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अमेरिका में अवैध तरीके से घुसने वाले भारतीयों की संख्या हुई तिगुनी

Sat, 29 Sep 2018 01:29 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Sat, 29 Sep 2018 01:29 PM IST
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number of Indians arrested for illegally entering in America through Mexico borders goes triple
फाइल फोटो

अमेरिका जाना लगभग हर भारतीय का सपना होता है। इसके लिए वह वैध और अवैध दोनों तरीके अपनाने की कोशिश करते रहते हैं। इसी बीच अमेरिका के कस्टम्स ऐंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) ने शुक्रवार को बताया कि उनके देश में अवैध तरीके से घुसने वाले भारतीयों की संख्या 2018 में तिगुनी हो गई है। जिसके कारण यह सबसे बड़ा समूह बन गया है जिसे कि अवैध तरीके से गिरफ्तार किया गया है।

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सीपीबी के प्रवक्ता सैल्वाडोर जोमारा ने बताया कि मानव तस्करी वाले गुटों को अवैध प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति 25,000 से 50,000 डॉलर का भुगतान किया जाता है। अमेरिका-मेक्सिको सीमा को पार करने वाले भारतीयों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। यह लोग खुद पर हुए अत्याचार का दावा करते हुए शरण देने की मांग करते हैं। उन्होंने बताया कि बहुत से लोगों के दावे सही प्रतीत होते हैं लेकिन कई प्रवासी आर्थिक कारणों से आते हैं और सिस्टम को फर्जी याचिकाओं से भर देते हैं। जिसकी वजह से जायज मामले दरकिनार कर दिए जाते हैं।
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अमेरिका में स्थित भारतीय राजदूत और सैन फ्रांसिस्को में स्थित भारतीय उच्चायोग ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है। जमोरा ने कहा कि सीबीपी विशेषज्ञों को उम्मीद है कि 30 सितंबर को खत्म हो रहे इस वित्त वर्ष में 9,000 भारतीय नागरिक को अवैध तरीके से प्रवेश करते हुए पकड़ा गया है। साल 2017 में यह संख्या 3,162 थी। जमोरा ने बताया कि इस साल 4,000 भारतीयों ने अमेरिका-मेक्सिको की तीन किलोमीटर लंबी सीमा से अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश की। ऐसा कहा जाता है कि मेक्सिको की सीमा सबसे सुरक्षित है और यहां से आसानी से अमेरिका में प्रवेश किया जा सकता है।
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आप्रवासन वकील ने बताया कि शरण चाहने वाले ज्यादातर भारत की अछूत जातियों से ताल्लुक रखते हैं। इसमें अपनी जाति से बाहर शादी करने की वजह से जान से मारने की धमकी मिलने से लेकर राजनीतिक शरण चाहने वाले सिख तक शामिल हैं। जमोरा ने कहा कि फर्जी शरणार्थी किसी और प्रवासी के सबूत को अपना बनाकर पेश करते हैं और उसके आधार पर शरण की मांग करते हैं। 2012 से 2017 के बीच 42.2 प्रतिशत भारतीयों को शरण देने से इंकार किया गया है। 

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