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फेसबुक हैकर को ईनाम नहीं, मिलेगा चंदा
Updated Thu, 22 Aug 2013 10:37 AM IST
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फ़ेसबुक के मालिक मार्क ज़करबर्ग के पेज को हैक कर फ़ेसबुक की त्रुटियाँ जगज़ाहिर करने वाले हैकर के लिए दुनियाभर के हैकर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं। फ़ेसबुक अमूमन ऐसी प्रोग्रामिंग त्रुटियाँ सामने लाने वालों को ईनाम देता है। लेकिन इस हैकर को फ़ेसबुक द्वारा कोई ईनाम न देने के बाद दुनियाभर के हैकर आगे आए हैं।
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ख़लील श्रेआते ने फ़ेसबुक की प्रोग्रामिंग की ख़ामी पकड़ी थी लेकिन फ़ेसबुक की सुरक्षा टीम ने उनके दावे को ख़ारिज कर दिया था। इसके बाद ख़लील ने मार्कज़करबर्ग के फ़ेसबुक पेज़ पर इसके बारे में जानकारी पोस्ट कर इस त्रुटि को साबित कर दिया था।
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समाचार एजेंसी एफपी के मुताबिक़ श्रेआते ने अपने ब्लॉग पर लिखा कि फ़ेसबुक की टीम द्वारा नज़रअंदाज़ किए जाने के बाद उन्होंने ज़करबर्ग के प्रोफ़ाइल पर पोस्ट की।
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चंदा
फ़ेसबुक अपनी प्रोग्रामिंग में ख़ामियाँ पकड़ने वालों को ईनाम देता है। लेकिन ख़लील को ईनाम नहीं दिया गया। इसके बाद दुनियाभर के हैकर उनके समर्थन में चंदा इकट्टा कर रहे हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ साइबर सुरक्षा फर्म बियोंड ट्रस्ट के मुख्य तकनीकी अधिकारी मार्क मेफ्रेट उनके लिए दस हजार डॉलर की रकम इकट्ठा करने के लिए ऑनलाइन अभियान चला रहे हैं।
हाई स्कूल में पढ़ाई छोड़कर हैकर बनने वाले मार्क का कहना है कि उन्होंने ख़लील के लिए अब तक नौ हजार डॉलर इकट्ठा कर लिए हैं जिसमें उन्होंने स्वंय दो हजार डॉलर का योगदान दिया है।
मार्क एवं अन्य हैकरों का कहना है कि फ़लस्तीन के रहने वाले ख़लील को बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत ईनाम न देकर नाइंसाफ़ी की गई है।
ग़ौरतलब है कि फ़ेसबुक बग (त्रुटि) खोजने वालों को कम से कम पाँच सौ डॉलर का ईनाम देता है। कई बार यह राशि हजारों डॉलर में भी होती है।
मार्क कहते हैं, 'वे फ़लस्तीन में बैठे अपने पाँच साल पुराने लैपटॉप पर रिसर्च कर रहे हैं। उनका लैपटॉप आधा टूटा हुआ है। इस पैसे से उन्हें बहुत मदद मिलेगी।'
निराशा
वहीं स्वंत्रत सुरक्षा शोधकर्ता ग्राहम क्लूली इस मामले में फ़ेसबुक के प्रति सहानुभूति रखते हैं। वे कहते हैं, 'हालाँकि वे फ़ेसबुक की सुरक्षा टीम के जबाव से निराश थे लेकिन उन्होंने मार्कज़करबर्ग के अकाउंट में सेंध मारकर ग़लत किया।'
श्रेआते ने एक ऐसा बग खोजा था जिसके ज़रिए फ़ेसबुक यूजर किसी दूसरे यूज़र के वॉल पर संदेश पोस्ट कर सकते हैं। उन्होंने इसे फ़ेसबुक को भेजा था लेकिन फ़ेसबुक की सुरक्षा टीम ने इसे नकार दिया था। इसके बाद श्रेआते नेज़करबर्ग के फ़ेसबुक पेज पर ही इसे पोस्ट कर दिया था।
अपनी पोस्ट में श्रेआते ने कहा था, 'प्रियज़करबर्ग, सबसे पहले तो मैं आपकी निजता भंग करने के लिए माफ़ी चाहता हूँ। फ़ेसबुक टीम को भेजी गई रिपोर्टों को साबित करने का मेरे पास कोई दूसरा तरीका नहीं है। मैं फ़लस्तीन से हूँ, मेरा नाम ख़लील है।'ज़करबर्ग के प्रोफ़ाइल पर पोस्ट होने के बाद इस बग को जल्द ही ठीक कर दिया गया। फ़ेसबुक ने जल्दबाज़ी में श्रेआते की रिपोर्ट को नकारने के लिए माफ़ी भी माँगी लेकिन उन्हें ईनामी राशि नहीं दी गई।
दुर्भाग्य
फ़ेसबुक ने ख़लील को जबाव दिया, 'दुर्भाग्य से इस ख़ामी को पकड़ने के लिए हम आपको ईनाम नहीं दे पाएंगे क्योंकि आपने हमारी शर्तों का उल्लंघन किया है। हमें उम्मीद है कि वेबसाइट में ख़ामियाँ खोजने के लिए आप हमारे साथ काम करते रहेंगे।'
फ़ेसबुक के मुख्य सुरक्षा अधिकारी जोए सलीवन ने कहा, 'हम उन हैकरों को ईनाम न देने की अपनी नीति नहीं बदलेंगे जो वास्तविक फ़ेसबुक खाते पर बग का इस्तेमाल करते हैं।
ग़ौरतलब है कि फ़ेसबुक के बग बाउंटी प्रोग्राम के तहत अब तक दस लाख डॉलर से ज़्यादा ईनाम में दिए जा चुके हैं। भारतीय शोधकर्ता एवं हैकर भी ईनाम पाने के मामले में काफ़ी आगे हैं।