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17 साल बाद अमेरिका ने देखे ऐसे दिन

Tue, 01 Oct 2013 02:01 PM IST
Updated Tue, 01 Oct 2013 02:01 PM IST
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in the name of budget apporval, usa  shut down works
अमेरिकी सरकार ने आंशिक तौर पर कामबंदी शुरू कर दी है। ऐसी स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी की अगुवाई में सीनेट ने अगले साल के बजट को मंज़ूरी नहीं दी।
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अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अंतिम समय में गतिरोध ख़त्म करने की अपील की थी लेकिन उसका कोई असर नहीं पड़ा।

अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने संघीय ऐजेंसियों को कामबंदी के आदेश भेजने शुरू कर दिए हैं।

रिपब्लिकन सासंद बराक ओबामा के हेल्थ केयर सुधार क़ानून को पारित करने में विलंब करने पर बजट को पास करने के लिए तैयार थे।

गतिरोध दूर नहीं हुआ

कामबंदी शुरू होने से एक घंटे पहले द्वीपक्षीय समिति की सीनेट के साथ बैठक बुलाई गई लेकिन डेमोक्रेट्स की ओर से कहा गया कि कामबंदी को रोकने के लिए अब काफ़ी देर हो चुकी है।
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कामबंदी का असर कम हो, इसके लिए राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संभावित उपायों पर काम करना शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़ उन्होंने ऐसे विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिससे कामबंदी के दौरान भी सेना को बजट आबंटित किया जा सकेगा।
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इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि सरकारी कामकाज की बंदी की आशंका को पूरी तरह से दूर करना संभव था। लेकिन विपक्ष का सहयोग नहीं मिलने के चलते यह संभव नहीं हो पाया है।
 
ओबामा के हेल्थ केयर कानून पर गतिरोध के चलते कामबंदी।

ओबामा ने रिपब्लिकन पार्टी की आलोचना करते हुए कहा कि ये पार्टी देश में फिर से चुनाव चाहती है।

डेमोक्रेट बहुल सीनेट में फ़ंडिंग से जुड़े उस बिल पर 54 के मुक़ाबले 46 पड़े जिसके ज़रिए सरकारी ख़र्च के लिए पैसे तभी मिल सकते हैं जब राष्ट्रपति बराक ओबामा समर्थित स्वास्थ्य सुविधा से संबंधित क़ानून को एक साल की देरी से लागू किया जाए।

संभावित असर

इस बंदी से सात लाख से ऊपर संघीय सरकारी कर्मचारियों को अवैतनिक छुट्टी पर घर भेज दिया जाएगा और उन्हें तब तक वेतन मिलने की गारंटी नहीं दी जा सकेगी जब तक कि यह मुद्दा हल नहीं हो जाता।

राष्ट्रपति बराक ओबामा का हेल्थकेयर क़ानून जिसे ओबामाकेयर कहा गया है, इस राजनैतिक अड़चन की मुख्य वजह साबित हुआ।

इस स्वास्थ्य सुविधा से जुड़े क़ानून का अधिकांश हिस्सा 2010 में पारित किया जा चुका है, इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी जायज़ ठहराया है और यह मंगलवार से अस्तित्व में आने वाला है।

सोमवार दोपहर सीनेट में मतदान के बाद सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ने रिपब्लिकन पार्टी को कामबंदी के लिए दोषी ठहराया।

सीनेट में बहुमत दल के नेता हैरी रीड ने कहा, ''यह साफ़ तौर पर पूरी तरह से रिपब्लिकन सरकार की कामबंदी है। हम इस पर मोल-तोल करने को तैयार नहीं हैं। न्यायसंगत औऱ सही होने के लिए हम जो कर सकते थे कर चुके।''

अगली बाधा

कामबंदी के ख़तरे के बीच आने वाले हफ़्तों में दूसरी वित्तीय समयसीमा भी सिर पर है। 17 अक्तूबर तक अमेरिकी सरकार कर्ज लेकर अपने ख़र्चे निकालने की सीमा तक पहुंच जाएगी जिसे क़र्ज़ सीमा कहा जा रहा है।

