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गूगल पर सत्तर लाख डॉलर का जुर्माना

Wed, 13 Mar 2013 06:53 PM IST
Updated Wed, 13 Mar 2013 06:53 PM IST
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google street view snooping scandal

गूगल की मशीन लगी कारें भारत में तो नहीं दिखी हैं लेकिन दुनिया की कई शहरों में ये कारें दिखीं जो लोगों के बारे में निजी आंकड़े जुटा रही थीं।

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कई लोगों ने इस पर आपत्ति की और अमरीका में गूगल पर जुर्माना लगा है सत्तर लाख डॉलर का।

गूगल ने अपनी स्ट्रीट व्यू सेवा के तहत अपने कैमरों से दुनिया भर की गलियों, सड़कों, घरों के आंकड़े जुटाने शुरू किए थे जिस पर लोगों ने आपत्ति की थी कि उनके बारे में बिना अनुमति के जानकारी जुटाई गई है।
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इस मामले में गूगल और अमेरिका के 38 राज्यों के बीच समझौता हुआ है। जिसके तहत गूगल हजारों की संख्या में ईमेल, पासवर्ड और इंटरनेट इतिहास को नष्ट करेगा।

यह आंकड़े गूगल की कारों में लगे कैमरों ने 2008 से 2010 के बीच जुटाए थे। इन कारों में लगे कैमरों ने घरों के वायरलेस नेटवर्क से ये जानकारियां जुटाई थीं। गूगल ने मामला सुलझने पर संतोष प्रकट किया है।
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जुर्माना भी और ट्रेनिंग भी
कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि हम अपनी कंपनी में निजता के अधिकार को लेकर बहुत मेहनत करते हैं। लेकिन इस मामले में हम ऐसा नहीं कर पाए। इसलिए हमने अपनी व्यवस्था को चाक चौबंद किया है।

बयान में कहा गया है कि इस परियोजना के लीडर नहीं चाहते थे। ये आंकड़े और किसी ने इन आंकड़ों को देखा तक नहीं। हमें खुशी है कि हमने कनेक्टीकट के अटार्नी के साथ मिलकर काम किया और अन्य राज्यों के साथ भी और इस समझौते पर पहुंच पाए।

न्यूयॉर्क के अटार्नी जनरल एरिक स्नाइडरमैन ने गूगल और विभिन्न राज्यों के बीच समझौते की घोषणा की। उनका कहना था कि उपभोक्ताओं को अधिकार है कि वो अपनी निजी एवं वित्तीय जानकारियों को सुरक्षित रखें ताकि गूगल जैसी कंपनियां उनका अनचाहा इस्तेमाल न कर पाएं।


गूगल इस समझौते के तहत न केवल निजी आंकड़े नष्ट करने पर राजा हुआ है बल्कि वो निजी आंकड़ों के मुद्दे पर अपने कर्मचारियों के लिए एक ट्रेनिंग कार्यक्रम की भी शुरुआत कर रहा है जो दस वर्ष तक चलेगा।

इतना ही नहीं गूगल एक विज्ञापन अभियान भी चलाएगा जिसमें वो अपने उपभोक्ताओं को बताएगा कि वो वायरलेस नेटवर्कों पर जानकारियों को कैसे सुरक्षित रखें।

गूगल का दावा है कि उसने वायरलेस नेटवर्कों से आंकड़े एकत्रित किए क्योंकि किसी एक इंजीनियर की गलती से एक कोड जुड़ गया था।

इस विवाद के बाद दुनिया भर के विशेषज्ञों ने गूगल में बदलाव की मांग की थी। टेक्नोलॉजी रिसर्च फर्म ओवम के मुख्य विशेषज्ञ जैन डाउसन कहते हैं कि गूगल पर लगा जुर्माना अपनी तरह का सबसे बड़ा जुर्माना है। हालांकि डाउसन के लिए अनुसार सत्तर लाख डॉलर गूगल जैसी कंपनी के लिए चिल्लर के समान है।

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