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ट्रंप ने शुरू की एच1बी वीजा पर लगाम लगाने की मुहिम
amarujala.com- submitted by: आनंद
Updated Wed, 19 Apr 2017 06:38 PM IST
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अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उस आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं जिसके तहत एच1बी वीजा कार्यक्रम की समीक्षा की जाएगी। असल में इसे इस वीजा कार्यक्रम पर लगाम कसने की शुरुआत माना जा रहा है। डोनल्ड ट्रंप ने आदेश पर दस्तखत करने के बाद कहा, "हमारे इमिग्रेशन सिस्टम में गड़बड़ी की वजह से हर तबके के अमरीकियों की नौकरियां विदेशी कामगारों के हिस्से जा रही हैं। कंपनियां, कम वेतन देकर विदेशियों को नौकरी पर रख लेती हैं जिससे अमरीकियों की नौकरियां मारी जा रही हैं।
ये सब अब खत्म होगा। लंबे समय से अमेरिकी कर्मचारी वीजा सिस्टम के दुरुपयोग को खत्म करने की मांग करते रहे हैं। आज उनकी मांगों पर पहली दफा अमल किया जा रहा है।" एच1बी वीजा की समीक्षा में सरकारी विभागों से सुधार के सुझाव मांगे जाएंगे। साथ ही संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी प्रोजेक्ट्स से विदेशी कंपनियों को दूर करने के सरकारी नियम सख्ती से अमल में लाए जाएं। अमेरिकी राज्य विसकॉन्सिन की एक फैक्टरी में यात्रा के दौरान ट्रंप ने सरकारी सामानों की खरीदारी में अमेरिका में निर्मित वस्तुओं की बिक्री बढ़ाने के लिए भी एक आदेश जारी किया।
व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों के अनुसार ये दोनों आदेश ट्रंप के "बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन (Buy American, Hire American) नीति के तहत जारी किए गए। ट्रंप का ये फैसला राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान उनके 'अमेरिकन फर्स्ट' चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। हालांकि उन्होंने प्रचार के दौरान एच1बी वीजा कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म करने की बात कही थी लेकिन अब तक वो ऐसा नहीं कर पाए हैं।
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एच1 बी वीजा के तहत अमेरिका में हाइ स्किल्ड नौकरियों के लिए कंपनियां विदेशी लोगों को भेजती हैं। इस वीजा कार्यक्रम के तहत आईटी संबंधित नौकरियों के लिए बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियरों को सॉफ्टवेयर कंपनियां अमेरिका भेजती हैं। डोनल्ड ट्रंप तर्क देते रहे हैं कि इस वजह से अमरीकियों को खामियाजा भुगतना पड़ता है क्योंकि उनकी नौकरियां विदेशी लोगों के हिस्से आ जाती हैं।
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ये सब अब खत्म होगा। लंबे समय से अमेरिकी कर्मचारी वीजा सिस्टम के दुरुपयोग को खत्म करने की मांग करते रहे हैं। आज उनकी मांगों पर पहली दफा अमल किया जा रहा है।" एच1बी वीजा की समीक्षा में सरकारी विभागों से सुधार के सुझाव मांगे जाएंगे। साथ ही संस्थाओं को निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी प्रोजेक्ट्स से विदेशी कंपनियों को दूर करने के सरकारी नियम सख्ती से अमल में लाए जाएं। अमेरिकी राज्य विसकॉन्सिन की एक फैक्टरी में यात्रा के दौरान ट्रंप ने सरकारी सामानों की खरीदारी में अमेरिका में निर्मित वस्तुओं की बिक्री बढ़ाने के लिए भी एक आदेश जारी किया।