रिपब्लिकन सांसदों ने मांग की है कि अगर इस क़र्ज़ सीमा को बढ़ाना है तो स्वास्थ्य सुधार संबंधी क़ानून समेत वित्तीय और पर्यावर्णीय नियमों में कुछ नीतिगत ढील देनी होगी।

इस तरह की कोई रिपोर्ट नहीं है कि सोमवार को बजट या क़र्ज़ सीमा से जुड़े मुद्दों पर किसी तरह की बातचीत हुई है।

लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी क़र्ज़ पर किसी भी तरह की बातचीत दिवालिएपन के ख़तरे के साये में नही हो सकती

इजराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से मुलाक़ात के बाद ओबामा ने कहा, ''हमारी मुद्रा वैश्विक रिज़र्व मुद्रा है और हम उसके साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते। हम घरेलू नीतिगत मुद्दों को जिनका बजट से कोई संबंध नहीं है, अर्थव्यवस्था और विश्व के लिए ख़तरा नहीं बनने दे सकते।''

अमेरिका में एक अक्तूबर से अगर कामबंदी लागू होने से राष्ट्रीय पार्क और वॉशिंगटन स्मिथसोनियन म्यूज़ियम बंद हो जाएगा, वृद्धों को मिलने वाले लाभार्थ चेक में देरी होगी और वीज़ा व पासपोर्ट अर्ज़ियां धरी रहेंगी।
 
अमेरिकी सीनेट सदस्यों के बीच गतिरोध खत्म करने पर सहमति नहीं बन सकी।

हालांकि हवाई यातायात नियंत्रण और खाद्य पदार्थ निरीक्षण जैसी चीज़ों को ज़रूरी मानकर जारी रखा जाएगा।

रक्षा विभाग ने अपने कर्मचारियों को कहा है कि वर्दीधारी तो काम करते रहेंगे लेकिन सिविल कर्मचारियों को घर पर बैठना होगा।

क़र्ज संकट

एक तरफ़ कामकाज ठप हो जाने की तलवार लटक गई है तो दूसरी ओर अमेरिकी सरकार की कर्ज़ सीमा 17 अक्तूबर को ख़त्म हो जाएगी।

इस महीने की शुरुआत में जैक ल्यू ने कहा था कि जब तक अमेरिका को अपनी कर्ज़ सीमा के विस्तार की इजाज़त नहीं मिलती ख़र्चों के लिए 30 बिलियन डॉलर की ज़रूरत होगी जो किसी-किसी दिन 60 बिलियन डॉलर तक हो सकता है।

सीमा बढ़ाने में नाकामी की वजह से अमेरिकी सरकार अपने क़र्ज़ चुकाने में भी नाकाम हो सकती है।

वॉशिंगटन को 2011 में भी क़र्ज़ सीमा को लेकर इसी तरह के गतिरोध का सामना करना पड़ा था। तब रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स उस दिन समझौते पर पहुंचे थे जिस दिन सरकार की कर्ज़ ले सकने की समय सीमा ख़त्म होने वाली थी।

देश क़र्ज़ बक़ाया को लेकर चूक करता, उससे कुछ घंटे पहले ही यह विवाद ख़त्म हुआ था। हालांकि इसके बावजूद स्टैंडर्ड एंड पुअर जैसी रेटिंग एजेंसी ने अमेरिका के आर्थिक हालात में गिरावट दिखा दी थी।


2011 के इस समझौते में कई ख़ुद ब ख़ुद होने वाली बजट कटौतियां शामिल थीं जिन्हें ‘सिक्वेस्टर’ का नाम दिया गया था और जो इस साल की शुरुआत में अमल में लाईं गईं थीं।

अमेरिका में 1995-96 में 21 दिन की रिकॉर्ड कामबंदी के बाद ये स्थिति दोबारा नहीं आई थी।
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