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आखिर पॉपकॉर्न कैसे बना सबसे पसंदीदा नाश्ता?
बीबीसी, हिन्दी
Updated Fri, 24 Nov 2017 04:10 PM IST
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पॉपकॉर्न
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पॉपकॉर्न को अगर दुनिया का सबसे लोकप्रिय स्नैक कहा जाए तो गलत नहीं होगा। फिल्म देखते वक्त खाएं, या शाम की चाय के साथ। दोस्तों, परिजनों के साथ गप्पें मारते वक्त पॉपकॉर्न खाएं, या कुछ पढ़ते-लिखते हुए अकेले खाएं। पॉपकॉर्न हर मौके और माहौल के साथ एकदम फिट बैठने वाला स्नैक है।
ये हल्का भी और सेहतमंद भी है। हां, अगर आप इसमें नमक और मक्खन या तेल मिला देंगे, तो इसकी सेहत वाली खूबी नहीं रह जाएगी। पॉपकॉर्न पूरी दुनिया में खूब खाया जाता है। इसकी सबसे पुरानी मिसाल अमेरिकी महाद्वीपों में मिलती है। उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में रेड इंडियन ठिकानों पर इसके दाने मिले हैं।
पढ़ें- फिल्में देखते हुए पॉपकॉर्न खाते हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर
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सबसे पहले अमेरिका में खाया गया पॉपकॉर्न
एक किस्सा तो ये भी सुनाया जाता है कि एक पुरातत्व वैज्ञानिक को जब मक्के के दाने मिले, तो उसने उन्हें भूनने की कोशिश की। दिलचस्प बात ये रही कि करीब हजार साल पुराने मक्के के दाने गर्म होते ही फूट पड़े। इसकी बड़ी वजह इसकी ऊपरी चमड़ी होती है, जो बेहद सख्त और मोटी होती है। ये करीब दो सौ डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही फटती है। तब इसमें से निकलता है पॉपकॉर्न।
आज पॉपकॉर्न का नशा पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है। एक अमेरिकी नागरिक हर साल औसतन पचास लीटर पॉपकॉर्न खा जाता है। वहीं ब्रिटेन में पिछले पांच सालों में पॉपकॉर्न की बिक्री में 169 फीसद का उछाल देखने को मिला है। यूं तो इसका इतिहास बहुत पुराना रहा है। लेकिन सबसे पहले इसे खाने की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। अमरीका के मूल निवासी इसे खाया करते थे। वहां बसने गए यूरोपीय लोगों ने भी पॉपकॉर्न को अपना लिया।
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ये हल्का भी और सेहतमंद भी है। हां, अगर आप इसमें नमक और मक्खन या तेल मिला देंगे, तो इसकी सेहत वाली खूबी नहीं रह जाएगी। पॉपकॉर्न पूरी दुनिया में खूब खाया जाता है। इसकी सबसे पुरानी मिसाल अमेरिकी महाद्वीपों में मिलती है। उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में रेड इंडियन ठिकानों पर इसके दाने मिले हैं।
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सबसे पहले अमेरिका में खाया गया पॉपकॉर्न
एक किस्सा तो ये भी सुनाया जाता है कि एक पुरातत्व वैज्ञानिक को जब मक्के के दाने मिले, तो उसने उन्हें भूनने की कोशिश की। दिलचस्प बात ये रही कि करीब हजार साल पुराने मक्के के दाने गर्म होते ही फूट पड़े। इसकी बड़ी वजह इसकी ऊपरी चमड़ी होती है, जो बेहद सख्त और मोटी होती है। ये करीब दो सौ डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही फटती है। तब इसमें से निकलता है पॉपकॉर्न।
आज पॉपकॉर्न का नशा पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है। एक अमेरिकी नागरिक हर साल औसतन पचास लीटर पॉपकॉर्न खा जाता है। वहीं ब्रिटेन में पिछले पांच सालों में पॉपकॉर्न की बिक्री में 169 फीसद का उछाल देखने को मिला है। यूं तो इसका इतिहास बहुत पुराना रहा है। लेकिन सबसे पहले इसे खाने की शुरुआत अमेरिका में हुई थी। अमरीका के मूल निवासी इसे खाया करते थे। वहां बसने गए यूरोपीय लोगों ने भी पॉपकॉर्न को अपना लिया।
पॉपकॉर्न की कहानी
पॉपकॉर्न
मगर आप को इसके बारे में बहुत सी गलतफहमियां होंगी। तो, चलिए उन्हें दूर कर देते हैं। पहली बात तो ये कि पॉपकॉर्न मक्के के उस भुट्टे से नहीं मिलता, जो आप आम तौर पर खाते हैं। या जिसके दाने आप खाते हैं। पॉपकॉर्न, मक्के की एक खास नस्ल से तैयार होता है। पुरातत्व वैज्ञानिकों ने इसके दाने उत्तर-पश्चिमी अमेरिका में कई गुफाओं में पाए हैं। इसके दक्षिणी अमेरिका में भी इस्तेमाल होने के सबूत मिले हैं।
मशहूर अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस हार्पर गुडस्पीड ने बड़ा दिलचस्प किस्सा बयां किया है। 1941 में छपी अपनी किताब प्लांट हंटर्स इन द एंडीज में वो लिखते हैं कि उन्हें चिली के वैज्ञानिकों से करीब हजार साल पुराने पॉपकॉर्न के दाने मिले थे। एक दिन गुडस्पीड को सूझा कि उन्हें भूना जाए। हालांकि गुडस्पीड को यकीन नहीं था कि वो दाने भुन जाएंगे। मगर तेज आंच में पकाने पर वो दाने फटने लगे, जैसे अभी पिछले साल की फसल के दाने हों।
कैसे भूना जाता है पॉपकॉर्न?
