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कैटरीना की वजह से नहीं मिल रहा मोदी को वीजा
Updated Fri, 26 Jul 2013 05:07 PM IST
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों और उनकी पार्टी भाजपा के भारी दबाव के बावजूद उन्हें फिलहाल अमेरिकी वीजा मिलने के आसार नहीं नजर आ रहे हैं।
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भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अमेरिका पहुंचते ही न्यूयॉर्क में ये घोषणा कर दी कि वो यहां की सरकार से मोदी के वीजा के लिए अपील करेंगे। लेकिन वॉशिंगटन पहुंचकर वो भी अब इसे अमेरिकी सरकार का “अंदरूनी मामला” बता रहे हैं।
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अमेरिकी व्यापार जगत और रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्य मोदी को वीजा दिए जाने के हक में हैं। यहां के कई संगठन भी उनके लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।
लेकिन धार्मिक आजादी से जुड़े जिस कानून के तहत मोदी के अमेरिका आने पर रोक लगी, उससे निर्धारित करने वाली संस्था के रूख़ में कोई तब्दीली नहीं है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता पर नजर रखने वाली इस संस्था की अध्यक्ष हैं कैटरीना लैंटोस स्वेट।
'बदलाव के संकेत नहीं'
बीबीसी के साथ एक खास बातचीत में उन्होंने कहा है कि कुछ ही महीनों पहले जब हिलेरी क्लिंटन विदेश मंत्री थी तो उन्हें पत्र लिखकर इस संस्था ने मोदी के वीजा पर रोक लगाए रखने की सिफारिश की थी और वर्तमान विदेश मंत्री जॉन केरी का रुख कुछ अलग होगा, इसका उनके पास कोई संकेत नहीं है।
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उनका कहना है, “इसके अलावा अब भी हमारे पास कोई ऐसी जानकारी नहीं आई है जिसके आधार पर हम अपना फैसला बदल सकें।”
कैटरीना लैंटोस स्वेट का कहना है कि नरेंद्र मोदी के ऊपर न केवल ‘गुजरात में हुए बर्बर दंगों की जिम्मेदारी का दाग है, बल्कि उन्होंने उसके दस साल बाद भी पीड़ितों के राहत और पुनर्वास के लिए कुछ ख़ास नहीं किया है।’
संघीय क़ानून के तहत बनाई गई धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करने वाली ये संस्था स्वतंत्र मानी जाती है और इसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों ही पार्टियों का प्रतिनिधत्व होता है। लेकिन इसके फैसले स्वीकार करने के लिए सरकार बाध्य नहीं है।
वो कहती हैं, “अगर सरकार हमारे विरूद्ध कभी फ़ैसला लेने की सोचती है तो हम उनकी खुलकर आलोचना कर सकते हैं और उन पर नैतिक दबाव डाल सकते हैं।”
उनके कड़े रूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उन्होंने कहा कि भारतीय जनता भी जब वोट डालने जाए तो वो मोदी को लेकर जो अंतरराष्ट्रीय दुविधाएं हैं उनको ध्यान में रखे।
'अंदरूनी मामला'
इस बीच राजनाथ सिंह ने वॉशिंगटन आकर मोदी का गुणगान तो किया है लेकिन वीजा के मामले पर अपना रुख बदला है।
उन्होंने इसे अमेरिकी सरकार का अंदरूनी मामला बताते हुए कहा है, “कभी-कभी ये जरूर लगता है कि एक तरफ तो अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट में मोदी के काम की भरपूर तारीफ की जाती है और दूसरी तरफ वीजा भी नहीं जारी करती है, ये एक विरोधाभास है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस के कई सदस्यों ने उनसे कहा कि मोदी को वीजा नहीं दिए जाने का कोई औचित्य नहीं दिखता। लेकिन राजनाथ सिंह बार-बार ये भी दोहरा रहे थे कि उन्होंने अपनी ओर से अमेरिकी अधिकारियों के सामने वीजा की मांग नहीं रखी।
अमेरिकी सरकार ने साल 2005 में नरेंद्र मोदी का वीजा रद्द किया था और इस साल भी व्हार्टन विश्वविद्यालय में भाषण के न्यौते पर आ रहे मोदी को वीजा नहीं दिया गया।
अमेरिका के अलावा यूरोपीय संघ ने भी गुजरात के दंगों के लिए मोदी को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर प्रतिबंध लगा रखे थे लेकिन उनके रुख में अब लचीलापन आया है।
राजनाथ सिंह ने न्यूयॉर्क में खुलकर इशारा किया था कि भाजपा मोदी को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार की तौर पर पेश करेगी। लेकिन वॉशिंगटन में वो काफी संभलकर बयान दे रहे थे और प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी के लिए किसी का नाम लेने से इनकार किया।
उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि मोदी के हाथ में चुनाव अभियान की बागडोर देने का फैसला पार्टी ने एकमत से किया था।
उनका कहना था, “मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि नरेंद्र मोदी मेरे देश के बेहद लोकप्रिय नेता हैं।”