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भारत की मदद से चीन को घेरेगा अमेरिका, आसियान देशों के साथ मिलकर होगा काम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 11 Sep 2018 05:12 PM IST
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भारत और अमेरिका के बीच नई दिल्ली में पहली ‘टू प्लस टू’ वार्ता के दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चर्चा हुई थी। वार्ता में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्र और आसमान को सुरक्षित करने के लिए जापान, ऑस्ट्रेलिया और आसियान देशों के साथ मिलकर काम करने के तौर-तरीकों पर चर्चा हुई थी। ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
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दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए विदेश मंत्रालय के प्रधान उप सहायक एलिस वेल्स ने सोमवार को कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए दोनों देशों के नजरिए के संदर्भ में चीन पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि देशों को विकास के लिए विकल्प की पेशकश में सक्षम होने को लेकर अमेरिका और भारत के लिए अवसर के रूप में हमने हिंद-प्रशांत पर चर्चा की।
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दरअसल चीन का दावा है कि संसाधन समृद्ध लगभग पूरे दक्षिण-चीन सागर में वियतनाम, मलयेशिया, फलीपींस, ब्रूनेई और ताइवान ने क्षेत्र में अपने ही दावों को खारिज कर दिया है। वहीं क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना और निगरानी विमान द्वारा लगातार प्रयासों के बीच नेविगेशन की स्वतंत्रता पर जोर देने के लिए चीन ने हाल ही में विवादित दक्षिण चीन सागर में एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों और सतह से सतह मिसाइल प्रणालियों को तैनात किया है।
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बता दें कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 सितंबर को अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ यह अहम वार्ता की थी। वहीं वार्ता को लेकर चीन ने कहा था कि वह इस बातचीत का स्वागत करता है हालांकि रक्षा सौदे पर उसने चुप्पी साध ली थी।