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मार्स रोवर ने की मंगल पर खुदाई
बीबीसी
Updated Tue, 05 Feb 2013 03:59 PM IST
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मंगल अभियान पर गए नासा के रोबोट मार्स रोवर क्यूरोसिटी ने पहली बार वहां की धरती की जांच के लिए ड्रिल का इस्तेमाल किया है। खुदाई से पहले और खुदाई के बाद की तस्वीरों में इस खुदाई को देखा जा सकता है।
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हालांकि पिछले रोवर ने मंगल की चट्टानी घरती को खुरचा था लेकिन पहली बार इस क्यूरोसिटी ने ज़मीन के भीतर खुदाई की है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) के इंजीनियरों ने इसके लिए एक प्रक्रिया अपनाई। इंजीनियर इस बात की पड़ताल करना चाहते हैं कि चट्टान और ड्रिल दोनों किस तरह का व्यवहार करते है।
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क्यूरोसिटी के वैज्ञानिक प्रोफेसर जॉन गोर्टजिंगर का कहना है, "ड्रिलिंग बहुत अच्छी तरह से हो रही है और हम आगे बढ़ रहे हैं।" उन्होंने बीबीसी को बताया कि चट्टान काफी अच्छी तरह से बर्ताव कर रही है और ये काफी नरम भी है। ये अभियान के लिए काफी सकारात्मक है। रोवर मिशन इस बात की पड़ताल कर रहा है कि क्या कभी अतीत में ग्रह पर ऐसा वातावरण था, जिसमें जीवाणु पनपने की गुंजाइश थी।
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उत्साहजनक नतीजे
वैज्ञानिक इस अभियान में मिली अब तक की सफलता से बेहद उत्साहित हैं। क्यूरोसिटी पिछले साल 6 अगस्त को मंगल पर उतरा था। 26 नवंबर 2011 को इस यान को छोड़ा गया था और क़रीब 24 हज़ार करोड़ मील की दूरी तय कर यह यान मंगल पर उतरा। न्यूलियर फ्यूल से चलने वाले इस 'क्यूरोसिटी रोवर' अभियान की लागत है क़रीब 2.5 अरब डॉलर।
इस अभियान के तहत नासा वैज्ञानिकों ने एक अति उन्नत घूमती फिरती प्रयोगशाला को मंगल ग्रह पर भेजा है। इस प्रयोगशाला से मिली जानकारी मंगल ग्रह के इतिहास को समझने में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। रोवर की यात्रा के तीन चरण थे। पहला है मंगल ग्रह में घुसना, दूसरा नीचे सतह की ओर आना और तीसरा ज़मीन पर उतरना। इस मार्स रोवर का वज़न 900 किलो है और यह अपनी क़िस्म के अनोखे कवच में ढका हुआ है।
इतिहास
1970 के दशक से लेकर 2008 के फ़ीनिक्स अभियान तक मंगल के हर रोवर अभियान में ग्रह पर उतरने के लिए पहले से बेहतर प्रणाली लगी है लेकिन पहली बार इस प्रणाली के ज़रिए कोशिश की गई थी कि कि रोवर मंगल ग्रह के सबसे गहरे गड्ढों में से एक में उतरे।
इससे पहले वैज्ञानिक हमेशा यह प्रयास करते रहे हैं कि वो समतल सतह पर उतरें ताकि उनकी मशीनें सुरक्षित रहें लेकिन इस बार वैज्ञानिक यह चाहते थे कि वो रोवर को ऐसी जगह उतारें जहां सतह सबसे ज़्यादा पथरीली हो ताकि वो पत्थरों का अध्ययन कर सकें। वैज्ञानिकों के अनुसार मंगल पर जीवन के रहस्य इसके पत्थरों और चट्टानों में ही छिपे हुए मिल सकते हैं।