ओबामा की कमियाँ बाइडन ने दूर कीं

बीबीसी हिन्दी Updated Sat, 13 Oct 2012 11:24 AM IST
john biden removes limitations of barack obama
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पिछले हफ्ते हुई बहस के बाद विशेषज्ञों ने राय दी थी कि बाइडन अपने प्रतिद्वदी मिट रोमनी से पिछड़ गए हैं। अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उप राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच काफी अच्छी दोस्ती है। जो बाइडन अपने राष्ट्रपति क़ी तारीफ़ करते नहीं थकते। लेकिन 11 अक्टूबर क़ी शाम को इस बहस में बराक ओबामा को अपने दोस्त क़ी सब से अधिक ज़रुरत थी।
रायन के साथ डेढ़ घंटे तक चली बहस के दौरान जो बाइडन पर भारी दबाव था। दबाव इस बात का था कि वे बहस में इतना अच्छा प्रदर्शन करें कि राष्ट्रपति ओबामा को 6 नवंबर के चुनाव में मदद मिल सके। दूसरी तरफ पॉल रायन को 90 मिनट में ये साबित करना था कि अगर मिट रोमनी राष्ट्रपति पद के चुनाव में जीते और खुदा न करे जीत के बाद उनकी मौत हो जाती है तो वो एक काबिल राष्ट्रपति साबित होंगे।

लीबिया से शुरुआत
बहस की शुरुआत लीबिया के शहर बिन गाज़ी में अमरीकी दूतावास पर हुए हमले के मुद्दे से हुई। शुरू में दोनों उमीदवारों के बीच जोश क़ी कमी नज़र आ रही थी। लेकिन जैसे -जैसे बहस आगे बढ़ी, दोनों नेताओं का जोश बढ़ता गया। इससे बहस में जान आई और दोनों ने एक दूसरे से हर मुद्दे पर असहमति दिखाई। अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में जो बाइडन आत्मविश्वास के साथ बोले। जबकि पॉल रायन ने आर्थिक मुद्दों पर डट कर अपनी बात रखी।

नियंत्रण में थे बाइडन
तो क्या दोनों उमीदवार अपने मकसद में कामयाब हुए? इस पर विशेषज्ञों क़ी राय का इंतज़ार है। लेकिन टीवी पर इस बहस को देखने वाले करोड़ों अमरीकियों ने ये ज़रूर महसूस किया होगा कि जो बाइडन पॉल रायन की तुलना घरेलु और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक कंट्रोल में नज़र आये।

उन्होंने कई सवालों पर पॉल रयान को टोका और अपना पक्ष मुस्कुराकर रखा। पूरी बहस के दौरान पॉल रायन काफी गंभीर नज़र आये। लेकिन आर्थिक मामलों पर वो आत्म विश्वास के साथ बोले। आखिर वो आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ जो ठहरे।

चुनाव से पहले उप-राष्ट्रपति के उमीदवारों के बीच केवल एक बहस रखी गई थी। जब कि राष्ट्रपति के पद के उमीदवारों के बीच में तीन, जिन में से एक पिछले हफ्ते ख़त्म हुई। दूसरी बहस 16 अक्टूबर को और तीसरी बहस 22 अक्टूबर को होगी।

आम तौर से उप-राष्ट्रपति के पद के लिए उमीदवारों के बीच बहस को अधिक अहमियत नहीं दी जाती है क्योंकि राष्ट्रपति के पद के चुनाव के परिणामों पर इसका असर नहीं होता है। लेकिन इस बहस क़ी अहमियत इस लिए बढ़ गई थी क्योंकि पहली बहस में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार मिट रोमनी के मुकाबले खराब प्रदर्शन किया।

दोस्ती के लिए
जो बाइडन पर काफी दबाव था कि वो आज क़ी बहस में कामयाब रहें और राष्ट्रपति ओबामा क़ी गिरती साख पर अंकुश लगा सकें। उनके और मिट रोमनी के बीच कांटे के मुकाबले में अपने दोस्त और राष्ट्रपति क़ी मदद कर सकें।

क्या इस में वो कामयाब हुए?
बहस के बाद दोनों उमीदवारों के समर्थक खुश नज़र आये। बराक ओबामा को इत्मीनान हुआ होगा कि उनके दोस्त ने दोस्ती खूब निभायी। दूसरी तरफ मिट रोमनी ने संतोष की सांस ली होगी कि उनके 42 वर्षीय साथी ने 69 वर्षीय तजुर्बेकार जो बाइडन का डट कर मुकाबला किया।

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