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ओबामा-रोमनी के लिए बेशकीमती हैं भारतीय वोट

Thu, 01 Nov 2012 11:11 AM IST
बीबीसी हिन्दी
बीबीसी हिन्दी Updated Thu, 01 Nov 2012 11:11 AM IST
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indians vote precious for obama and romney
अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में फेयरफैक्स शहर के बाहर एक सफेद इमारत है जो असल में एक मंदिर है। इसे राजधानी मंदिर कहा जाता है।
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राजधानी नाम उचित लगता है क्योंकि ये एक मिनी भारत हैं। यहां भारत के हर प्रांत के लोग मिल जाएंगे। इसीलिए इस मंदिर में काली की पूजा भी होती है और गणेश की भी। दुर्गा माता के सामने भी लोग माथा टेकते नजर आएंगे।

इस मंदिर में भारतीयों और उनकी गाड़ियों को देखते ही अंदाजा हो जाएगा की ये खुशहाल लोग हैं। फेयरफैक्स शहर अमेरिका का दूसरा सबसे अमीर शहर है और यहां के भारतीय अमेरिका के धनी लोगों में से हैं। वो अमेरिकी सियासत में भी बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं और अपने मतों की कीमत को समझते हैं।
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इस मंदिर को चलाने वाली कमेटी के सदस्यों में कोई मिट रोमनी को वोट देना चाहता तो कोई बराक ओबामा को। कमेटी के एक सदस्य और वैज्ञानिक अलोक श्रीवास्तव कहते हैं, "मिट रोमनी एक शक्तिशाली नेता हैं। दबंग नेता हैं। वो आउटसोर्सिंग और भूमंडलीकरण को समझते हैं इस लिए हम उन्हें वोट देंगे।"
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लेकिन उनके साथी और मंदिर समिति के सदस्य ऋषि राज्य भाटिया का झुकाव बराक ओबामा की तरफ है, "मैं बराक ओबामा को वोट दूंगा। उनका चार साल का रिकॉर्ड अच्छा है।"

चुनाव प्रचार में भी एशियाई
ऋषि राज भाटिया की तरह अमेरिका में रहने वाले कई भारतीयों का भी झुकाव राष्ट्रपति ओबामा की तरफ है। अमेरिका में 30 लाख भारतीय हैं और लगभग दस लाख पाकिस्तानी। वर्जीनिया में दोनों समुदायों की संख्या काफी है।

अमेरिका के नौ राज्य ऐसे हैं जहां लोगों ने अब तक अपना मन नहीं बनाया है कि वोट किसको देंगे। इनमें से वर्जीनिया एक है जहां भारतीय और पाकिस्तानियों की संख्या काफी है। दोनों उम्मीदवारों के लिए एक-एक वोट वोट कीमती है। इसलिए इस बार भारतीय और पाकिस्तानी वोटों का काफी महत्व है।

दोनों खेमों ने भारतीय और पाकिस्तानी मूल के लोगों को चुनावी प्रचार में शामिल किया हुआ है। फेयरफैक्स शहर के रहने वाले पुनीत अहलुवालिया रिपब्लिकन पार्टी की वर्जीनिया राज्य की शाखा के एक अहम अधिकारी हैं। उनकी पाकिस्तानी पत्नी नादिया अयूबी भी रिपब्लिकन पार्टी की कार्यकर्ता हैं।

पुनीत अहलूवालिया ये स्वीकार करते हैं की डेमोक्रेटिक पार्टी एशियाई समुदाय में अधिक लोकप्रिय है। लेकिन उनका कहना था की उनकी पार्टी युवा नसल को लुभाने में कामयाब हुई है। पुनीत कहते हैं, "मेरी पार्टी भारतीय युवाओं में लोकप्रिय होती जा रही है। हमें अहम पद दिए जा रहे हैं। मैं इसका एक उदाहरण हूं। अब तक अगर हमारे समुदाय के लोग हम से नहीं जुड़े थे तो इस में पार्टी की गलती नहीं है। पार्टी कोशिश करती है लेकिन हमारे लोग अब तक डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ ही झुकते थे। अब हालात बदल रहे हैं।"

ओबामा ज्यादा लोकप्रिय
पुनीत की पत्नी नादिया अयूबी कहती हैं की वो और उनके जैसे एशियाई युवा रिपब्लिकन पार्टी का अटूट भाग हैं। नादिया का कहना है, "रिपब्लिकन पार्टी छोटे धंधे के लिए अच्छी है। मेरा बूटीक का काम है। हमें काफी टैक्स देना पड़ता है। रिपब्लिकन पार्टी का उमीदवार जीता तो टैक्स में कमी होगी और हमारा धंधा बढेगा।"

रिपब्लिकन पार्टी की कोशिशों के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी भारतीय, पाकिस्तानी और बंगलादेशी लोगों में अब भी काफी लोकप्रिय है। पिछले चुनाव में भारतीय मूल के 84 प्रतिशत लोगों ने बराक ओबामा को वोट दिया था। इस बार भी बहुमत उनके साथ है। संजय पुरी अमेरिका में भारतीय समुदाय की एक अहम हस्ती हैं। वो अमेरिका-भारत राजनीतिक एक्शन कमेटी के अध्यक्ष हैं।

ये समिति भारत और अमेरिका के संबंध को मजबूत करने में आगे आगे है और जाहिर है संजय पुरी इस में शामिल हैं। उन्हें दोनों पार्टियों के नेताओं के साथ काम करना पड़ता है इस लिए उन्हें निष्पक्ष रहना पड़ता है।

नतीजे में अहम भूमिका
संजय किया सोचते हैं इस मुद्दे पर? संजय कहते हैं, "मेरे विचार में आप्रवासियों में डेमोक्रेटिक पार्टी हमेशा से लोकप्रिय रही है। राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से काफी पहले से भारतीय मूल के लोगों तक ये पार्टी पहुंची थी। बराक ओबामा के प्रशासन में भारतीय मूल के लोगों की एक बड़ी संख्या काम करती है। इसके कारण पार्टी का इस समुदाय से घनिष्ट संबंध है।"

वो कहते हैं कि धीरे-धीरे रिपब्लिकन पार्टी ने भी इस समुदाय में असर करना शुरू कर दिया। गवर्नर निकी हेली और बॉबी जिंदल रिपब्लिकन पार्टी के दो बड़े नाम हैं जिनके कारण भारतीय समुदाय के लोगों का अब रिपब्लिकन पार्टी की तरफ रुचि बढ़ी है।


भारतीयों में डेमोक्रेटिक पार्टी की लोकप्रियता के कारण जो भी हैं ये बात सच है कि तीस लाख भारतीयों ने बहुमत ने एक जुट होकर जिस उम्मीदवार को वोट डाला उसे राष्ट्रपति बनाने से कोई नहीं रोक सकता क्योंकि राष्ट्रपति पद के लिए छह नवंबर के चुनाव में इस समय दोनों उम्मीदवारों की लोकप्रियता में कोई अंतर नहीं है।
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