{"_id":"71a724a2-057d-11e2-a185-d4ae52ba91ad","slug":"nehru-gandhi-among-biggest-sources-of-influence","type":"story","status":"publish","title_hn":"'नेहरू, गांधी ने किया सबसे अधिक प्रभावित'","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
'नेहरू, गांधी ने किया सबसे अधिक प्रभावित'
न्यूयॉर्क/एजेंसी
Updated Sun, 23 Sep 2012 06:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता आंग सान सू की ने अमेरिकी छात्रों को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की रचनाओं को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है। साथ ही कहा कि गांधीजी और जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है।
सू की ने कहा कि गांधीजी, मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग और उनके पिता एवं राजनीतिक गुरु आंग सान सभी सिद्धांतवादी व्यक्ति थे। तानाशाह सैन्य शासक ने जब उन्हें घर में नजरबंद कर दिया तो खुद को अनुशासित रखने के लिए वे इनकी रचनाएं पढ़ा करती थीं।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता सू की (67) ने कहा कि गांधी जी की रचनाओं ने उन्हें बहुत अधिक प्रेरित किया है। उन्होंने छात्रों से भी उन रचनाओं को पढ़ने का आग्रह किया। वर्षों तक नजरबंद रहने के दौरान उनकी प्रेरणा स्रोत कौन थे, इस बारे में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वास्तव में गांधीजी का व्यक्तित्व अद्भुत है।
विज्ञापन
मेरा मानना है कि आप उनके बारे में जितना अधिक पढ़ते जाएंगे, उतना ज्यादा प्रभावित होंगे। वे कौन और क्या थे, इन सवालों के जवाब भी आसानी से मिलते जाएंगे। लोकतंत्र समर्थक नेता ने कहा कि आपको याद होना चाहिए, अहिंसा के मार्ग पर चलकर बदलाव की बात गांधी जी से पहले किसी ने सोचा भी नहीं था। वे पहले व्यक्ति थे, जो इस मार्ग पर चले और दृढ़ निश्चय किया कि हिंसा के बगैर क्रांतिकारी बदलाव संभव है। भारत में पढ़ी सू की ने बताया कि नेहरू जी और उनके पिता के बीच काफी अच्छे संबंध थे।
‘सैनिकों के लिए नफरत की भावना नहीं’
सू की ने भले ही अपने जीवन के करीब 15 साल घर में नजरबंद रहकर बिताए हों पर म्यांमार के सैनिकों के लिए उनके मन में नफरत की भावना नहीं है। उन्होंने बताया कि मेरी परवरिश जिस माहौल में हुई, मुझे लगता था कि मैं सैन्य परिवार का एक हिस्सा हूं। मुझे अपने पिता के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं, तसवीरों में उन्हें सेना की वर्दी में देखा है। स्थिति काफी विषम लगती है कि पिता ने सेना की स्थापना की और बाद में सेना ने ही मुझे नजरबंद कर दिया। इसके बावजूद अपने पिता के कारण मैंने जनरल से कभी नफरत नहीं की, हां उनके कार्यों से जरूर की।
विज्ञापन
सू की ने कहा कि गांधीजी, मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग और उनके पिता एवं राजनीतिक गुरु आंग सान सभी सिद्धांतवादी व्यक्ति थे। तानाशाह सैन्य शासक ने जब उन्हें घर में नजरबंद कर दिया तो खुद को अनुशासित रखने के लिए वे इनकी रचनाएं पढ़ा करती थीं।
विज्ञापन
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता सू की (67) ने कहा कि गांधी जी की रचनाओं ने उन्हें बहुत अधिक प्रेरित किया है। उन्होंने छात्रों से भी उन रचनाओं को पढ़ने का आग्रह किया। वर्षों तक नजरबंद रहने के दौरान उनकी प्रेरणा स्रोत कौन थे, इस बारे में सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वास्तव में गांधीजी का व्यक्तित्व अद्भुत है।
विज्ञापन
मेरा मानना है कि आप उनके बारे में जितना अधिक पढ़ते जाएंगे, उतना ज्यादा प्रभावित होंगे। वे कौन और क्या थे, इन सवालों के जवाब भी आसानी से मिलते जाएंगे। लोकतंत्र समर्थक नेता ने कहा कि आपको याद होना चाहिए, अहिंसा के मार्ग पर चलकर बदलाव की बात गांधी जी से पहले किसी ने सोचा भी नहीं था। वे पहले व्यक्ति थे, जो इस मार्ग पर चले और दृढ़ निश्चय किया कि हिंसा के बगैर क्रांतिकारी बदलाव संभव है। भारत में पढ़ी सू की ने बताया कि नेहरू जी और उनके पिता के बीच काफी अच्छे संबंध थे।
‘सैनिकों के लिए नफरत की भावना नहीं’
सू की ने भले ही अपने जीवन के करीब 15 साल घर में नजरबंद रहकर बिताए हों पर म्यांमार के सैनिकों के लिए उनके मन में नफरत की भावना नहीं है। उन्होंने बताया कि मेरी परवरिश जिस माहौल में हुई, मुझे लगता था कि मैं सैन्य परिवार का एक हिस्सा हूं। मुझे अपने पिता के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं, तसवीरों में उन्हें सेना की वर्दी में देखा है। स्थिति काफी विषम लगती है कि पिता ने सेना की स्थापना की और बाद में सेना ने ही मुझे नजरबंद कर दिया। इसके बावजूद अपने पिता के कारण मैंने जनरल से कभी नफरत नहीं की, हां उनके कार्यों से जरूर की।