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पांच अरब लोगों को इंटरनेट से जोड़ने की योजना
Updated Thu, 22 Aug 2013 01:22 PM IST
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पांच अरब नए लोगों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए फेसबुक ने एरिकसन, मीडिया टेक, नोकिया, ऑपेरा, क्वालकॉम और सैमसंग जैसी कंपनियों से समझौता किया है।
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फेसबुक के अनुसार कंपनी विकासशील देश के लोगों को इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले समाज का हिस्सा बनने में मदद करना चाहती है।
लेकिन जानकारों का कहना है कि विकासशील देश के लोगों की प्राथमिकताएं कुछ दूसरी हैं।
फेसबुक के मालिक जकरबर्ग के अनुसार उनका मकसद उनलोगों तक इंटरनेट सुविधाओं को पहुंचाना है जो फिलहाल इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
कंपनी ने बयान जारी कर कहा, ''फिलहाल सिर्फ दो अरब 70 लाख लोग यानि कि पूरी आबादी का केवल एक तिहाई लोग ही इस समय इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं। इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की वृद्धि दर हर साल लगभग नौ फीसदी है जोकि बहुत तेज नहीं है।''
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लंदन विश्वविद्यालय के डॉक्टर माइकल जेनिंग्स ने कहा कि वो फेसबुक के इस प्रयास का स्वागत करते हैं लेकिन इसके अलावा दूसरी बिजली जैसी दूसरी अहम जरूरतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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बीबीसी से बातचीत के दौरान डॉक्टर जेनिंग्स ने कहा, ''यह कहना गलत है कि पांच अरब लोग एक दूसरे से नहीं जुड़े हुए हैं। ज्यादातर लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं और मोबाइल मनी जैसी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।''
बाधाएं
न्यूजवेबसाइट ह्यूमनआईपीओ के संपादक टॉम जैकसन ने कहा कि इस मामले में कंपनी की रूचि सराहनीय है लेकिन उनके इस इरादे में अभी कई चीजें अधूरी हैं।
बीबीसी से बातचीत के दौरान जैकसन ने कहा कि फेसबुक ने अभी तक ये नहीं बताया है कि वो पांच अरब नए लोगों को इंटरनेट से कैसे जोड़ेगी।
इस महीने की शुरूआत में तकनीकी मामलों पर नजर रखने वाले विश्लेषक गार्टनर ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है कि स्मार्ट फोन की बिक्री सामान्य फोन से ज्यादा हुई है लेकिन विकासशील देशों में अभी भी बहुत सारे लोग बहुत ही मामूली मोबाइल हैंडसेट का इस्तेमाल करते हैं और इंटरनेट की धीमी गति से जूझते हैं।
इस क्षेत्र में हर दिन नई-नई कंपिनयां आगे आ रहीं हैं जो इस बाजार में अहम रोल अदा करना चाहती हैं।
टॉम जैकसन के अनुसार अफ्रीका इन कंपनियों के लिए नया बाजार बन गया है जहां ये अपने लिए जगह बनाना चाहती हैं और फिर मुनाफा कमाना चाहती हैं।
गूगल ने भी हाल ही में 'लून' के नाम से एक नई परियोजना शुरू की है जिसके तहत स्पेस से इंटरनेट संपर्क करने का प्रावधान है।
अगर ये प्रयास सफल हो जाता है तो ये सैटेलाइट कनेक्शन की तुलना में ज्यादा सस्ता होगा।