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व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों के अनुसार ये दोनों आदेश ट्रंप के "बाय अमेरिकन, हायर अमेरिकन (Buy American, Hire American) नीति के तहत जारी किए गए। ट्रंप का ये फैसला राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान उनके 'अमेरिकन फर्स्ट' चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया जा रहा है। हालांकि उन्होंने प्रचार के दौरान एच1बी वीजा कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म करने की बात कही थी लेकिन अब तक वो ऐसा नहीं कर पाए हैं।
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एच1 बी वीजा के तहत अमेरिका में हाइ स्किल्ड नौकरियों के लिए कंपनियां विदेशी लोगों को भेजती हैं। इस वीजा कार्यक्रम के तहत आईटी संबंधित नौकरियों के लिए बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियरों को सॉफ्टवेयर कंपनियां अमेरिका भेजती हैं। डोनल्ड ट्रंप तर्क देते रहे हैं कि इस वजह से अमरीकियों को खामियाजा भुगतना पड़ता है क्योंकि उनकी नौकरियां विदेशी लोगों के हिस्से आ जाती हैं।
कामगारों के हित
trump
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार एच1बी से जुड़े ट्रंप के आदेश में श्रम, न्याय, गृह और विदेश मंत्रालय से कहा जाएगा कि वो अमेरिकी आप्रवासन तंत्र में चल रही "धांधली" को रोकने के लिए कदम उठाएं जिससे अमेरिकी कामगारों के हितों की रक्षा हो सके। इस आदेश में ये भी कहा जाएगा कि वो ऐसे सुधार लाएं जिसके तहत ये सुनिश्चित किया जा सके कि एच1बी वीजा सबसे ज्यादा दक्षता या सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले आवेदकों को ही मिले।
अमेरिका में काफी समय से ये बहस चल रही है कि एच1बी वीजा कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है और और खासतौर से भारत से बेहद कम वेतन पर लोगों को लाकर अमेरिकी नागरिकों को नौकरियों से वंचित किया जा रहा है। अमेरिकी सरकार हर साल 65,000 एच1बी वीजा लॉटरी के जरिए जारी करती है। लेकिन कई आउटसोर्सिंग कंपनियों की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि वो भारी संख्या में वीजा आवेदन डालती हैं और ज्यादा से ज्यादा वीजा हासिल करके टेक्नॉलॉजी से जुड़ी निचले स्तर की नौकरियों में अपने लोगों को भर देती हैं।
अमेरिकी आप्रवासन विभाग के अनुसार इस बार एच1बी वीजा आवेदकों की संख्या में 2016 के मुकाबले बड़ी गिरावट आई है। पिछले साल दो लाख छत्तीस हजार लोगों ने इसके लिए आवेदन पत्र भरे थे जबकि इस बार ये संख्या एक लाख निन्यानबे हजार थी। अंदाजा है कि वीजा नियम में इन बदलावों से कई भारतीय कंपनियों को खासा नुकसान हो सकता है।
अमेरिका में काफी समय से ये बहस चल रही है कि एच1बी वीजा कानून का गलत इस्तेमाल हो रहा है और और खासतौर से भारत से बेहद कम वेतन पर लोगों को लाकर अमेरिकी नागरिकों को नौकरियों से वंचित किया जा रहा है। अमेरिकी सरकार हर साल 65,000 एच1बी वीजा लॉटरी के जरिए जारी करती है। लेकिन कई आउटसोर्सिंग कंपनियों की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि वो भारी संख्या में वीजा आवेदन डालती हैं और ज्यादा से ज्यादा वीजा हासिल करके टेक्नॉलॉजी से जुड़ी निचले स्तर की नौकरियों में अपने लोगों को भर देती हैं।
अमेरिकी आप्रवासन विभाग के अनुसार इस बार एच1बी वीजा आवेदकों की संख्या में 2016 के मुकाबले बड़ी गिरावट आई है। पिछले साल दो लाख छत्तीस हजार लोगों ने इसके लिए आवेदन पत्र भरे थे जबकि इस बार ये संख्या एक लाख निन्यानबे हजार थी। अंदाजा है कि वीजा नियम में इन बदलावों से कई भारतीय कंपनियों को खासा नुकसान हो सकता है।