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दमे की शिकार महिलाओं के लिए मुसीबत है माहवारी

Sat, 10 Nov 2012 06:42 PM IST
Updated Sat, 10 Nov 2012 06:42 PM IST
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menstrual cycle could aggravate asthma symptoms

एक शोध के मुताबिक दमे से प्रभावित महिलाओं में माहवारी के दौरान तबियत खराब हो जाने का खतरा और बढ़ जाता है।

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नॉर्वे के शोधकर्ताओं ने करीब 4,000 महिलाओं पर शोध करके पाया कि महावारी के दौरान अंडे के निकलने के दौरान महिलाओं में सांस की समस्या बदतर होने के लक्षण दिखे हैं।

अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी' और 'क्रिटिकल केयर मेडिसिन' पत्रिका में शोधकर्ताओं ने लिखा है कि प्रभावित महिलाओं को चाहिए कि वो अपनी दवा को जरूरत के हिसाब से बदलें ताकि दमे को काबू में किया जा सके।
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जिन महिलाओं पर शोध किया गया उन्होंने कोई भी गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल नहीं किया था, करीब 29 प्रतिशत महिलाएं सिगरेट पीती थीं और आठ प्रतिशत दमे से पीड़ित थीं।
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इन महिलाओं में माहवारी के 10वें और 22वें दिन के बीच खांसी की शिकायतें बढ़ीं लेकिन ज्यादातर स्त्रियों को लगा कि महावारी के बाद अंडों के निकलने के दौरान उनकी खांसी की शिकायत कम हुई।

माहवारी के सातवें और 21वें दिन के बीच उन्हें सांस लेने में सबसे ज्यादा परेशानी हुई। शोध में पाया गया कि दमे से प्रभावित जो महिलाएं सिगरेट पीती हैं या फिर उनका वज़न ज्यादा होता है, उनमें अंडे के निकलने के दौरान खांसी की शिकायत बढ़ जाती है।

उतार-चढ़ाव
दरअसल, अंडे के निकलने और हॉरमोन के उतार-चढ़ाव के दौरान शरीर का तापमान बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक इस उतार-चढ़ाव का सीधा असर सांस लेने की प्रक्रिया पर पड़ता है। हॉकलैंड यूनिवर्सिटी अस्पताल के शोधकर्ताओं की टीम के नेता डॉक्टर फेरेंक मैक्साली के मुताबिक, “हमें माहवारी के दौरान सांस लेने की प्रक्रिया में भारी बदलाव देखने को मिला।”

डॉक्टर मैक्साली ने लिखा कि माहवारी के दौरान दमे की दवाईयों में थोड़े बदलाव से इलाज में मदद मिल सकती है और खर्च में भी कमी आती है। संस्था एस्थमा यूके की डॉक्टर सामांथा वॉकर ने इस शोध को बेहद दिलचस्प बताया है और कहा है कि इसकी मदद से महिलाएँ अपने दमे की परेशानी को बेहतर ढंग से संभाल पाएंगी।


वो कहती हैं, “अगर दमे से परेशान महिलाओं को महसूस होता है कि साल के कुछ महीनों के दौरान उनकी हालत खराब हो रही है तो वो इन्हेलर का इस्तेमाल कर सकती हैं ताकि उनकी तबियत में सुधार हो।”

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