फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   America ›   hiv treatment possible

क्या एचआईवी का इलाज संभव है?

Tue, 05 Mar 2013 06:53 PM IST
Updated Tue, 05 Mar 2013 06:53 PM IST
विज्ञापन
hiv treatment possible

अमेरिका में एक जन्मजात एचआईवी संक्रमित बच्ची का इलाज कर उसे ‘ठीक’ कर

विज्ञापन
लिया गया है। इस कामयाबी से उस बच्ची का जीवन अब पूरी तरह बदल जाएगा।

अब न तो उसे जीवनभर दवाएं लेनी होंगी, न ही सामाजिक दुर्भाव झेलनी होगी और न ही अपने दोस्तों और परिवार को बताने या न बताने की चिंता झेलनी होगी।

लेकिन इन सबके बीच एक बड़ा सवाल ये है कि क्या वाकई इस कामयाबी से एचआईवी का इलाज संभव हो गया है? अमेरिका में मिली इस कामयाबी के साथ विशेष परिस्थितियां जुड़ी हुई हैं।

पहले तो डॉक्टरों ने बच्ची में एचआईवी का पहले पता लगा लिया और शुरुआत में ही वायरस पर करारा हमला किया। लेकिन वयस्कों में इस तरह इलाज संभव नहीं क्योंकि उनमें एचआईवी का पता लगने में महीनों और कई बार तो वर्षों लग जाते हैं।
विज्ञापन


ब्रिटेन में जहां एचआईवी के संभावित खतरे वाले समूहों, जिनकी मुफ्त नियमित जांच की जाती है, उनमें चार में से एक व्यक्ति को पता नहीं होता कि वो एचआईवी पीड़ित हैं। जब तक उन्हें पता लगता है तब तक वायरस पूरी तरह फैल चुका होता है और प्रतिरोधी तंत्र में जड़ें जमा चुका होता है जिसका इलाज संभव नहीं हो पाता।
विज्ञापन
विज्ञापन


'किलर' नहीं

तो क्या एचआईवी का इलाज संभव नहीं? सबसे पहले ध्यान देने वाली बात ये है कि एचआईवी अब पहले की तरह ‘घातक’ नहीं रहा।

इसके बारे में पहली बार 20वीं सदी की शुरुआत में अफ्रीका में पता चला और 1980 तक आते-आते ये वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बन गया।

शुरुआती दिनों में इसका कोई इलाज नहीं था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक पिछले तीन दशकों में इस जानलेवा वायरस ने ढाई करोड़ से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।

नब्बे के दशक के मध्य में इस वायरस के खिलाफ ऐसी थेरेपी विकसित हुई जिसकी वजह से एचआईवी-एड्स से होने वाली मौत की संख्या में नाटकीय कमी आई।

उसके बाद पता चला कि एचआईवी से संक्रमित लोगों का अगर सही इलाज किया जाए तो उनका जीवन काल सामान्य लोगों की तरह हो सकता है। लेकिन सही इलाज की शर्त इसके मरीजों पर बहुत भारी पड़ती है, क्योंकि एचआईवी संक्रमित लोगों का 70 फीसदी सब सहारन अफ्रीका में रहता है जहां दवाओं की बहुत किल्लत है।

'कमजोर कड़ी'
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉक्टर जॉन फ्रेटर ने बीबीसी को बताया कि हम हमेशा सोचते थे कि एचआईवी की रोकना असंभव है। लेकिन हमने वैसी चीजों की खोज शुरू की जिसके बारे में पहले कोई जानकारी नहीं थी। और अब लगता है कि ये नहीं कहा जा सकता कि एचआईवी का इलाज असंभव है।

जब किसी व्यक्ति को पहली बार एचआईवी का संक्रमण होता है तो ये तेजी से फैलता है और पूरे शरीर की कोशिकाओं को संक्रमित कर देता है। उसके बाद वायरस डीएनए के भीतर छुप जाता है जहां उसे छुआ नहीं जा सकता।

लेकिन अब ऐसी प्रायोगिक दवाएं मौजूद हैं जो वायरस को शरीर से बाहर निकाल सकती हैं और उसे बेअसर कर सकती हैं। डॉक्टर फ्रेटर कहते हैं कि दवाओं से वायरस कोशिका के भीतर सक्रिय हो जाता है और प्रतिरक्षी तंत्र में नज़र आने लगता है, जहां टीके की मदद से उस पर हमला किया जा सकता है।

हालांकि इस प्रक्रिया से इलाज के लिए ऐसी दवाओं की जरूरत होती है जो वायरस को सक्रिय बना सके और ऐसे टीके की ज़रूरत होती जो प्रतिरक्षी तंत्र को इसे ख़त्म करने का प्रशिक्षण दे सके। डॉक्टर फ्रेटर कहते हैं कि सच्चाई ये है कि हम इस स्तर तक पहुंचने के अभी काफ़ी दूर हैं।

एक और विकल्प ये हो सकता है कि इलाज के क्रम में एक ऐसे म्यूटेशन यानी जेनेटिक बदलाव का प्रयोग किया जाए जिससे लोग एचआईवी संक्रमण से सुरक्षित हो जाएं।

साल 2007 में टिमोथी रे ब्राउन पहले ऐसे व्यक्ति बने जिनका एचआईवी वायरस के संक्रमण से पूरी तरह इलाज संभव हो सका। रक्त कैंसर के इलाज के क्रम में पहले उनके प्रतिरक्षी तंत्र को नष्ट किया गया, उसके बाद म्यूटेशन वाले एक मरीज के स्टेम सेल को उनमें ट्रांसप्लांट किया गया।

मरीज के अपने प्रतिरक्षी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद ली जा सकती है उसे वायरस के हमले से सुरक्षित किया जा सके लेकिन ये फिलहाल संभव होता नज़र नहीं आ रहा।

'अनिश्चय'
ब्रिटेन में इंपीरियल कॉलेज के एड्स वैक्सीन प्रोग्राम के प्रमुख प्रोफेसर जोनाथन वेबर कहते हैं कि परिपक्व संक्रमण के मामलों में हमें कुछ जानकारी है लेकिन ये सब अभी प्रायोगिक दवाओं के स्तर पर ही है।


अभी तक इस क्षेत्र में सर्वसम्मति नहीं बन सकी है और न ही कोई सीधा रास्ता नजर आता है।

लंदन के होमर्टन अस्पताल की कंसल्टेंट प्रोफ़ेसर जेन एंडरसन कहती हैं कि अमेरिकी बच्ची के इलाज के मद्देनजर इस बारे में अभी सावधानी बरतने की जरूरत है।

प्रोफेसर एंडरसन के मुताबिक ये बेहद खुशी का मौका है लेकिन इससे आज की एचआईवी संक्रमित दुनिया का चेहरा बदला नहीं जा सकता।

माताओं से बच्चे में संक्रमण के मामलों को दवाओं और शल्य चिकित्सा से रोका जा सकता है। लेकिन वयस्कों में ज्यादातर मामले असुरक्षित सेक्स की वजह से होते हैं। एचआईवी एक संक्रमण है जहां बचाव इलाज से ज्यादा आसान है।

जेम्स गैलाघर (स्वास्थ्य और विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज)

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news, Crime all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed