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कला के सामने बच्चों ने बंदूकें छोड़ दीं

Mon, 01 Apr 2013 04:32 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Mon, 01 Apr 2013 04:32 PM IST
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give up guns for art

आमिर ख़ान की फ़िल्म तारे ज़मीं पर याद है आपको? उसका संदेश है- बच्चों को प्यार से समझाओ और ये भी कि कला उनकी ज़िंदगी को नई दिशा दे सकती है।

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अमेरिका में इसी तर्ज पर कला से बच्चों की ज़िंदगी बदलने की कोशिश हो रही है। बीबीसी संवाददाता जेन ओब्रायन ने बॉस्टन स्थित ऑर्चर्ड गार्डन्स स्कूल में जाकर देखा कि वहां परिवर्तन की बयार कैसी बह रही है।
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कुछ साल पहले तक आर्चर्ड गार्डन्स स्कूल अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती की तरह था। स्कूल में हिंसा आम बात थी, बच्चे हथियार लेकर आते थे और कोई शिक्षक रुकता नहीं था।
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स्कूल का 13 वर्षीय छात्र जैमाए भी कम मुश्किलें खड़ी नहीं करता था। लेकिन कला ने उसे पूरी तरह बदल दिया है और अब उसकी पेंटिंग्स को पुरस्कार मिल रहे हैं।

वो कहता है, “जब भी मुझे गुस्सा आता है तो मैं पेंटिंग बनाना पसंद करता हूं। ये मुझे शांत रखता है, इससे अच्छा लगता है।”

तीन साल पहले जब एंड्र्यू बॉट ने स्कूल के प्रिंसिपल के रूप में पदभार संभाला तब से कला स्कूल का केंद्रीय विचार बन गई।

उन्होंने सबसे पहले सिक्योरिटी गार्ड्स को बाहर निकाला और उस पैसे से उन्होंने कला शिक्षकों को रखा।

जो करो निर्भीकता से करो
एंड्र्यू बॉट कहते हैं, “कई लोगों ने मुझसे कहा कि धीरे चलो, धीरे-धीरे गार्ड्स को निकालो और फिर कला शिक्षकों को रखो, लेकिन मैंने वृहद रूप से तस्वीर को देखा। बदलाव करना है तो बड़े और निर्भीक तरीके से करना होगा।”

स्कूल के 90 फ़ीसदी बच्चे गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं और कुछ तो बेघर भी हैं।

ये स्कूल अब सरकार द्वारा प्रायोजित कला कार्यक्रम का एक हिस्सा है।

कला पर बनी राष्ट्रपति की समिति की रशेल गॉस्लिन्स कहती हैं, “पिछले दस साल में बहुत शोध किया गया है। इसके नतीजे बताते हैं कि कला से जुड़ने वाले गरीब बच्चों की हाजिरी तीन गुना ज़्यादा होने की संभावना होती है, छात्र समूह या छात्रों की सरकार में उनके शामिल होने की संभावना चार गुना ज़्यादा होती है, कॉलेज जाने से पहले उनकी उपलब्धियां उल्लेखनीय रूप से ज़्यादा होती हैं।”

सिर्फ़ कला वजह नहीं!
लेकिन कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि यह साबित नहीं किया जा सकता कि सिर्फ़ कला की वजह से सारे परिवर्तन हुए हैं।

मैरीलैंड विश्वविद्यालय में संगीत विद्यालय के कैनेथ एल्पस कहते हैं, “यह सही है कि जिन स्कूलों में कला विषय शामिल है उनके बच्चे उन स्कूलों से अच्छा प्रदर्शन करते हैं जहां कला नहीं है लेकिन दुर्भाग्य से शोध अभी तक यह पता नहीं लगा सके हैं कि ऐसा क्यों है।“

वो कहते हैं, “मुझे लगता है कि जहां कला विषय और बेहतर नेतृत्व होता है वहां बच्चों को करने के लिए ज़्यादा चीज़ें मिलती हैं और इसीलिए वो बेहतर कर पाते हैं।”


अमेरिका के 60 लाख से ज़्यादा बच्चों, जिनमें ज़्यादातर गरीब और अल्पसंख्यक हैं, को किसी तरह की कला की शिक्षा नहीं मिल पा रही। विडंबना ये है कि इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत इन्हीं को है।

पेंटिंग के अलावा जमाए को संगीत भी पसंद है। वो कहते हैं कि इससे उन्हें स्कूल के बाहर भी कुछ बुरा करने से रुकने में मदद मिलती है और वो ये सोच पाते हैं कि दुनिया में कितना कुछ किया जा सकता है।

यह कोई अचरज की बात नहीं कि कला की शिक्षा में संगीत पर ही सबसे ज़्यादा जोर दिया जा रहा है।

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