'पाकिस्तान को नजरअंदाज करना अमेरिका के लिए खतरनाक होगा'
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पाकिस्तान को लेकर अमेरिका के भीतर द्वंद देखने को मिल रहा है। अभी तक खबरें थीं कि अमेरिकी कांग्रेस में पाकिस्तान को अमेरिका की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक मदद रोकने के लेकर आवाज उठ रही है, क्योंकि पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों पर नकेल कसने में नाकाम रहा है, लेकिन अब अमेरिकी सीनेट के चेयरमैन जॉन मैक्केन ने ठीक उलटी कहानी बयां की है।
मैक्केन के मुताबिक पाकिस्तान को नजरअंदाज करना अमेरिकी हितों को प्रभावित करेगा। मैक्केन ने अमेरिकी सरकार को यहां तक कहकर चेताया कि पाकिस्तान की अनदेखी करना अमेरिका के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
दरअसल, मैक्केन ने एक अंग्रेजी अखबार द फिनेंशियल टाइम्स में एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने ये सारी बातें कही हैं। मैक्केन के मुताबिक अमेरिका को पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ मिलकर एकजुट होकर आतंकवाद से निपटना चाहिए।
'अमेरिका को नहीं रोकनी चाहिए पाकिस्तान को दी जाने वाली मदद'
उन्होंने लिखा है कि अफगानिस्तान में साल 2001 से लेकर अब तक हालात बदले नहीं हैं, वे जस के तस हैं, इसके लिए पाकिस्तान की अनदेखी भी एक वजह है, इसलिए अमेरिका अगर अफगानिस्तान में शांति बहाल करना, और अमेरिकी सैनिकों को आंतकियों के हाथों मारे जाने से बचाना चाहता है तो उसे पाकिस्तान की मदद लेनी चाहिए।
मैक्केन ने अपने लेख में यहां तक जिक्र किया कि हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस में पाकिस्तान को दी जाने वाली अमेरिकी मदद को रोकने की जो बात उठी, उससे दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व में तनाव का माहौल बन गया है, जबकि इसकी कोई जरूरत नहीं थी। मैक्केन ने जोर देते हुए कहा है कि अमेरिका को हर हाल में पाकिस्तान की मदद करनी चाहिए, जिससे की वहां स्थिरता आएगी और विकास होगा।
उन्होंने अपने बातों के जरिए साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान को अगर अमेरिका मजबूत करेगा तो आखिर में अमेरिका को ही फायदा होगा।
'आतंकियों की पनाहगाह बनने से खुद को रोकना होगा पाकिस्तान को'
मैक्केन ने हाल ही में पाकिस्तान का दौरा किया था, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में भी वह गए थे। मैक्केन की मानें तो उन्होंने पाकिस्तान की सरकार और सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अपने लेख में यह भी कहा है कि उन्होंने पाक सरकार यह सुझाव दिया है कि यही मौका है कि पाकिस्तान मुल्क की सरहदों पर पल रहे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर खुद को साबित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए आतंकी संगठनों के लिए खिलाफ कदम उठाना मुश्किल होगा, उसके राजनेताओं को आगे आना होगा और अफगान तालिबान, हक्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और पाकिस्तानी तालिबान जैसे आतंकी समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। यही वे आतंकी संगठन हैं जिनके आतंकी अमेरिकी सैनिकों और पड़ोसी भारत के सैनिकों को निशाना बना रहे हैं।
कुलमिलाकर मैक्केन ने अपने पूरे लेख में अमेरिकी हितों को मद्देनजर रखते हुए पाकिस्तान की खूब हिमायत की है, अब देखना होगा कि ओबामा प्रशासन का क्या रुख होता है।