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रीयल एस्टेट कंपनियों पर शिकंजा कसेगा नया कानून

Fri, 19 Oct 2012 10:27 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 19 Oct 2012 10:27 PM IST
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new law will screws on Real Estate Companies
रीयल एस्टेट कंपनियों और नेताओं के बीच गठजोड़ पर मचे बवाल के बाद सरकार को उस कानून की याद आई है, जो रीयल एस्टेट कंपनियों पर शिकंजा कस सकता है। पिछले तीन साल से कागजी प्रक्रियाओं में फंसे रीयल एस्टेट नियामक विधेयक को अब मंजूरी मिल सकती है। इससे मकानों की कीमतों पर तो कोई अंकुश नहीं लगेगा, लेकिन डेवलपर्स की मनमानी से बचाने वाला एक नियामक अस्तित्व में आ जाएगा।
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केंद्रीय आवास सचिव अरुण कुमार मिश्रा ने कहा है कि रीयल एस्टेट रेगुलेशन विधेयक का मसौदा कैबिनेट को भेजा जा चुका है और अगले 20 दिनों के अंदर इसे मंजूरी मिल सकती है। रीयल एस्टेट कंपनियों के संगठन क्रेडाई-एनसीआर की ओर से प्रगति मैदान में आयोजित प्रॉपर्टी एक्सपो के मौके पर मिश्रा ने कहा कि इस कानून के जरिये देश के हरेक राज्य में रेगुलेटरी अथॉरिटी बनने का रास्ता साफ हो जाएगा और प्रॉपर्टी कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी।
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सस्ते मकानों के निर्माण को इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में शामिल करने के लिए भी केंद्रीय आवास मंत्रालय ने कोशिशें तेज कर दी हैं। इस बारे में मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को एक प्रस्ताव भेजा है। इस पर भी जल्द फैसला हो सकता है। प्रॉपर्टी एक्सपो के बारे में क्रेडाई-एनसीआर के कार्यवाहक अध्यक्ष गितांबर आनंद ने बताया कि यहां सिर्फ उन्हीं डेवलपर्स को मौका दिया गया है, जिनके प्रोजेक्ट क्रेडाई से स्वीकृत हैं। एक्सपो में आम्रपाली, सुपरटेक, गौर संस, एसोटेक और पार्श्वनाथ आदि रीयल एस्टेट कंपनियां हिस्सा ले रही हैं।
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