियों को अभयदान दिया वो अगला थैंक्सगिविंग भी नहीं देख पाए।

इसलिए नहीं कि किसी ने उन्हें चुपके से कड़ाही में तल दिया। इतनी हिम्मत अमेरिका में भी कोई नहीं करेगा। मुझे तो लगता है वो बेचारे ख़ुशी के मारे मर गए।

लेकिन यहां के डॉक्टर कहते हैं कि मोटा-ताज़ा करने के लिए टर्कियों को बचपन से जो माल खिलाया जाता है, उसके बाद वो बस डाइनिंग टेबल तक पहुंचने के लायक ही रह जाते हैं।

न तो वो मादा टर्कियों से सेक्स संबंध बना पाते हैं, न दौड़ भाग सकते हैं। और अगर कसाई की छुरी से बच गए, तो दिल के दौरे से मर जाते हैं। ये जीना भी कोई जीना है टर्की!
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