आतंकी का आईफोन अनलॉक करने के लिए एफबीआई ने चुकाए 8.5 करोड़ रुपए
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अमेरिका के सैन बर्नार्डिनो में गोली मारकर छह लोगों की हत्या करने वाले पाकिस्तानी दम्पति के आईफोन का सिक्योरिटी फीचर खुलवाने के लिए एफबीआई को करीब साढ़े आठ करोड़ रुपए की कीमत चुकानी पड़ी है। इसका खुलासा एफबीआई डायरेक्टर जेम्स कोमी की बातों से हुआ है। उन्होंने इशारों ही इशारों में आईफोन की सिक्योरिटी ब्रेक करने में आई लागत का जिक्र कर दिया।
लंदन में आयोजित एक सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कोमी ने आईफोन को अनलॉक करने की सही सही कीमत तो नहीं बताई लेकिन उनके बयान से इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि यह रकम इतनी है कि जितनी मैं अपने सात साल और चार महीने लंबे कार्यकाल में कमाऊंगा। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक फिलहाल कोमी की सालाना आय करीब एक करोड़ बीस लाख रुपए हैं। इसके हिसाब से वह तय समय में करीब साढ़े आठ करोड़ रुपए कमा लेंगे जो आईफोन को अनलॉक करने की कीमत भी है।
एप्पल ने कर दिया था इनकार
एफबीआई ने जिस आईफोन को अनलॉक करने के लिए इतनी बड़ी रकम चुकाई है वह पिछले साल दिसंबर में अमेरिका के सैन बर्नार्डिनो में आतंकी हमले को अंजाम देने वाले सैय्यद रिजवान फारूक का है। फारूक ने अपनी पत्नी तशफीन मलिक के साथ मिलकर एक सार्वजनिक स्थान पर गोलीबारी को अंजाम दिया था जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई थी। छानबीन के दौरान एफबीआई ने फारूक का आईफोन जब्त कर लिया था और आईफोन बनाने वाली कंपनी एप्पल से उसे अनलॉक करने के लिए भी कहा था जिससे कंपनी ने इनकार कर दिया। इसके बाद यह मामला कोर्ट भी पहुंचा लेकिन एप्पल ने अपने सिक्योरिटी फीचर से समझौता करने से साफ इनकार कर दिया।
वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक कंपनी ने अपने आईफोन 5-सी के इन्क्रिप्शन कोड को अनलॉक करने से इनकार कर दिया जिसके बाद एफबीआई ने दूसरा रास्ता अपनाया और फोन को अनलॉक करने के लिए उसने प्रोफेशनल हैकरों का सहारा लिया जिसके लिए उन्हें साढ़े आठ करोड़ की कीमत भी चुकानी पड़ी। हालांकि, इसके बाद भी एफबीआई को उस फोन से ऐसा कोई सुराग नहीं मिला जिससे फारूक के आतंकी होने और दूसरे देशों के आतंकी संगठनों से नाता होने की बात की पुष्टि होती हो। आईफोन को अनलॉक करने के मुद्दे ने अमेरिका में निजता बनाम सुरक्षा जैसे मुद्दे की बहस तेज हो गई थी जिस पर कोनी ने इसे उनके काम का एक हिस्सा बताया।