मोदी राज में ‘बेहद ठोस’ रहा भारत का विकास : आईएमएफ
पिछले चार वर्षों में भारत की वृद्धि बेहद ही ठोस रही है। आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री मॉरिस ओब्स्टफील्ड ने यह कहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सुधारों की जमकर सराहना की है। उन्होंने मोदी की तारीफ करते हुए उनके दो बड़े फैसलों का समर्थन किया और कहा कि जीएसटी व इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड कानून (आईबीसी) दोनों ही फैसले मोदी के बेहद अहम फैसले हैं।
ओब्स्टफील्ड ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मोर्चे पर भारत में कई बड़े बदलाव हुए हैं। आईएमएफ के 66 वर्षीय मुख्य अर्थशास्त्री इस माह के अंत में रिटायर होने वाले हैं, जिनकी उत्तराधिकारी गीता गोपीनाथ होंगी। गोपीनाथ इस पद पर दूसरी भारतीय होंगी।
उनसे पूर्व आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने इस पद पर काम किया है। ओब्स्टफील्ड ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार ने भारत में कुछ वास्तविक मौलिक सुधार किए हैं, जिनमें जीएसटी व आईबीसी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस साल की तीसरी तिमाही में भले ही थोड़ी सुस्ती आई है लेकिन कुल मिलाकर साढ़े चाल सालों में वृद्धि दर अच्छी रही।
सियासी लाभ के लिए केंद्रीय बैंकों के काम में दखल न करें राजनीतिज्ञ
सेवानिवृत्त होने जा रहे मॉरिस ओब्स्टफील्ड ने मोदी सरकार को बैंकिंग सिस्टम बेहतर बनाने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट कर्ज सरकार को विरासत में मिला है, जिससे निपटना आसान नहीं है। उन्होंने माना कि मोदी सरकार बैंकिंग सिस्टम को दुरुस्त करने में जुटी है लेकिन इस पर अधिक काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार विकास गति को बनाए रखने के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रयास कर रही है।
रिजर्व बैंक और सरकार में तनातनी के बीच आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा, हम नहीं चाहते हैं कि सियासी लाभ के लिए राजनीतिक लोग केंद्रीय बैंकों के कामकाज में दखल करें। मॉरिस ओब्स्टफील्ड ने पत्रकार वार्ता में कहा कि वित्तीय स्थिरता के लिए भारत सरकार को रिजर्व बैंक की बात पर ध्यान देना चाहिए। सरकार और रिजर्व बैंक के बीच हाल में आई कड़वाहट की पृष्ठभूमि में ऑब्स्टफील्ड ने कहा कि यह एक लंबी बहस है कि वित्तीय स्थिरता के लिए केंद्रीय बैंक का सीमा में रहना बेहतर होगा या उसे एक स्वतंत्र नियामक की तरह काम करना अच्छा रहेगा।
उन्होंने कहा, हमें यह सोचने होगा कि बेहतर सांस्थानिक ढांचा क्या हो सकता है, जिसके तहत अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए वित्तीय नीति तय की जा सके। उन्होंने कहा, उन्हें लगता है कि रिजर्व बैंक और भारत सरकार के बीच आगे काम करने को लेकर सहमति बन गई है। उनका मत है कि वित्तीय स्थिरता का आरबीआई का संदेश महत्वपूर्ण और सही है और सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है.