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ट्रंप की नई कर व्यवस्था के चलते भारत के आईटी क्लाइंट सतर्क
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Fri, 10 Mar 2017 11:56 AM IST
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डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : ANI
डोनाल्ड ट्रंप का सरकार आने के बाद भारत के अमेरिकी क्लाइंट काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। अपना क़ॉन्ट्रेक्ट आउटसोर्स करने से पहले कंपनियां नई चेतावनियां और नियम लागू कर रहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप सरकार आईटी उद्योग के लिए नई कर व्यवस्था ला सकती है, जिसका सीधा असर 150 बिलियन डॉलर के भारतीय आईटी उद्योग पर पड़ेगा।
केपीएमजी के राष्ट्रीय कर प्रमुख गिरिश वनवारी का कहना है, "कई कपंनियों को चिंता है कि अभी जारी आउटसोर्सिंग में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है, यदि ट्रंप सरकार 20% का अतिरिक्त टैक्स लागू कर देती है। कई कंपनियां 1 से 2 सालों में वापिस लौट सकती हैं।"
इसके अलावा कंपनियां आउटसोर्सिंग के दौरान कंपनियां टैक्स वृद्धि पर कीमत में कटौती, आसान निकास नीति, छोटे कॉन्ट्रेक्ट आदि पर भी विचार कर रहीं हैं। कंपनिया खुद को नई टैक्स नीति से बचाती नजर आ रहीं हैं। कंपनियों के बीच 2016 में ट्रंप के चुनाव के बाद ही डर नजर आ रहा है।
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केपीएमजी के राष्ट्रीय कर प्रमुख गिरिश वनवारी का कहना है, "कई कपंनियों को चिंता है कि अभी जारी आउटसोर्सिंग में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है, यदि ट्रंप सरकार 20% का अतिरिक्त टैक्स लागू कर देती है। कई कंपनियां 1 से 2 सालों में वापिस लौट सकती हैं।"
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इसके अलावा कंपनियां आउटसोर्सिंग के दौरान कंपनियां टैक्स वृद्धि पर कीमत में कटौती, आसान निकास नीति, छोटे कॉन्ट्रेक्ट आदि पर भी विचार कर रहीं हैं। कंपनिया खुद को नई टैक्स नीति से बचाती नजर आ रहीं हैं। कंपनियों के बीच 2016 में ट्रंप के चुनाव के बाद ही डर नजर आ रहा है।
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