पॉपकॉर्न वाले मक्के के दाने की ऊपरी परत, आम भुट्टों के दानों से चार गुना मोटी होती है। ये चमड़ी ही इसके फटने की असल वजह होती है। इसकी वजह से ही दाने जलने के बजाय फटने लगते हैं। तापमान बढ़ने के साथ दानों के भीतर दबाव बढ़ता जाता है। और जब ये दबाव बर्दाश्त से बाहर हो जाता है, तो दाने फट पड़ते हैं। वैज्ञानिकों ने तजुर्बे से पाया है कि आप पॉपकॉर्न के दाने पर दबाव बढ़ाकर उसे दोगुने आकार का कर सकते हैं। ऐसे में जब वो भूनने पर फटेगा तो पॉपकॉर्न और बड़ा होगा।
दुनिया भर में पॉपकॉर्न अलग-अलग तरह से भूना जाता है। चीन में अक्सर सड़कों के किनारे लोहे के ड्रम के भीतर इन्हें भूना जाता है। इनका मुंह खुला रहता है। जब दाने फटने को होते हैं, तो भूनने वाले इसके ऊपर कैनवस का झोला लगा देते हैं। फूटते हुए दाने उसमें भर जाते हैं। भारत में भी आपने पॉपकॉर्न को लोहे की कड़ाही में भुनते हुए देखा होगा। लेकिन, अमेरिका में इसे बड़ी मशीनों में भूना जाता है।
मशहूर अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस हार्पर गुडस्पीड ने बड़ा दिलचस्प किस्सा बयां किया है। 1941 में छपी अपनी किताब प्लांट हंटर्स इन द एंडीज में वो लिखते हैं कि उन्हें चिली के वैज्ञानिकों से करीब हजार साल पुराने पॉपकॉर्न के दाने मिले थे। एक दिन गुडस्पीड को सूझा कि उन्हें भूना जाए। हालांकि गुडस्पीड को यकीन नहीं था कि वो दाने भुन जाएंगे। मगर तेज आंच में पकाने पर वो दाने फटने लगे, जैसे अभी पिछले साल की फसल के दाने हों।
कैसे भूना जाता है पॉपकॉर्न?
