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फेसबुक पर मिलेगी असल जादू की झप्पी
बीबीसी हिन्दी
Updated Wed, 10 Oct 2012 09:18 AM IST
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इस जैकेट को इस तरह बनाया गया है कि जब भी पहनने वाले इंसान के फ़ेसबुक अकाउंट पर कोई लाइक का बटन दबाएगा, तो उसे गले लगने का एहसास होगा। दरअसल लाइक बटन दबाने पर ये जैकट अपने आप फूलने लगती है और एक गर्मजोशी भरी झप्पी का अहसास होता है। इस जैकेट को नाम दिया गया है सोशल मीडिया जैकेट।
इस जैकेट ने इस बहस को भी तेज़ कर दिया है कि क्या आधुनिक तकनीक इंसानों को करीब ला रही है या उन्हें एक दूसरे से दूर ले जा रही है। इस जैकेट को बनाने वाली एमआईटी की मेलिसिया चाओ किट ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, “ दूरियों के बावजूद ये जैकेट हमें लोगों के करीब लाती है।”
मेलिसिया कहती हैं, “अलग अलग शहरों में रहने वालों के रिश्तों पर चर्चा करते वक्त हमने सोचा कि बातचीत सिर्फ वीडियो चैट तक ही क्यों सीमित रहे। क्यों ना टेली प्रेज़ेस यानी दूर रहते हुए भी करीब होने के बारे में सोचा जाए। इसी तरह हमने दूर से गले लगने के बारे में सोचा।”
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मिली जुली प्रतिक्रिया
ये जैकेट गले लगने के अहसास का जवाब भी देती है। जिसके लाइक पर गले लगने का अहसास हुआ है उसे भी जवाब में यही अहसास मिलता है। इस जैकेट के अविष्कार पर ब्लॉगर और इंटरनेट टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों की मिली जुली राय है।
टेक क्रंच के मैट बर्न्स कहते हैं, “अगर ये असली है तो रिश्ते वास्तविक जिंदगी में सचमुच ऑनलाइन हो जाएंगे और हम अपनी भावनाओं को अलग तरीके से बयान कर पाएंगे। कई बार आप फोन पर बुरे दिन की बात सुनने के बाद अपने साथी को लाइक बटन दबाकर गले लगाने का अहसास देना चाहेंगे।” ऑल थिंग्स डॉट कॉम के पीटर काफ्का कहते हैं, “बिलकुल बकवास है, लोग तो ये भी भरोसा करते थे कि गूगल लैंस जैसी चीज़ भी होगी।”
हॉटपोस्ट टेक ने कहा है, “ये एक बहुत बेकार खोज है।” जबकि गीक डॉट कॉम ने लिखा है, “सबको गुप्त रूप से फ़ेसबुक पर आने वाले कमेंट और लाइक पसंद आते हैं, लेकिन हमें नहीं लगता कि लोग भावनाओं के स्तर पर इतने खाली हैं कि वो हर लाइक पर गले लगने का अहसास की उम्मीद केरें।” अपनी जैकेट के बचाव में मेलिसिया कहती है, “यह प्रयास ये जानने के लिए है कि सोशल मीडिया को कैसे ग्राफिक इंटरफ़ेस से उतारकर असल जिंदगी में लाया जा सकता है।”
तौ क्या आप तैयार हैं इस जादू की झप्पी के लिए?
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इस जैकेट ने इस बहस को भी तेज़ कर दिया है कि क्या आधुनिक तकनीक इंसानों को करीब ला रही है या उन्हें एक दूसरे से दूर ले जा रही है। इस जैकेट को बनाने वाली एमआईटी की मेलिसिया चाओ किट ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, “ दूरियों के बावजूद ये जैकेट हमें लोगों के करीब लाती है।”
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मेलिसिया कहती हैं, “अलग अलग शहरों में रहने वालों के रिश्तों पर चर्चा करते वक्त हमने सोचा कि बातचीत सिर्फ वीडियो चैट तक ही क्यों सीमित रहे। क्यों ना टेली प्रेज़ेस यानी दूर रहते हुए भी करीब होने के बारे में सोचा जाए। इसी तरह हमने दूर से गले लगने के बारे में सोचा।”
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ये जैकेट गले लगने के अहसास का जवाब भी देती है। जिसके लाइक पर गले लगने का अहसास हुआ है उसे भी जवाब में यही अहसास मिलता है। इस जैकेट के अविष्कार पर ब्लॉगर और इंटरनेट टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों की मिली जुली राय है।
टेक क्रंच के मैट बर्न्स कहते हैं, “अगर ये असली है तो रिश्ते वास्तविक जिंदगी में सचमुच ऑनलाइन हो जाएंगे और हम अपनी भावनाओं को अलग तरीके से बयान कर पाएंगे। कई बार आप फोन पर बुरे दिन की बात सुनने के बाद अपने साथी को लाइक बटन दबाकर गले लगाने का अहसास देना चाहेंगे।” ऑल थिंग्स डॉट कॉम के पीटर काफ्का कहते हैं, “बिलकुल बकवास है, लोग तो ये भी भरोसा करते थे कि गूगल लैंस जैसी चीज़ भी होगी।”
हॉटपोस्ट टेक ने कहा है, “ये एक बहुत बेकार खोज है।” जबकि गीक डॉट कॉम ने लिखा है, “सबको गुप्त रूप से फ़ेसबुक पर आने वाले कमेंट और लाइक पसंद आते हैं, लेकिन हमें नहीं लगता कि लोग भावनाओं के स्तर पर इतने खाली हैं कि वो हर लाइक पर गले लगने का अहसास की उम्मीद केरें।” अपनी जैकेट के बचाव में मेलिसिया कहती है, “यह प्रयास ये जानने के लिए है कि सोशल मीडिया को कैसे ग्राफिक इंटरफ़ेस से उतारकर असल जिंदगी में लाया जा सकता है।”
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