पाक को आतंकी धरती मानते हुए भी अमेरिका ने दुलारा, राहत में कटौती वाले विधेयक खारिज
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''अमेरिका से पाक को भेजी गई आर्थिक मदद का पैसा आईएसआई के पास जाता है, आईएसआई से वो पैसा तालिबान जैसे खूंखार आतंकियों के पास जाता है। और उस पैसे से अमेरिका और तमाम देशों के खिलाफ आतंकी मुश्किलें खड़ी करते हैं। सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हैं। ऐसे में पाकिस्तान को एक फूटी कौड़ी भी नहीं देना चाहिए।'' ये कहना है कि अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य टेड पो का।
पो पाकिस्तान की दी जारी रही आर्थिक मदद को रोकने के लिए लिए सदन में विधेयक लाए थे। इस विधेयक में पाकिस्तान को दिए गए गठबंधन कोष के 90 करोड़ डॉलर से घटाकर 70 करोड़ करने की बात कही गई थी।
लेकिन सदन के ज्यादातर सदस्यों ने विधेयक को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि पाकिस्तान परमाणु संपन्न है। परमाणु संपन्न देश के साथ संबंध रखना अमेरिका के हित में है।
दूसरा विधेयक कांग्रेस सदस्य डाना रोहराबाचर की तरफ से लाया गया, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद में कोष का इस्तेमाल न किया
'पाक आतंकी धरती है तो क्या, उसका परमाणु संपन्न होना ही हमारे हित में'
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सदन में ओसामा, आईएसआई, आतंकवाद जैस मुद्दों पर पाकिस्तान के रवैये और रुख पर ढेरों दलीलें पेश की गई। ये माना गया कि पाक की जमीन पर फल-फूल रहा आतंकवाद अमेरिका समेत दुनिया भर के लिए समस्या है। और ये भी बातें हुई कि पाकिस्तान की शह पर ही आतंकवाद पनप रहा है। लेकिन इन सब बातों को दरकिनार करते हुए अमेरिकी संसद में पाक को मदद देने पर मुहर लगाई गई।
ज्यादातर सदस्य एक सुर में बोले कि जो भी हो पाकिस्तान परमाणु हथियार संपन्न देश है, अमेरिका को उससे संबंध बनाए रखना फायदे का सौदा होगा।
वहीं पाकिस्तान के प्रति अमेरिका की ये हमदर्दी मोदी-ओबामा के रिश्तों की पोल खोलती है और आगाह करती है कि भारत को अमेरिका के प्रति भावुक न होकर पेशेवर रवैया अपनाना होगा, कूटनीति में बदलाव लाने होंगे। इस बात की भी संभावना से इन्कार नहीं किया जाना चाहिए कि एनएसजी के लिए अमेरिका की नरमी और समर्थन भारत के लिए दिखावा भी हो सकती है।
Published By Rohit Kumar Porwal