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दुनिया के सबसे ताकतवर देश के स्कूल भी नहीं हैं सुरक्षित

Wed, 11 Jul 2018 05:31 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 11 Jul 2018 05:31 PM IST
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Gun Related Incidents of US Schools in past two decades
दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका भी अपने स्कूलों को सुरक्षित रख पाने में पूरी तरह फेल साबित हुआ है। अमेरिका के स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या है यहां होने वाली गोलीबारी की घटनाएं। 
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गोलीबारी की घटनाएं इतनी ज्यादा बढ़ चुकी हैं कि इसमें कई छात्र अपनी जान गंवा बैठे हैं। अगर बीते दो दशक की बात करें तो अमेरिका में फायरिंग की ऐसी कई घटनाएं सामने आई जब हमलावर ने अंधाधुंध फायरिंग कर कई छात्रों को मौत के घाट उतार दिया। मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे पिछली सरकार की विफलता से जोड़ा तो विशेषज्ञों ने इसके पीछे कई अहम कारण बताए। 
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फ्लोरिडा में पूर्व छात्र ने बरसाईं थी गोलियां, 2018

साउथ फ्लोरिडा के एक हाईस्कूल में एक पूर्व छात्र ने फायरिंग कर 17 लोगों को मौत के घाट उतारा था। इनमें कई स्टूडेंट्स भी शामिल थे। 14 लोग जख्मी भई हुए थे। आरोपी निकोलस क्रूज की उम्र 19 साल थी। वह इसी स्कूल का पूर्व छात्र था।
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टेक्सस गोलीकांड, 2017

अगर हाल ही में हुई गोलीबारी की घटना के बारे में बात करें तो टेक्सस गोलीकांड की चर्चा करना जरूरी हो जाता है। घटना में आठ लोगों की मौत हुई थी जिनमें मरने वाले ज्यादातर बच्चे थे। यह इस साल गोलीबारी की 22 वीं घटना थी।

ओरेगन प्रांत के कम्यूनिटी स्कूल, 2015

कई सारी बंदूकों के साथ एक 26 साल का युवक अमेरिका के ओरेगन प्रांत के कम्यूनिटी स्कूल में दाखिल हुआ और छात्रों पर गोलियां बरसाना शुरु कर दिया। इस घनटा में 9 लोगों  मारे गए।

मेरीसवीले-पिलचुक हाईस्कूल, 2014

वाशिंगटन राज्य में सिएटल से 55 किलोमीटर दूर मेरीसवीले-पिलचुक हाईस्कूल के कैफेटेरिया में एक छात्र ने स्कूल के कैफेटेरिया में गोलीबारी की, जिससे एक अन्य छात्र की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। बाद में छात्र ने आत्महत्या कर ली। इस घटना में दो अन्य लड़कियां और दो लड़के जख्मी हो गए।

कोलोराडो के हाईस्कूल में गोलीबारी, 2013

इस मामले में अध्यापक से नाराज होने के कारण कोलोराडो के हाईस्कूल में गोलीबारी करने वाले किशोर ने दो छात्रों को घायल करने के बाद आत्महत्या कर ली थी।

27 फरवरी 2012, कार्डन हाई स्कूल, ओहायो

साल 2012 में 27 फरवरी को स्कूल के एक छात्र ने अचानक फायरिंग कर कई गोलियां चला दी थी, जिसमें 3 छात्रों की मौत हो गई थी जबकि दो घायल हुए थे।

2 अक्टूबर 2006 पेनसिलवेनिया 

पेनसिलवेनिया के वेस्ट निकेल माइंस स्कूल स्कूल में 32 साल के एक युवक ने 11 लड़कियों को बंधक बनाकर इस पूरे घनटाक्रम को अंजाम दिया था। बंधक बनाने के बाद हमलावर ने फायरिंग कर 5 की जान ले ली थी और छह को जख्मी कर दिया था। इसके बाद हमलावर ने खुद को  मौत के घाट उतार लिया था।

8 नवंबर 2005, कैंपबेल काउंटी हाई स्कूल

कैंपबेल काउंटी हाई स्कूल में 15 वर्ष के एक छात्र ने छात्रों को निशाना ने बनाते हुए  प्रिंसिपल और दो सहायक प्रिंसिपल को निशाना बनाया था। ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं जिसमें एक की मौत हो गई थी।

5 मार्च 2001, सैंटना हाई स्कूल, कैलिफॉर्निया

स्कूल में पढ़ने वाले एक 15 वर्षीय छात्र ने भीषण गोलीबार को अंजाम दिया था। इस गोलीकांड में छात्र ने अपने दो साथियों को मौत के घाट उतार दिया था, यही नहीं इसमें 13 लोग जख्मी भी हुए थे।

20 अप्रैल 1999, कोलंबाइन हाई स्कूल, कोलोरैडो

इस स्कूल के दो छात्रों ने खुदकुशी करने से पहले अंधाधुंध फायरिंग कर 12 छात्रों और एक टीचर की जान ले ली

21 मई 1998, थर्स्टन हाई स्कूल, ओरेगन

15 साल के एक छात्र ने पहले अपने मां-बाप को मारने के बाद स्कूल में फायरिंग की जिसमें दो छात्रों की मौत हो गई।
 

बढ़ता गन कल्चर है इन घटनाओं का बड़ा कारण

Gun Related Incidents of US Schools in past two decades

इन वारदातों का कारण अमेरिका में बढ़ता गन कल्चर हैं। एवरीटाउन फॉर गन सेफ्टी के मुताबिक इस साल अब तक कुल 13 अमेरिकी प्रांतों में स्कूलों के भीतर गोलीबारी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 

आरोपी छात्र ने इन घटनाओं में जिस एआर-15 राइफल का इस्तेमाल करते हैं उस पर 1994 से 2004 तक प्रतिबंध लग चुका है, लेकिन बुश प्रशासन ने अमेरिका में बंदूकों पर लगे प्रतिबंध से संबंधित कानून ही समाप्त कर दिया। तभी से देश में गोलीबारी की घटनाएं बढ़ी हैं। 

अमेरिका में 66% लोगों के पास एक से ज्यादा गन

बता दें कि 89 फीसदी अमेरिकी अपने पास हथियार रखते हैं। 66% लोगों के पास एक से ज्यादा गन हैं। दुनियाभर की कुल सिविलियन गन में से 48% (करीब 31 करोड़) सिर्फ अमेरिकियों के पास हैं।
 
वहीं अमेरिका में हथियार बनाने वाली इंडस्ट्री का सालाना रेवेन्यू 91 हजार करोड़ रुपए है। 2.65 लाख लोग इस कारोबार से जुड़े हुए हैं। हर साल एक करोड़ से ज्यादा रिवॉल्वर, पिस्टल जैसे हथियार बनते हैं। अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हथियार की बिक्री सें 90 हजार करोड़ रुपए आते हैं।

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