{"_id":"58c877574f1c1bb76032aec7","slug":"modi-s-first-choice-for-the-2019-lok-sabha-elections-us-experts","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"2019 के लोकसभा चुनाव में भी मोदी पहली पसंद","category":{"title":"America","title_hn":"अमेरिका","slug":"america"}}
2019 के लोकसभा चुनाव में भी मोदी पहली पसंद
amarujala.com- Presented by: संदीप भट्ट
Updated Wed, 15 Mar 2017 06:41 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : Self
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमेरिकी विशेषज्ञों ने यूपी और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन का श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भी वे भारत के पसंदीदा नेता होंगे। अमेरिका में अब इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाने की दिशा में उसे कदम उठाने चाहिए ताकि एशिया में अमेरिका को कद्दावर साथी मिल सके।
जार्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ व सहायक प्रोफेसर एडम जीगफेल्ड ने कहा कि आमतौर पर विधानसभा चुनाव अकेले दम पर बदलाव का संकेत नहीं देते हैं, लेकिन यूपी चुनाव परिणामों ने दिखाया है कि वर्ष 2014 के आम चुनाव के नतीजे ‘अनायास’ नहीं थे।
जीगफेल्ड ने कहा कि मोदी वर्ष 2019 के बाद भी भारत का नेतृत्व करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यूपी के दो बड़े महारथी सपा और बसपा की जड़ें राज्य में काफी गहरी थीं। इनमें जाति-धर्म एक बड़ा आधार था, लेकिन मोदी ने इस बड़े फैक्टर में सेंध लगाकर जीत हासिल की है। यह बताता है कि इसकी शुरुआत उन्होंने 2014 में लोकसभा की असाधारण जीत के साथ कर दी थी। इसे सपा-बसपा समझ नहीं पाए।
विज्ञापन
काउंसिल ऑन फारेन रिलेशन्स में भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के मामलों की विशेषज्ञ एलिसा आयर्स ने कहा कि भारत अपने उन आर्थिक सुधारों को बढ़ाने जा रहा है, जो देश की जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। इसका अमेरिका को भारत से सकारात्मक रिश्ते बढ़ाकर लाभ उठाना चाहिए।
भाजपा यहां राज्यसभा में भी कई सीटें हासिल करेगी, जो उसे भूमि अधिग्रहण और श्रम सुधार जैसे लंबित सुधारों को अंजाम देने में मदद करेगा। अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के अध्ययनकर्ता सदानंद धूमे ने कहा कि इन चुनावों ने मोदी को वर्ष 2019 के चुनाव के लिए एक ‘स्पष्ट और पसंदीदा विजेता’ के तौर पर स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि ‘मोदी वर्ष 2019 की दौड़ में सबसे आगे हैं।’
विज्ञापन
जार्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ व सहायक प्रोफेसर एडम जीगफेल्ड ने कहा कि आमतौर पर विधानसभा चुनाव अकेले दम पर बदलाव का संकेत नहीं देते हैं, लेकिन यूपी चुनाव परिणामों ने दिखाया है कि वर्ष 2014 के आम चुनाव के नतीजे ‘अनायास’ नहीं थे।
विज्ञापन
जीगफेल्ड ने कहा कि मोदी वर्ष 2019 के बाद भी भारत का नेतृत्व करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यूपी के दो बड़े महारथी सपा और बसपा की जड़ें राज्य में काफी गहरी थीं। इनमें जाति-धर्म एक बड़ा आधार था, लेकिन मोदी ने इस बड़े फैक्टर में सेंध लगाकर जीत हासिल की है। यह बताता है कि इसकी शुरुआत उन्होंने 2014 में लोकसभा की असाधारण जीत के साथ कर दी थी। इसे सपा-बसपा समझ नहीं पाए।
विज्ञापन
काउंसिल ऑन फारेन रिलेशन्स में भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के मामलों की विशेषज्ञ एलिसा आयर्स ने कहा कि भारत अपने उन आर्थिक सुधारों को बढ़ाने जा रहा है, जो देश की जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। इसका अमेरिका को भारत से सकारात्मक रिश्ते बढ़ाकर लाभ उठाना चाहिए।
भाजपा यहां राज्यसभा में भी कई सीटें हासिल करेगी, जो उसे भूमि अधिग्रहण और श्रम सुधार जैसे लंबित सुधारों को अंजाम देने में मदद करेगा। अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के अध्ययनकर्ता सदानंद धूमे ने कहा कि इन चुनावों ने मोदी को वर्ष 2019 के चुनाव के लिए एक ‘स्पष्ट और पसंदीदा विजेता’ के तौर पर स्थापित कर दिया है। उन्होंने कहा कि ‘मोदी वर्ष 2019 की दौड़ में सबसे आगे हैं।’
नोटबंदी ने भारतीयों का दिल-दिमाग जीत लिया
अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के मुताबिक चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में मौजूद रहे संस्थान के अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि इन चुनावों में भाजपा ने जातिवाद से हटकर बात की थी। राज्य में लोगों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए इंस्टीट्यूट के शोधार्थी सदानंद धूमे ने कहा कि मोदी की ‘नोटबंदी बेहद लोकप्रिय रही।
इससे उस भारतीय जनता का दिल और दिमाग जीत लिया, जो इस नीति के चलते परेशान भी हुई। लोगों का मानना था कि देश में एक ऐसा संजीदा इंसान है, जिसने भ्रष्ट और अमीर लोगों पर एक सैद्धांतिक प्रहार किया है।’
इससे उस भारतीय जनता का दिल और दिमाग जीत लिया, जो इस नीति के चलते परेशान भी हुई। लोगों का मानना था कि देश में एक ऐसा संजीदा इंसान है, जिसने भ्रष्ट और अमीर लोगों पर एक सैद्धांतिक प्रहार किया है।’