पॉपकॉर्न वाले मक्के के दाने की ऊपरी परत, आम भुट्टों के दानों से चार गुना मोटी होती है। ये चमड़ी ही इसके फटने की असल वजह होती है। इसकी वजह से ही दाने जलने के बजाय फटने लगते हैं। तापमान बढ़ने के साथ दानों के भीतर दबाव बढ़ता जाता है। और जब ये दबाव बर्दाश्त से बाहर हो जाता है, तो दाने फट पड़ते हैं। वैज्ञानिकों ने तजुर्बे से पाया है कि आप पॉपकॉर्न के दाने पर दबाव बढ़ाकर उसे दोगुने आकार का कर सकते हैं। ऐसे में जब वो भूनने पर फटेगा तो पॉपकॉर्न और बड़ा होगा।
दुनिया भर में पॉपकॉर्न अलग-अलग तरह से भूना जाता है। चीन में अक्सर सड़कों के किनारे लोहे के ड्रम के भीतर इन्हें भूना जाता है। इनका मुंह खुला रहता है। जब दाने फटने को होते हैं, तो भूनने वाले इसके ऊपर कैनवस का झोला लगा देते हैं। फूटते हुए दाने उसमें भर जाते हैं। भारत में भी आपने पॉपकॉर्न को लोहे की कड़ाही में भुनते हुए देखा होगा। लेकिन, अमेरिका में इसे बड़ी मशीनों में भूना जाता है।
पॉपकॉर्न भूनने की मशीन
पॉपकॉर्न
पहली बार पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन 1885 में सामने आई थी। इसे अमरीका के इलिनॉय सूबे के चार्स् क्रेटर्स ने बनाया था। वो मूंगफली भूनने के लिए मशीन बना रहे थे। इन्हें भाप के इंजनों से बांधा जाता था। जिसमें दाने और मक्खन मिलाकर रखे जाते थे। जोकर जैसा दिखने वाला एक आदमी इस मशीन की नुमाइश करता था। खाने-पीने के इतिहासकार एंड्र्यू स्मिथ लिखते हैं कि चार्ल्स क्रेटर और उनके सहायक अपनी पॉपकॉर्न भूनने की मशीन को 1893 के वर्ल्ड फेयर में लेकर गए थे।
वहां दोनों आवाज लगाकर लोगों को पॉपकॉर्न चखने के लिए बुलाते थे। एक बैग मुफ्त में देने का वादा करते थे। स्मिथ के मुताबिक इस मशीन को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। पॉपकॉर्न को भुनते देख लोग खूब उत्साहित हुए थे। उन्हें पॉपकॉर्न का स्वाद भी पसंद आया था। आज भी चार्ल्स क्रेटर की कंपनी अमरीका में पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन बनाने की सबसे बड़ी कंपनी है।
वहां दोनों आवाज लगाकर लोगों को पॉपकॉर्न चखने के लिए बुलाते थे। एक बैग मुफ्त में देने का वादा करते थे। स्मिथ के मुताबिक इस मशीन को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। पॉपकॉर्न को भुनते देख लोग खूब उत्साहित हुए थे। उन्हें पॉपकॉर्न का स्वाद भी पसंद आया था। आज भी चार्ल्स क्रेटर की कंपनी अमरीका में पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन बनाने की सबसे बड़ी कंपनी है।
पॉपकॉर्न सेहत के लिए अच्छा
पॉपकॉर्न
आज लोग पॉपकॉर्न को अच्छी सेहत के लिए भी खाना पसंद करते हैं। भले ही आप इसे नमकीन, मक्खन वाला स्नैक समझते हों, जो फिल्म देखते वक्त खाया जाता हो। लेकिन बिना नमक और मक्खन का ये दाना बहुत कम फैट वाला होता है। मार्केटिंग करने वाले इसे बहुत सेहतमंद खाने के तौर पर बेचने में जुटे हुए हैं। पॉपकॉर्न की यही खूबी अमेरिका और ब्रिटेन में इसकी बढ़ती डिमांड की बड़ी वजह है। भले ही पैकेटबंद ज्यादातर पॉपकॉर्न नमक और मक्खन के साथ आता है। आप घर में बस इसे गर्म करके खा सकते हैं।
वैसे घर में दाने भूनने वालों को अब पता चल रहा है कि सिर्फ पॉपकॉर्न ही नहीं, चावल, जौ, गेहूं और अमरनाथ के दाने भी ऐसे ही भूनकर खाए जा सकते हैं। हालांकि वो फूटकर भी पॉपकॉर्न जितने नहीं फूलेंगे। आप फिल्म देखने जाएंगे तो रामदाना या अमरनाथ के दानों को तो नहीं ही खाएंगे। यानी फिलहाल पॉपकॉर्न का हमारी जुबान, दिल और पेट पर राज कायम रहने वाला है।
वैसे घर में दाने भूनने वालों को अब पता चल रहा है कि सिर्फ पॉपकॉर्न ही नहीं, चावल, जौ, गेहूं और अमरनाथ के दाने भी ऐसे ही भूनकर खाए जा सकते हैं। हालांकि वो फूटकर भी पॉपकॉर्न जितने नहीं फूलेंगे। आप फिल्म देखने जाएंगे तो रामदाना या अमरनाथ के दानों को तो नहीं ही खाएंगे। यानी फिलहाल पॉपकॉर्न का हमारी जुबान, दिल और पेट पर राज कायम रहने वाला है।