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आज होने वाली है 'न्यूयॉर्क की जंग', देखने को मिलेगी कड़ी टक्कर

Tue, 19 Apr 2016 04:25 PM IST
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, न्यूयार्क से
ब्रजेश उपाध्याय/बीबीसी संवाददाता, न्यूयार्क से Updated Tue, 19 Apr 2016 04:25 PM IST
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न्यूयॉर्क की जंग - फोटो : getty

मंगलवार को न्यूयॉर्क में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकंस अपने-अपने उम्मीदवार चुनने के लिए मतदान करने जा रहे हैं। इस चुनाव को 'न्यूयॉर्क की जंग' का नाम दिया जा रहा है, क्योंकि बरसों के बाद किसी प्राइमरी मुकाबले में यहां ऐसी टक्कर देखने को मिल रही है।

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डेमोक्रेटिक उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन और बर्नी सैंडर्स, और रिपब्लिकन रेस में आगे चल रहे डोनल्ड ट्रंप तीनों ही खुद को न्यूयॉर्कर कहते हैं और अपने-अपने तरीकों से ये साबित करने की भी कोशिश कर रहे हैं।
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क्लिंटन सबवे ट्रेन पर सफर कर रही हैं, सैंडर्स ब्रूकलिन ब्रिज पर चहलकदमी कर लोगों को याद दिला रहे हैं कि वो इसी इलाके में पैदा हुए हैं और ट्रंप शहर में फैले अपने कारोबार का ढिंढोरा पीट रहे हैं।

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'लिटिल पाकिस्तान' के लोग हिलेरी के समर्थन में

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हिलेरी क्लिंटन 'लिटिल पाकिस्तान' की चहेती - फोटो : Reuters

ब्रूकलिन, ब्रॉन्क्स, क्वींस या फिर न्यूयॉर्क के दूर दराज के इलाके, उम्मीदवारों ने हर कोना छूने की कोशिश की है। ब्रूकलिन के कोनी आईलैंड का लिटिल पाकिस्तान कहलाने वाले इलाके में ज्यादातर लोग हिलेरी के समर्थन में खड़े नजर आए।

वहां रहने वाले पाकस्तानी मूल के सलीम अकबर का कहना है कि ये मुकाबला उनके और उनके बच्चों के भविष्य का मामला है। उनका कहना था, "मैं हिलेरी को वोट दूंगा। लेकिन वो किसी वजह से नहीं जीत पाईं तो उस उम्मीदवार के साथ खड़ा हो जाऊंगा जो डोनल्ड ट्रंप को हरा सके।"

इस इलाके में से कुछ को बर्नी सैंडर्स का नाम भी नहीं पता था। लेकिन शहर के दूसरे हिस्सों में सैंडर्स की रैलियों में भारी भीड़ जुट रही है। वहीं शहर में हर दूसरे दिन डोनल्ड ट्रंप के खिलाफ लग रहे नारों को सुनकर लग सकता है कि वो यहां कामयाब नहीं होंगे। लेकिन हकीकत ये है कि वो अब भी नंबर वन पर हैं। उनके चाहने वालों में अब सिर्फ गोरे, इसाई अमरीकी नहीं, बल्कि कई नए रंग शामिल होने लगे हैं।

डोनल्ड के लिए 'करो या मरो' का वक्त

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डोनाल्ड ट्रंप के लिए 'करो या मरो' की स्थिति - फोटो : Reuters

भारतीय मूल के वकील आनंद आहूजा का कहना है कि ट्रंप न सिर्फ अमरीका के लिए बल्कि भारत और अमरीका के रिश्तों के लिए भी बेहतर होंगे। आप्रवासन हो, सुरक्षा हो या फिर अर्थव्यवस्था, इस चुनाव के सभी अहम मुद्दे न्यूयॉर्क के लिए अहम हैं और उम्मीद की जा रही है कि वोटर भारी तादाद में घर से निकलेंगे।

हिलेरी क्लिंटन दो बार न्यूयॉर्क की सीनेटर रह चुकी हैं और अगर यहां नहीं जीतती हैं तो उनकी उम्मीदवारी पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लग जाएगा और सैंडर्स की गाड़ी चल निकलेगी। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में वो सैंडर्स से करीब 14 अंकों से आगे हैं लेकिन सैंडर्स की रैलियों की भीड़ देखकर कहा जा सकता है कि मामला कांटे का होगा।

वहीं डोनल्ड ट्रंप के लिए ये 'करो या मरो' का वक्त है। न्यूयॉर्क के कानून के मुतिबक अगर वो 50 फीसद से ज्यादा मत हासिल करते हैं तो इस राज्य के सभी 95 डेलिगेट्स उनके खाते में चले जाएंगे और उनकी उम्मीदवारी को जबरदस्त बल मिलेगा। लेकिन अगर उससे कम मत मिले तो डेलिगेट्स का बंटवारा दूसरे और तीसरे उम्मीदवार के साथ होगा। रिपब्लिकन उम्मीदवारी के लिए कुल 1237 डेलीगेट्स की जरूरत है।

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