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भारतीय रक्षा विशेषज्ञ का दावा, चीनी सैन्य खतरे से निपटने को भारत पूरी तरह तैयार
एजेंसी, वाशिंगटन
Updated Wed, 18 Oct 2017 12:43 AM IST
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भारतीय सेना
- फोटो : FILE PHOTO
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एक भारतीय रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि चीनी सैन्य खतरे से निपटने के लिए भारत पूरी तरह तैयार है। ‘भारत की सुरक्षा’ पर अपने संबोधन में हालिया डोकलाम गतिरोध का जिक्र करते हुए रक्षा एवं सुरक्षा विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए) के पूर्व महानिदेशक वीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत की स्थिति सैन्य और राजनीतिक स्तर पर वर्ष 1962 के मुकाबले बहुत अलग है।
रक्षा विशेषज्ञ गुप्ता ने सिलिकॉन वैली में नीति विश्लेषण के लिए थिंक टैंक ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (एफआईआईडीएस) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान भी बचाव के लिए परमाणु धमकियों का इस्तेमाल करता रहेगा।
यही नहीं वह आतंकी कृत्यों को बढ़ावा देकर भारत को और नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आतंरिक स्थिति उसकी सेना और नेताओं को भारत को परेशान करने करने के लिए मजबूर करती रहेगी।
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गुप्ता ने कहा कि भारत को शांति बरकरार रखने के निरंतर प्रयासों के बावजूद उसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद का सामना करने के लिए खुफिया एजेंसियों में कई गुना निवेश बढ़ाने की अपील भी की।
बीते डोकलाम गतिरोध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्तर में साल 1962 के मुकाबले अब बहुत बदलाव आया है खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार में।
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रक्षा विशेषज्ञ गुप्ता ने सिलिकॉन वैली में नीति विश्लेषण के लिए थिंक टैंक ‘फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज’ (एफआईआईडीएस) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान भी बचाव के लिए परमाणु धमकियों का इस्तेमाल करता रहेगा।
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यही नहीं वह आतंकी कृत्यों को बढ़ावा देकर भारत को और नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आतंरिक स्थिति उसकी सेना और नेताओं को भारत को परेशान करने करने के लिए मजबूर करती रहेगी।
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गुप्ता ने कहा कि भारत को शांति बरकरार रखने के निरंतर प्रयासों के बावजूद उसे राज्य प्रायोजित आतंकवाद से निपटने के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद का सामना करने के लिए खुफिया एजेंसियों में कई गुना निवेश बढ़ाने की अपील भी की।
बीते डोकलाम गतिरोध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्तर में साल 1962 के मुकाबले अब बहुत बदलाव आया है खासतौर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार में।